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अंगूठे ने डुबोई कइयों की लुटिया
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 14 Dec 2015 11:17 PM IST
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हमें तो अपनों ने ही लूटा गैरों में कहां दम था, अपनी कश्ती थी वहां डूबी जहां पानी कम था। किसी शायर की यह पंक्तियां चुनावी दंगल में ताल ठोकने वाले उन प्रत्याशियों पर सटीक बैठती है, जिन्हें वोट तो पर्याप्त मिले, मगर अपनों की नादानी ने उनकी लुटिया डुबो दी।
मतपत्र पर निशान के आगे मुहर लगाने की बजाए परिचितों ने अंगूठा निशान लगा दिया। मतगणना के दौरान यह मतपत्र अवैध घोषित कर दिए गए। नजदीकी जीत-हार के अंतर वाली ग्राम पंचायतों में पराजित प्रत्याशियों को यह कसक खूब साल रही है।
जितने वोट से हार नहीं हुई, उनके पक्ष के उससे भी अधिक वोट कैंसिल हो गए हैं ग्राम प्रधान के चुनाव में जिले की तमाम ग्राम पंचायतों में बेहद कांटे की टक्कर रही। कई सीटों पर जीत-हार का अंतर दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सका। चुनिंदा ग्राम पंचायतों में टॉस के जरिए परिणाम निकालने पड़े। यह नौबत न आती, अगर मतदाताओं को सही तरीके से वोट देने का तरीका सिखाया गया होता।
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दरअसल, जानकारी के अभाव में मतदाताओं ने मतपत्र पर मुहर के साथ ही अपने अंगूठे की छाप भी छोड़ दी। कहीं मुहर की बजाए अंगूठा निशान ही लगा दिया। निर्वाचन प्रक्रिया के अनुरूप न होने से यह सभी मतपत्र अवैध घोषित किए गए हैं। जिले के 14 ब्लाकों में निरस्त घोषित किए गए मतपत्रों की संख्या करीब 7 हजार है।
इसमें ज्यादातर मतपत्र अंगूठा या अतिरिक्त निशान लगा होने के कारण खारिज हुए हैं। इससे पहले बीडीसी व जिला पंचायत के चुनाव में भी ऐसी ही स्थिति थी। सही तरीके से न पड़ने के कारण हजारों वोट कैंसल हो गए। अब फिर इसी त्रुटि ने कई उम्मीदवारों को जीतकर भी हरा दिया है। ऐसे उम्मीदवार विरोधियों से ज्यादा अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। डीएम डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बीडीसी चुनाव के निरस्त वोटों के आंकड़े के बाद वोट देना का सही तरीका बताने के लिए ही लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। प्रशासन अपने स्तर पर कसर नहीं छोड़ रहा। प्रत्याशियों को भी यह चाहिए था कि वोटरों को सही ढंग समझाएं, ताकि वोट कैंसल होने की नौबत न आए।
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मतपत्र पर निशान के आगे मुहर लगाने की बजाए परिचितों ने अंगूठा निशान लगा दिया। मतगणना के दौरान यह मतपत्र अवैध घोषित कर दिए गए। नजदीकी जीत-हार के अंतर वाली ग्राम पंचायतों में पराजित प्रत्याशियों को यह कसक खूब साल रही है।
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जितने वोट से हार नहीं हुई, उनके पक्ष के उससे भी अधिक वोट कैंसिल हो गए हैं ग्राम प्रधान के चुनाव में जिले की तमाम ग्राम पंचायतों में बेहद कांटे की टक्कर रही। कई सीटों पर जीत-हार का अंतर दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सका। चुनिंदा ग्राम पंचायतों में टॉस के जरिए परिणाम निकालने पड़े। यह नौबत न आती, अगर मतदाताओं को सही तरीके से वोट देने का तरीका सिखाया गया होता।
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दरअसल, जानकारी के अभाव में मतदाताओं ने मतपत्र पर मुहर के साथ ही अपने अंगूठे की छाप भी छोड़ दी। कहीं मुहर की बजाए अंगूठा निशान ही लगा दिया। निर्वाचन प्रक्रिया के अनुरूप न होने से यह सभी मतपत्र अवैध घोषित किए गए हैं। जिले के 14 ब्लाकों में निरस्त घोषित किए गए मतपत्रों की संख्या करीब 7 हजार है।
इसमें ज्यादातर मतपत्र अंगूठा या अतिरिक्त निशान लगा होने के कारण खारिज हुए हैं। इससे पहले बीडीसी व जिला पंचायत के चुनाव में भी ऐसी ही स्थिति थी। सही तरीके से न पड़ने के कारण हजारों वोट कैंसल हो गए। अब फिर इसी त्रुटि ने कई उम्मीदवारों को जीतकर भी हरा दिया है। ऐसे उम्मीदवार विरोधियों से ज्यादा अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। डीएम डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बीडीसी चुनाव के निरस्त वोटों के आंकड़े के बाद वोट देना का सही तरीका बताने के लिए ही लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। प्रशासन अपने स्तर पर कसर नहीं छोड़ रहा। प्रत्याशियों को भी यह चाहिए था कि वोटरों को सही ढंग समझाएं, ताकि वोट कैंसल होने की नौबत न आए।