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Siddharthnagar News: श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया
Thu, 12 Feb 2026 02:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 12 Feb 2026 02:15 AM IST
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पकड़ी बाजार। क्षेत्र के सेहुड़ा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन मंगलवार की रात कथावाचक पंडित चंद्रशेखर पांडेय ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मार्मिक प्रसंग सुनाया। कथा सुनकर पंडाल में बैठे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथावाचक ने बताया कि मथुरा के अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह वासुदेव के साथ किया। विवाह के बाद जब कंस स्वयं देवकी को ससुराल छोड़ने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि हे कंस, जिस बहन को तू ससुराल पहुंचाने जा रहा है, उसी के आठवें पुत्र के हाथों तेरा वध होगा। यह सुनते ही कंस ने देवकी और वासुदेव को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया और उनके सातों पुत्रों की हत्या कर दी।
आगे बताया कि कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, बुधवार की मध्यरात्रि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया। भगवान के जन्म लेते ही चमत्कार हुआ। जेल के पहरेदार गहरी नींद में सो गए, कारागार के द्वार अपने आप खुल गए और वासुदेव-देवकी के हाथों की हथकड़ियां और पैरों की बेड़ियां खुल गईं।
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वासुदेव जी नवजात शिशु को सूप में रखकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचे और नंद बाबा के घर बालक को यशोदा की नवजात कन्या से बदलकर वापस कारागार लौट आए। मथुरा पहुंचते ही पहरेदार जाग गए और इसकी सूचना कंस को दी। कंस ने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, लेकिन वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में प्रकट हुई और आकाशवाणी की कि तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है। आयोजकों ने बताया कि कथा प्रतिदिन सायं निर्धारित समय पर आयोजित की जा रही है।
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कथावाचक ने बताया कि मथुरा के अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह वासुदेव के साथ किया। विवाह के बाद जब कंस स्वयं देवकी को ससुराल छोड़ने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि हे कंस, जिस बहन को तू ससुराल पहुंचाने जा रहा है, उसी के आठवें पुत्र के हाथों तेरा वध होगा। यह सुनते ही कंस ने देवकी और वासुदेव को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया और उनके सातों पुत्रों की हत्या कर दी।
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आगे बताया कि कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, बुधवार की मध्यरात्रि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया। भगवान के जन्म लेते ही चमत्कार हुआ। जेल के पहरेदार गहरी नींद में सो गए, कारागार के द्वार अपने आप खुल गए और वासुदेव-देवकी के हाथों की हथकड़ियां और पैरों की बेड़ियां खुल गईं।
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वासुदेव जी नवजात शिशु को सूप में रखकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचे और नंद बाबा के घर बालक को यशोदा की नवजात कन्या से बदलकर वापस कारागार लौट आए। मथुरा पहुंचते ही पहरेदार जाग गए और इसकी सूचना कंस को दी। कंस ने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, लेकिन वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में प्रकट हुई और आकाशवाणी की कि तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है। आयोजकों ने बताया कि कथा प्रतिदिन सायं निर्धारित समय पर आयोजित की जा रही है।