Siddharthnagar News: बेकाबू कार डिवाइडर से टकराकर 50 मीटर दूर खाई में गिरी, चालक की मौत
शहर कोतवाल सतीश कुमार सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंच गए थे। रात में ही लिखापढ़ी करके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, मामले की जांच की जा रही है।
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सिद्धार्थनगर जिले में सदर थाना क्षेत्र के बांसी-बर्डपुर मार्ग पर स्थित जमुआर नाला के पास बुधवार देर रात एक बेकाबू कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराते हुए खाई जाकर गिरी। हादसे में कार सवार युवक की मौत हो गई। हादसा इतना भीषण हुआ है कि कार 50 मीटर दूर जाकर गिरी और उसका जर्रा- जर्रा तबाह हो और 50 मीटर दूर जाकर गिरी है। पुलिस ने शव का पंचनामा करके पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
क्षेत्र के भीमापार गांव निवासी भगवानदास (26) पुत्र बाबूलाल मधुकरपुर गांव निवासी एक व्यक्ति का गाड़ी कभी कभार चलाता और दिन में गाड़ी धुलाई का कार्य अपने घर सामने ही करता था। बताया जा रहा है कि बुधवार को गाड़ी मलिक के किसी रिश्तेदार की बांसी- बर्डपुर मार्ग से सटे एक होटल में शादी थी।
वह रात लगभग डेढ़ बजे कुछ लोगों को गाड़ी से मधुकरपुर गांव में छोडने गया था। लौटकर फिर कार्यक्रम स्थल पर जा रहा था, अभी जमुआर नाला के पहले एनएच के पुल के पास पहुंचा था कि कार बेकाबू हो गई और छलांग लगाते हुए लगभग 50 मीटर दूर खाई में जाकर गिरी। तेज आवास सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी ने पुलिस को जानकारी दी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने कार बाहर गिरे भगवानदास को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, जहां डॉक्टरों ने देखते ही उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने परिवार के लोगों को सूचना देकर बुलाया और फिर लाश का पंचनामा करके पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
इस संबंध में शहर कोतवाल सतीश कुमार सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंच गए थे। रात में ही लिखापढ़ी करके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, मामले की जांच की जा रही है।
घर पांच सौ मीटर दूर हुआ हादसा
भगवानदास की जहां मौत हुई है, घटना स्थल से उसके घर से महज पांच सौ मीटर दूरी पर है। जहां पर पूरा परिवार रहता है। लेकिन हादसा होने के काफी समय बाद जब पुलिस ने सूचना दिया कि यहां हादसा हुआ और भगवानदास की मौत हो गई तो उनकों जानकारी हुई। इससे लोग हैरत में पड़ गए। घटना की जानकारी मिलते ही सभी लोग रात में ही जिला अस्पताल पहुंचे।
दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
मृतक भगवान दास स्वभाव से बड़ा अच्छा था, ऐसा घर पहुंचने वाले हर व्यक्ति की जुबान था। लोगों को कहना था कि वह बहुत ही मेहनती थी। दिनभर गाड़ी धुनाई का कार्य करता था, जैसे ही कोई गाड़ी से कहीं जाने की बात करता था, उसके साथ चला जाता था। जिससे कुछ रुपये की आमदनी हो जाए। तीन भाईयों में वह सबसे छोटा था, जिसकी मौत की खबर में सबको झकझोर दिया।
वहीं, मौत के बाद मां पुष्पा को रोता हुआ देख पांच वर्षीय पुत्र प्रिंस रह रहकर रो रहा था। जबकि चार वर्षीय दिव्या घर पर महिलाओं की भीड़ और मां को रोता हुआ देखकर समझ ही नहीं पा रही थी क्या हुआ। वहीं मौत के बाद बड़े भाई रामधनी और मझले भाई रामदास रह रहकर फफक कर रो पड़ते थे। घर पहुंचने वाले हर व्यक्ति की आंख नम हो जा रही थीं, उनका कहना था कि दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।