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राष्ट्र के प्रति अविचल श्रद्धा जरूरी : कुलपति
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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राष्ट्र के प्रति अविचल श्रद्धा जरूरी : कुलपति
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में राष्ट्रवाद की अवधारणा विषय पर हुई संगोष्ठी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में स्थापित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के तत्वावधान में राष्ट्रवाद की अवधारणा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कुलपति प्रोफेसर हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्र के प्रति अविचल श्रद्धा जरूरी है।
कुलपति ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी ने एक पुस्तक राष्ट्र चिंतन में लिखा है कि भारत को समझना है, तो राजनीति एवं अर्थनीति के चश्मे से न देखकर सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र बनाने के लिए एक भूमि विशेष में रहने वाले लोगों के हृदय में उसके प्रति अविचल श्रद्धा का भाव होना आवश्यक है।
राष्ट्र केवल नदियों, पहाड़ों या कंकड़ों के ढेर से नहीं बनता, अपितु राष्ट्र के प्रति श्रद्धा का भाव प्रथम आवश्यकता है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर राम अचल सिंह ने कहा कि राष्ट्र सिर्फ जमीन, जनसंख्या एवं सरकार नहीं है बल्कि, राष्ट्र एक भावना है, संवेदना है। जैसा हम सोचते हैं वैसा हमारा स्वभाव होगा। और इसी को अंगीकार कर हम सांस्कृतिक राष्ट्र की परिकल्पना कर सकते हैं।
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स्वागत कुलसचिव डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अधिष्ठाता कला संकाय प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा ने किया। कार्यक्रम का संचालन पंडित दीनदयाल शोध पीठ के समन्वयक डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने किया। कार्यक्रम में प्रो. दीपक बाबू, प्रो. सौरभ, सत्येंद्र दुबे, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. अखिलेश दीक्षित, डॉ. मयंक कुशवाहा, डॉ. यशवंत यादव, डॉ वंदना उपस्थित रहे।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में राष्ट्रवाद की अवधारणा विषय पर हुई संगोष्ठी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में स्थापित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के तत्वावधान में राष्ट्रवाद की अवधारणा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कुलपति प्रोफेसर हरि बहादुर श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्र के प्रति अविचल श्रद्धा जरूरी है।
कुलपति ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी ने एक पुस्तक राष्ट्र चिंतन में लिखा है कि भारत को समझना है, तो राजनीति एवं अर्थनीति के चश्मे से न देखकर सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र बनाने के लिए एक भूमि विशेष में रहने वाले लोगों के हृदय में उसके प्रति अविचल श्रद्धा का भाव होना आवश्यक है।
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राष्ट्र केवल नदियों, पहाड़ों या कंकड़ों के ढेर से नहीं बनता, अपितु राष्ट्र के प्रति श्रद्धा का भाव प्रथम आवश्यकता है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर राम अचल सिंह ने कहा कि राष्ट्र सिर्फ जमीन, जनसंख्या एवं सरकार नहीं है बल्कि, राष्ट्र एक भावना है, संवेदना है। जैसा हम सोचते हैं वैसा हमारा स्वभाव होगा। और इसी को अंगीकार कर हम सांस्कृतिक राष्ट्र की परिकल्पना कर सकते हैं।
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स्वागत कुलसचिव डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अधिष्ठाता कला संकाय प्रोफेसर हरीश कुमार शर्मा ने किया। कार्यक्रम का संचालन पंडित दीनदयाल शोध पीठ के समन्वयक डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने किया। कार्यक्रम में प्रो. दीपक बाबू, प्रो. सौरभ, सत्येंद्र दुबे, डॉ. सुनीता त्रिपाठी, डॉ. अखिलेश दीक्षित, डॉ. मयंक कुशवाहा, डॉ. यशवंत यादव, डॉ वंदना उपस्थित रहे।