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Siddharthnagar News: छह घंटे में बुकिंग से लूट तक की स्क्रिप्ट... बिहार में दिया वारदात को अंजाम
Fri, 27 Feb 2026 03:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 27 Feb 2026 03:01 AM IST
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शास्त्रीनगर निवासी युवक की बुकिंग के बहाने हायर की गाड़ी, नशीला पदार्थ पिलाकर बिहार में तय ठिकाने पर लूटपाट
सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन से बुकिंग के बहाने के लिए गए लुटेरे, जान बची तो बयां की कहानी
सिद्धार्थनगर। बुकिंग के लिए सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन से बिहार लेकर जाकर गाड़ी और रुपये और मोबाइल लूट की घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि सोची-समझी स्क्रिप्ट के आधार पर वारदात को अंजाम दिया गया है। अपराध का तरीका बता रहा है कि कोई नया गैंग सक्रिय है जो लोगों को फंसाकर अपने ठिकाने पर लेकर जाकर नशीली दवा देकर लूट की वारदात को अंजाम देकर निकल जाता है।
पीड़ित नागेंद्र से हुई बातचीत में यह तथ्य सामने आए हैं। खास बात यह है कि बुकिंग से लेकर लूट की घटना छह घंटे में हुई। इसमें भी शिकार खुद शिकारियों के पास चलकर पहुंचा और सबकुछ लुटा बैठा। रेलवे स्टेशन के पास से हुई बुकिंग और फिर बिहार के गोपालगंज में हुई इस वारदात ने सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा कर दिए हैं। क्योंकि, स्टेशन से यात्री बुकिंग करके चलते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा भी बड़ा मसला है। पुलिस ने नशीली दवा देकर हुई इस लूट कांड में केस दर्ज करके मामले की छानबीन में जुटी है।
नगर के शास्त्रीनगर मोहल्ला निवासी नागेंद्र गुप्ता चार पहिया वाहन को बुकिंग में चलाते हैं। 22 फरवरी की शाम रेलवे स्टेशन पर ई-रिक्शा से सवारी लेकर ढोने वाले परिचित ने कॉल का बिहार के लिए बुकिंग पर जाने की बात की। पीड़ित नागेंद्र गुप्ता के मुताबिक कांफ्रेंस कॉल के जरिये बुकिंग करने वाले से उसने बात कराई। इसके बाद वह बताए हुए स्थान पर पहुंच गया। शाम के तकरीबन 5:30 बजे उसे कॉल पर बात करने वाले से मुलाकात हुई और बिहार के गोपालगंज से संबंधित व्यक्ति की पत्नी को लेकर आने की बात हुई। 10 हजार रुपये आने- जाने की डिमांड की, लेकिन बात 8700 रुपये पर तय हो गई। दो लोगों के साथ वह गाड़ी से लेकर बिहार के लिए निकल पड़ा। यहां उसका पेट्रोल पंप पर 2700 रुपये का तेल भरवाया। उसके बाद गोरखपुर जनपद के मानीराम में तीनों ने कोल्डड्रिंक पी, फिर यहां से निकले कुस्मही जंगल में किसी होटल में खाना गए और फिर वहां से बिहार के गोपालगंज के थावें रोडवेज स्टेशन पर पहुंचे।
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यहां बुकिंग करने वाला व्यक्ति फ्रेश होकर आने की बात कहकर गया और कुछ देर बाद लौटा तो उन्होंने बोला कि चलो देर हो जाएगी। इसके बाद मंदिर के पास ही फिर उसने ठंडा लिया और सभी ने गलास में पिया। चलने की बात के बीच चक्कर जैसा महसूस होने लगा और वह लोग गाड़ी का चाबी छीनने लगे। इसके बाद हाथा-पाई की और धक्का देकर निकल गए। 23 फरवरी को पूरा दिन बीत गया और 24 की सुबह में जब होश आया तो मंदिर पास की टंकी पर एक व्यक्ति से रुपये मांगे तो उसने कहा कि जो खाना हो हम खिला देंगे। इसके बाद विश्वास हुआ तो भाई के नंबर लेकर कॉल की। परिवार को जानकारी हुई तो वहां पुलिस के साथ पहुंचे और हमें लेकर उसी रात में घर पहुंचे हैं।
पीड़ित की बात पर गौर करें तो यह सुनियोजित लूट की वारदात हुई है और लुटेरों का उद्देश्य था कि उनकी टारगेट पर कोई भी हो। रेलवे स्टेशन से हुई एक प्रकार अपहरण जैसी घटना ने सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि, पुलिस ने अज्ञात की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज करके मामले की जांच शुरु कर दी है।
इस संबंध में एसओ सदर मिथिलेश कुमार राय ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस कई बिंदुओं पर काम कर रही है। जल्द ही मामले का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
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कैमरे को ट्रेस कर रही पुलिस
बताया जा रहा है कि मामले का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने पीड़ित से मिली जानकारी और घटनाक्रम के अनुसार क्राइम सीन पर रिसर्च करने में लगी हुई है। सूत्रों की मानें तो पुलिस लोकल में जांच करने के साथ ही जिस नंबर से आरोपियों ने बात की थी, उसके जरिये भी पुलिस कड़ी को कड़ी से जाेड़ने में लगी है। इससे पता चल सके आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन है, अगर इसमें से पुलिस के हाथ कोई लगा तो उनके जरिये गैंग तक पहुंच सके और मामले का पर्दाफाश कर सके। बताया जा रहा है कि पुलिस के निशाने पर कुछ संदिग्ध हैं, जिन्हें जल्द ही दबोच भी सकती है।
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बातचीत से बिहार की भाषा
पीड़ित से हुई बातचीत के मुताबिक भाषा पूरी तरह बिहार के लोगों जैसा था। इनका कद-काठी सामान्य है। दोनों में एक ठीक-ठाक पढ़ा लिखा लग रहा था और दिल्ली में पढ़ाई करने के बारे में बता रहा था। उसकी उम्र लगभग 20 साल के आसपास होगी, जिस हिसाब से वह दाेनों बात कर रहे थे, उनके झांसे में कोई भी आ सकता है। पीड़ित ने उनको कभी पहले नहीं देखा था।
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सुरक्षित रेलवे स्टेशन बाहरी से हो जाए सतर्क
सिद्धार्थनगर। रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए जीआरपी की चौकी स्थापित है। इनका कार्य क्षेत्र फरेंदा और बढ़नी तक है, जहां तक भ्रमण करके चेकिंग करते रहे हैं। वहीं, रेलवे स्टेशन पर अन्य सुरक्षा की बात करें तो मुख्य तरफ दो गेट बने हुए हैं जबकि, दूसरे नंबर प्लेटफाॅर्म पर पूरी तरह से खुला हुआ और आबादी शुरू हो जाती है। वहीं, यात्रियों की बात करें तो प्रतिदिन दिल्ली, मुंबई, लखनऊ सहित अन्य रूट की एक दर्जन से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। एक अनुमानित 10 हजार से अधिक यात्री प्रतिदिन इसी स्टेशन से यात्रा करते हैं। ट्रेन से उतरने के बाद उन्हें अपने घर तक जाने के लिए रेलवे स्टेशन पर ई-रिक्शा और टेंपो मिलता है जो लोकल रूट नेपाल बाॅर्डर और बांसी तक चलते हैं। इसके अलावा निजी चार पहिया वाहन वाले हैं जो पंजीकृत तो नहीं हैं, लेकिन इधर-उधर खड़े रहते हैं अगर कोई बुकिंग मिल गई तो लेकर जाते हैं। यह तो पूरा रात्रि की व्यवस्था है। अब इसमें टेंपो में कौन है, क्या है, कहां का है, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। ऐसे में यात्री के साथ तो घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। हालांकि अभी तक जनपद में इसी प्रकार की घटना सामने नहीं है। लेकिन, बुकिंग के नाम पर चार पहिया वाहन स्वामी से हुई लूट के बाद कुछ कहा नहीं जा सकता है कि यात्री वाहन वाले को लूट ले या वाहन वाला यात्री को क्योंकि, रेलवे स्टेशन से सवारी उठाने वालों को कोई प्रमाण नहीं है।
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सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन से बुकिंग के बहाने के लिए गए लुटेरे, जान बची तो बयां की कहानी
सिद्धार्थनगर। बुकिंग के लिए सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन से बिहार लेकर जाकर गाड़ी और रुपये और मोबाइल लूट की घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि सोची-समझी स्क्रिप्ट के आधार पर वारदात को अंजाम दिया गया है। अपराध का तरीका बता रहा है कि कोई नया गैंग सक्रिय है जो लोगों को फंसाकर अपने ठिकाने पर लेकर जाकर नशीली दवा देकर लूट की वारदात को अंजाम देकर निकल जाता है।
पीड़ित नागेंद्र से हुई बातचीत में यह तथ्य सामने आए हैं। खास बात यह है कि बुकिंग से लेकर लूट की घटना छह घंटे में हुई। इसमें भी शिकार खुद शिकारियों के पास चलकर पहुंचा और सबकुछ लुटा बैठा। रेलवे स्टेशन के पास से हुई बुकिंग और फिर बिहार के गोपालगंज में हुई इस वारदात ने सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा कर दिए हैं। क्योंकि, स्टेशन से यात्री बुकिंग करके चलते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा भी बड़ा मसला है। पुलिस ने नशीली दवा देकर हुई इस लूट कांड में केस दर्ज करके मामले की छानबीन में जुटी है।
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नगर के शास्त्रीनगर मोहल्ला निवासी नागेंद्र गुप्ता चार पहिया वाहन को बुकिंग में चलाते हैं। 22 फरवरी की शाम रेलवे स्टेशन पर ई-रिक्शा से सवारी लेकर ढोने वाले परिचित ने कॉल का बिहार के लिए बुकिंग पर जाने की बात की। पीड़ित नागेंद्र गुप्ता के मुताबिक कांफ्रेंस कॉल के जरिये बुकिंग करने वाले से उसने बात कराई। इसके बाद वह बताए हुए स्थान पर पहुंच गया। शाम के तकरीबन 5:30 बजे उसे कॉल पर बात करने वाले से मुलाकात हुई और बिहार के गोपालगंज से संबंधित व्यक्ति की पत्नी को लेकर आने की बात हुई। 10 हजार रुपये आने- जाने की डिमांड की, लेकिन बात 8700 रुपये पर तय हो गई। दो लोगों के साथ वह गाड़ी से लेकर बिहार के लिए निकल पड़ा। यहां उसका पेट्रोल पंप पर 2700 रुपये का तेल भरवाया। उसके बाद गोरखपुर जनपद के मानीराम में तीनों ने कोल्डड्रिंक पी, फिर यहां से निकले कुस्मही जंगल में किसी होटल में खाना गए और फिर वहां से बिहार के गोपालगंज के थावें रोडवेज स्टेशन पर पहुंचे।
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यहां बुकिंग करने वाला व्यक्ति फ्रेश होकर आने की बात कहकर गया और कुछ देर बाद लौटा तो उन्होंने बोला कि चलो देर हो जाएगी। इसके बाद मंदिर के पास ही फिर उसने ठंडा लिया और सभी ने गलास में पिया। चलने की बात के बीच चक्कर जैसा महसूस होने लगा और वह लोग गाड़ी का चाबी छीनने लगे। इसके बाद हाथा-पाई की और धक्का देकर निकल गए। 23 फरवरी को पूरा दिन बीत गया और 24 की सुबह में जब होश आया तो मंदिर पास की टंकी पर एक व्यक्ति से रुपये मांगे तो उसने कहा कि जो खाना हो हम खिला देंगे। इसके बाद विश्वास हुआ तो भाई के नंबर लेकर कॉल की। परिवार को जानकारी हुई तो वहां पुलिस के साथ पहुंचे और हमें लेकर उसी रात में घर पहुंचे हैं।
पीड़ित की बात पर गौर करें तो यह सुनियोजित लूट की वारदात हुई है और लुटेरों का उद्देश्य था कि उनकी टारगेट पर कोई भी हो। रेलवे स्टेशन से हुई एक प्रकार अपहरण जैसी घटना ने सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि, पुलिस ने अज्ञात की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज करके मामले की जांच शुरु कर दी है।
इस संबंध में एसओ सदर मिथिलेश कुमार राय ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस कई बिंदुओं पर काम कर रही है। जल्द ही मामले का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
कैमरे को ट्रेस कर रही पुलिस
बताया जा रहा है कि मामले का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने पीड़ित से मिली जानकारी और घटनाक्रम के अनुसार क्राइम सीन पर रिसर्च करने में लगी हुई है। सूत्रों की मानें तो पुलिस लोकल में जांच करने के साथ ही जिस नंबर से आरोपियों ने बात की थी, उसके जरिये भी पुलिस कड़ी को कड़ी से जाेड़ने में लगी है। इससे पता चल सके आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन है, अगर इसमें से पुलिस के हाथ कोई लगा तो उनके जरिये गैंग तक पहुंच सके और मामले का पर्दाफाश कर सके। बताया जा रहा है कि पुलिस के निशाने पर कुछ संदिग्ध हैं, जिन्हें जल्द ही दबोच भी सकती है।
बातचीत से बिहार की भाषा
पीड़ित से हुई बातचीत के मुताबिक भाषा पूरी तरह बिहार के लोगों जैसा था। इनका कद-काठी सामान्य है। दोनों में एक ठीक-ठाक पढ़ा लिखा लग रहा था और दिल्ली में पढ़ाई करने के बारे में बता रहा था। उसकी उम्र लगभग 20 साल के आसपास होगी, जिस हिसाब से वह दाेनों बात कर रहे थे, उनके झांसे में कोई भी आ सकता है। पीड़ित ने उनको कभी पहले नहीं देखा था।
सुरक्षित रेलवे स्टेशन बाहरी से हो जाए सतर्क
सिद्धार्थनगर। रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए जीआरपी की चौकी स्थापित है। इनका कार्य क्षेत्र फरेंदा और बढ़नी तक है, जहां तक भ्रमण करके चेकिंग करते रहे हैं। वहीं, रेलवे स्टेशन पर अन्य सुरक्षा की बात करें तो मुख्य तरफ दो गेट बने हुए हैं जबकि, दूसरे नंबर प्लेटफाॅर्म पर पूरी तरह से खुला हुआ और आबादी शुरू हो जाती है। वहीं, यात्रियों की बात करें तो प्रतिदिन दिल्ली, मुंबई, लखनऊ सहित अन्य रूट की एक दर्जन से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। एक अनुमानित 10 हजार से अधिक यात्री प्रतिदिन इसी स्टेशन से यात्रा करते हैं। ट्रेन से उतरने के बाद उन्हें अपने घर तक जाने के लिए रेलवे स्टेशन पर ई-रिक्शा और टेंपो मिलता है जो लोकल रूट नेपाल बाॅर्डर और बांसी तक चलते हैं। इसके अलावा निजी चार पहिया वाहन वाले हैं जो पंजीकृत तो नहीं हैं, लेकिन इधर-उधर खड़े रहते हैं अगर कोई बुकिंग मिल गई तो लेकर जाते हैं। यह तो पूरा रात्रि की व्यवस्था है। अब इसमें टेंपो में कौन है, क्या है, कहां का है, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है। ऐसे में यात्री के साथ तो घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। हालांकि अभी तक जनपद में इसी प्रकार की घटना सामने नहीं है। लेकिन, बुकिंग के नाम पर चार पहिया वाहन स्वामी से हुई लूट के बाद कुछ कहा नहीं जा सकता है कि यात्री वाहन वाले को लूट ले या वाहन वाला यात्री को क्योंकि, रेलवे स्टेशन से सवारी उठाने वालों को कोई प्रमाण नहीं है।