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Siddharthnagar News: किले से बाहर भी कपिलवस्तु के इतिहासिक अवशेष, खंगाला जाएगा इतिहास
Thu, 10 Sep 2026 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:23 PM IST
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नेपाल के कपिलवस्तु की राजधानी तिलौराकोट। स्रोत सोशल मीडिया
कपिलवस्तु। प्राचीन कपिलवस्तु की राजधानी तिलौराकोट का इतिहास अब किले की मौजूदा सीमा से बाहर भी तलाशा जा रहा है। किले के बाहर खोदाई और जियोफिजिकल सर्वे में पुरानी इमारतों के खंडहर समेत अन्य पुरातात्विक अवशेष मिले हैं। अब वहां भी इतिहास खंगाला जाएगा।
इसके लिए नेपाल के पुरातत्व विभाग ने आसपास के क्षेत्र को भी संरक्षण के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित जमीन लेने की कार्रवाई शुरू की गई है। इससे प्राचीन कपिलवस्तु के वास्तविक विस्तार को लेकर शोध की नई संभावनाएं बनी हैं।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक पुरातत्व विभाग के मुताबिक किले के बाहर सर्वे और खोदाई के दौरान ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनसे क्षेत्र में प्राचीन संरचनाओं की मौजूदगी का पता चलता है। इनकी विस्तृत जांच और अध्ययन के लिए संबंधित जमीन को सुरक्षित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से मालपारा-1(बी) और मालपारा-4(ए) के तहत अलग-अलग पार्सल नंबरों की जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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मुख्य पुरातत्व अधिकारी संदीप खनाल के अनुसार, जिन स्थानों पर पुरातात्विक महत्व की इमारतें और वस्तुएं मिली हैं, उन्हें सुरक्षा के दायरे में लाया जा रहा है। जमीन मिलने के बाद इन स्थानों पर विस्तृत अध्ययन, शोध और संरक्षण का काम किया जाएगा। साथ ही पूरे क्षेत्र का व्यवस्थित प्रबंधन भी संभव होगा।
अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत पुरातत्व विभाग ने संबंधित जमीन मालिकों और अन्य स्टेक होल्डर्स को नोटिस जारी किए हैं। उनसे प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की गई है। विभाग यह कार्रवाई लैंड एक्विजिशन एक्ट, 2034 के तहत कर रहा है।
29 साल की जिंदगी से जुड़ा है तिलौराकोट : तिलौराकोट को प्राचीन कपिलवस्तु की राजधानी माना जाता है। बौद्ध परंपरा के अनुसार भगवान गौतम बुद्ध ने राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में अपने जीवन के 29 वर्ष इसी क्षेत्र में बिताए थे। इसी कारण तिलौराकोट बौद्ध धर्मावलंबियों और दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण स्थल है।
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इसके लिए नेपाल के पुरातत्व विभाग ने आसपास के क्षेत्र को भी संरक्षण के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित जमीन लेने की कार्रवाई शुरू की गई है। इससे प्राचीन कपिलवस्तु के वास्तविक विस्तार को लेकर शोध की नई संभावनाएं बनी हैं।
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आधिकारिक जानकारी के मुताबिक पुरातत्व विभाग के मुताबिक किले के बाहर सर्वे और खोदाई के दौरान ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनसे क्षेत्र में प्राचीन संरचनाओं की मौजूदगी का पता चलता है। इनकी विस्तृत जांच और अध्ययन के लिए संबंधित जमीन को सुरक्षित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से मालपारा-1(बी) और मालपारा-4(ए) के तहत अलग-अलग पार्सल नंबरों की जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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मुख्य पुरातत्व अधिकारी संदीप खनाल के अनुसार, जिन स्थानों पर पुरातात्विक महत्व की इमारतें और वस्तुएं मिली हैं, उन्हें सुरक्षा के दायरे में लाया जा रहा है। जमीन मिलने के बाद इन स्थानों पर विस्तृत अध्ययन, शोध और संरक्षण का काम किया जाएगा। साथ ही पूरे क्षेत्र का व्यवस्थित प्रबंधन भी संभव होगा।
अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत पुरातत्व विभाग ने संबंधित जमीन मालिकों और अन्य स्टेक होल्डर्स को नोटिस जारी किए हैं। उनसे प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की गई है। विभाग यह कार्रवाई लैंड एक्विजिशन एक्ट, 2034 के तहत कर रहा है।
29 साल की जिंदगी से जुड़ा है तिलौराकोट : तिलौराकोट को प्राचीन कपिलवस्तु की राजधानी माना जाता है। बौद्ध परंपरा के अनुसार भगवान गौतम बुद्ध ने राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में अपने जीवन के 29 वर्ष इसी क्षेत्र में बिताए थे। इसी कारण तिलौराकोट बौद्ध धर्मावलंबियों और दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण स्थल है।