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जवाहिर की बिटिया को हर शख्स ने दिया आशीर्वाद और उपहार, एक दिन पहले जवाहिर के घर में आग लगने से जल गया था शादी का सामान और रुपये

Sun, 17 Apr 2022 10:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 17 Apr 2022 10:51 PM IST
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villagers helped in marriage, one day before caught fire in house
जवाहिर की बिटिया को हर शख्स ने दिया आशीर्वाद और उपहार, एक दिन पहले जवाहिर के घर में आग लगने से जल गया था शादी का सामान और रुपये
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पथरा (सिद्धार्थनगर)। क्षेत्र के मसिनाखास के शंकरपुर टोले में रविवार को जवाहिर की बिटिया को गांव वालों ने अपनी बेटी मानकर आशीर्वाद और उपहार देकर विदाई की। टेंट वाले से लेकर हलवाई तक ने मदद की। गांव के प्रधान और क्षेत्र की विधायक ने भी आर्थिक मदद की। बेटी की विदाई में लोगों का उत्साह एक दिन पहले आग से हुई तबाही पर भारी पड़ गया।
एक दिन पहले शनिवार को जवाहिर के घर में आग लग गई थी। इसमें शादी के सामान सहित रुपये भी जल गए। आग की लपटों में झुलसे जवाहिर के अरमानों पर रविवार को हर किसी ने मदद का मरहम लगाया। मसिनाखास में शनिवार को आग से आधा दर्जन आशियाने जले थे। इसी में जवाहिर का खपरैल मकान भी शामिल था। आग से तबाही की खबर पर वर पक्ष के लोग जवाहिर के घर पहुंचे, तो आसपास के गांवों के लोगों का तांता लगा रहा। बेटी की विदाई में न केवल सामाजिक सरोकार की, बल्कि धार्मिक सद्भाव की भी बड़ी मिसाल पेश की गई। हिंदू से लेकर मुसलमान तक ने बिटिया की विदाई में जमकर सहयोग किया। देर रात तक लोग जवाहिर के घर पहुंचते रहे। जवाहिर की पत्नी मीना बताती हैं कि लोग सुबह आए, तो उनके घर में सामान के रूप में तिनका भी नहीं था। लोगों ने जो सहयोग किया, उसी से बारातियों के लिए भोजन बना। गांव की बेटी की विदाई में गांव के लोग आगे आए तो समधी भी दिन में विदाई कराने पर सहमत हो गए। दिन में शादी की रस्में पूरी हुईं और दिन में ही बेटी हेमावती विदा हो गई।
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टेंट का नहीं लिया किराया, आधे दर पर हलवाई
आग से तबाही के बाद टेंट कारोबारी मकसूद सुबह जवाहिर के घर पहुंचे और बोले कि बेटी की विदाई है। उन्हें एक रुपया भी किराया नहीं चाहिए। इसी प्रकार हलवाई का काम करने वाले राजकुमार भी आधे दाम में ही काम करने को तैयार हो गए। उन्होंने कहा कि कारीगरों को भी कम मजदूरी में राजी कर लिया है।
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रात में ही पहुंचीं विधायक सैय्यदा खातून
विधायक सैय्यदा खातून शनिवार रात में ही मसिनाखास गांव पहुंचीं। उन्होंने जवाहिर को आर्थिक मदद दी, जबकि गांव में जिन लोगों के घर जले हैं, उन्हें भी आर्थिक सहयोग किया। पूर्व प्रधान सुरेंद्र चौधरी व अन्य लोगों ने भी सहयोग दिया। सभी के सहयोग से बारातियों का स्वागत हुआ और बेटी को सभी ने आशीर्वाद और उपहार दिया।
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हिंदू बेटी की विदाई में मुस्लिम बने मददगार
जवाहिर की बेटी की शादी में लोग मदद को आगे आए, तो मुस्लिम मददगारों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। हिंदू बेटी की विदाई में मुस्लिमों की मदद से गांव में गंगा-जमुनी तहजीब जीवंत हो गई। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि निसार अहमद ने कदम-कदम पर सहयोग किया। आग लगने के बाद बेटी की विदाई तक वे डटे रहे, तो टेंट कारोबारी मकसूद ने किराया नहीं लेने की बात कहकर सबका दिल जीत लिया। निसार यही कहते रहे कि गांव की बेटी है, इज्जत हम सबकी है।

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लेकिन नहीं पसीजा प्रशासन..
जवाहिर की बेटी की शादी से एक दिन पहले आग से सब कुछ खाक होने की खबर पर लेखपाल पहुंचे और रिपोर्ट लगा दी। रविवार को जब मदद की जरूरत थी तो सरकारी महकमे से कोई मददगार आगे बढ़ता नजर नहीं आया। अलबत्ता दो कोटेदारों ने तीन बोरी चावल उनके घर पहुंचवा दिया, जबकि बारातियों के स्वागत के इंतजाम में महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए था।
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