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Siddharthnagar News: बदल सकता है पूर्वांचल का सियासी नक्शा... बस्ती मंडल में नौ सीटें बढ़ने के आसार
Sat, 18 Apr 2026 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 18 Apr 2026 01:01 AM IST
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सिद्धार्थनगर। 2026 के बाद प्रस्तावित परिसीमन की आहट अब पूर्वांचल तक साफ सुनाई देने लगी है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों के 80 से बढ़कर करीब 120 से 128 और विधानसभा सीटों के 403 से बढ़कर लगभग 605 होने के अनुमान के बीच बस्ती मंडल में भी नौ सीटों के बढ़ने की संभावना बन रही है।
मौजूदा ढांचे को देखें तो मंडल में जहां अभी तीन लोकसभा सीटें हैं, वहीं विधानसभा की कुल 13 सीटें हैं। नए परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 4 से 5 लोकसभा और 18 से 20 विधानसभा सीटों तक पहुंच सकती है। जानकार बताते हैं कि अभी सिर्फ लोकसभा सीटों को लेकर चर्चा है, लेकिन विधानसभा की सीटों का भी फार्मूला इसमें शामिल है।
55 वर्ष पहले 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण हुआ था। 2011 की जनगणना के हिसाब से बस्ती मंडल की जनसंख्या 67,38,926 (लगभग 67.39 लाख) थी। 2001-2011 के दौरान बस्ती जिले की जनसंख्या वृद्धि दर 18.21 प्रतिशत थी। इस हिसाब से वर्तमान में जनसंख्या 86 से 87 लाख के बीच हो गई है। अब जनगणना के बाद इस हिसाब से सीटों की संख्या तय होगी और उसी के अनुसार आरक्षण का खाका तैयार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी केवल संख्या का खेल नहीं होगी, बल्कि इससे प्रतिनिधित्व का स्वरूप और राजनीतिक संतुलन भी बदलेगा। तेजी से बढ़ती आबादी और क्षेत्रीय असंतुलन को देखते हुए सीटों का पुनर्गठन लगभग तय माना जा रहा है।
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शिक्षाविद् डाॅ. नरसिंह त्रिपाठी कहते हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह जनगणना के आंकड़ों और निर्वाचन आयोग की सिफारिशों पर आधारित होगी। अंतिम स्वरूप आने में समय लगेगा, लेकिन संकेत साफ हैं कि बस्ती मंडल का राजनीतिक नक्शा बदलने वाला है।
राजनैतिक मामलों के जानकार डॉ. राजेश पांडेय के अनुसार मौजूदा समय में बस्ती मंडल की तीन प्रमुख लोकसभा सीटें बस्ती, डुमरियागंज और संतकबीरनगर विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र को कवर करती हैं। कई विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां एक सांसद का प्रभाव क्षेत्र बहुत बड़ा होने से स्थानीय मुद्दे अपेक्षित प्राथमिकता नहीं पा पाते। परिसीमन के बाद नए क्षेत्रों के निर्माण या सीमाओं के पुनर्निर्धारण से यह दायरा छोटा हो सकता है, जिससे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ेगी।
विधानसभा स्तर पर भी तस्वीर बदलने की संभावना है। अभी बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर को मिलाकर कुल 13 सीटें हैं। यदि प्रदेश में कुल सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है, तो मंडल में 5 से 7 नई सीटें जुड़ सकती हैं। इससे न सिर्फ जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय मुद्दों को विधानमंडल में अधिक जगह मिलने की उम्मीद भी बनेगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, परिसीमन के बाद जातीय और सामाजिक समीकरणों में भी बदलाव आ सकता है। जिन क्षेत्रों में अब तक प्रतिनिधित्व सीमित रहा है, वहां नए राजनीतिक नेतृत्व के उभरने की संभावना बनेगी। इससे पारंपरिक राजनीतिक गढ़ों को चुनौती मिल सकती है और चुनावी मुकाबले अधिक रोचक हो सकते हैं।
समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय कहते हैं कि आम जनता के नजरिये से देखें तो यह बदलाव उम्मीद और चुनौती दोनों लेकर आएगा। जहां एक ओर प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय समस्याओं के समाधान में तेजी आने की संभावना है, वहीं नए क्षेत्रों के निर्धारण से प्रशासनिक समन्वय की नई जरूरतें भी सामने आएंगी।
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मौजूदा ढांचे को देखें तो मंडल में जहां अभी तीन लोकसभा सीटें हैं, वहीं विधानसभा की कुल 13 सीटें हैं। नए परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 4 से 5 लोकसभा और 18 से 20 विधानसभा सीटों तक पहुंच सकती है। जानकार बताते हैं कि अभी सिर्फ लोकसभा सीटों को लेकर चर्चा है, लेकिन विधानसभा की सीटों का भी फार्मूला इसमें शामिल है।
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55 वर्ष पहले 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण हुआ था। 2011 की जनगणना के हिसाब से बस्ती मंडल की जनसंख्या 67,38,926 (लगभग 67.39 लाख) थी। 2001-2011 के दौरान बस्ती जिले की जनसंख्या वृद्धि दर 18.21 प्रतिशत थी। इस हिसाब से वर्तमान में जनसंख्या 86 से 87 लाख के बीच हो गई है। अब जनगणना के बाद इस हिसाब से सीटों की संख्या तय होगी और उसी के अनुसार आरक्षण का खाका तैयार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी केवल संख्या का खेल नहीं होगी, बल्कि इससे प्रतिनिधित्व का स्वरूप और राजनीतिक संतुलन भी बदलेगा। तेजी से बढ़ती आबादी और क्षेत्रीय असंतुलन को देखते हुए सीटों का पुनर्गठन लगभग तय माना जा रहा है।
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शिक्षाविद् डाॅ. नरसिंह त्रिपाठी कहते हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह जनगणना के आंकड़ों और निर्वाचन आयोग की सिफारिशों पर आधारित होगी। अंतिम स्वरूप आने में समय लगेगा, लेकिन संकेत साफ हैं कि बस्ती मंडल का राजनीतिक नक्शा बदलने वाला है।
राजनैतिक मामलों के जानकार डॉ. राजेश पांडेय के अनुसार मौजूदा समय में बस्ती मंडल की तीन प्रमुख लोकसभा सीटें बस्ती, डुमरियागंज और संतकबीरनगर विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र को कवर करती हैं। कई विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां एक सांसद का प्रभाव क्षेत्र बहुत बड़ा होने से स्थानीय मुद्दे अपेक्षित प्राथमिकता नहीं पा पाते। परिसीमन के बाद नए क्षेत्रों के निर्माण या सीमाओं के पुनर्निर्धारण से यह दायरा छोटा हो सकता है, जिससे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ेगी।
विधानसभा स्तर पर भी तस्वीर बदलने की संभावना है। अभी बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर को मिलाकर कुल 13 सीटें हैं। यदि प्रदेश में कुल सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है, तो मंडल में 5 से 7 नई सीटें जुड़ सकती हैं। इससे न सिर्फ जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय मुद्दों को विधानमंडल में अधिक जगह मिलने की उम्मीद भी बनेगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, परिसीमन के बाद जातीय और सामाजिक समीकरणों में भी बदलाव आ सकता है। जिन क्षेत्रों में अब तक प्रतिनिधित्व सीमित रहा है, वहां नए राजनीतिक नेतृत्व के उभरने की संभावना बनेगी। इससे पारंपरिक राजनीतिक गढ़ों को चुनौती मिल सकती है और चुनावी मुकाबले अधिक रोचक हो सकते हैं।
समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय कहते हैं कि आम जनता के नजरिये से देखें तो यह बदलाव उम्मीद और चुनौती दोनों लेकर आएगा। जहां एक ओर प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय समस्याओं के समाधान में तेजी आने की संभावना है, वहीं नए क्षेत्रों के निर्धारण से प्रशासनिक समन्वय की नई जरूरतें भी सामने आएंगी।