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ऊपर बिजली का तार, नीचे पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:30 PM IST
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नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं दिख रहे हैं। जिले के कई स्कूल इसका उदाहरण हैं। जिस स्थान पर बच्चों की कक्षाएं लगती हैं, उसी के ठीक ऊपर से बिजली के तार गुजर रहे हैं।
एक सप्ताह पहले ही एक स्कूल में बिजली तार टूट कर गिर गया था। संयोग था कि घटना छुट्टी के समय हुई। हाल ही में देवरिया जिले में भी एक स्कूल पर हाईटेंशन तार टूट कर गिरने से बड़ा हादसा हो चुका है। लगातार ऐसी घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार मौन हैं।
बर्डपुर क्षेत्र के कई स्कूलों में ऐसी स्थिति देखी जा सकती है, जहां नीचे स्कूल और ठीक ऊपर बिजली के हाईटेंशन तार हैं। अव्वल तो बिजली के तार के नीचे निर्माण होना ही नहीं चाहिए और अगर विशेष परिस्थितियों में जरूरत पड़े भी तो सुरक्षा के प्रबंध भी जरूरी हैं।
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जिले के हालात बिलकुल इतर हैं। न तो भवन बनवाने वालों ने गौर किया और न ही बिजली के तार खींचने वालों ने कोई दिलचस्पी दिखाई। अलबत्ता दोष एक-दूसरे को दिया जा रहा है। सवाल है कि अगर बिल्डिंग पहले बना तो फिर उसके ऊपर से तार गुजारने की अनुमति कैसे दी गई और अगर तार पहले खींचे गए तो उसके नीचे भवन बनाने पर किसी ने आपत्ति क्यों नहीं लगाई।
जवाब दोनों विभागों के पास नहीं है। मगर दांव पर नौनिहालों की जिंदगी है। खुदा न खास्ते यहां कोई हादसा हुआ तो कौन, कैसे और किसकी जिम्मेदारी मानी जाएगी।यह तस्वीर है बर्डपुर ब्लाक के काशीपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय की। एक सप्ताह पहले ही यहां विद्यालय के ऊपर से गुजरता हाईटेंशन तार टूट गया था।
संयोग ही था कि यह घटना तब हुई, जब स्कूल की छुट्टी थी। अगर स्कूल समय में तार टूटता तो देवरिया जैसी घटना की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता था। प्रधानाचार्य अब्दुल अजीज के मुताबिक इस बारे में उच्चाधिकारियों को बताया गया है।
प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर में सौ से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। भवन के ठीक ऊपर से 11 हजार बोल्ट का हाईटेंशन तार गुजर रहा है। मध्यावकाश या छुट्टी होने पर बच्चे परिसर में ही खेलतेे हैं। ऐसे में यहां गुजरता तार हादसे का सबब बना हुआ है। गर्मियों में ढीले तार अक्सर हादसे का कारण बनते हैं।
प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय सूर्यकुड़िया के मध्य से हाईटेंशन तार गुजर रहा है। दशकों पहले खींचे गए यह तार ढीले और जर्जर हो चुके हैं। आए दिन जगह-जगह टूटते रहते हैं।
इससे शिक्षकों, अभिभावकों में भी भय बना हुआ है। प्रधानाचार्य बेचन प्रसाद ने बताया कि पास में लगे पोल से स्पर्श होने के कारण करीब छह माह पूर्व छात्र करंट की चपेट में आ गया था। काफी प्रयासों से उसे बचाया गया।
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एक सप्ताह पहले ही एक स्कूल में बिजली तार टूट कर गिर गया था। संयोग था कि घटना छुट्टी के समय हुई। हाल ही में देवरिया जिले में भी एक स्कूल पर हाईटेंशन तार टूट कर गिरने से बड़ा हादसा हो चुका है। लगातार ऐसी घटनाओं के बावजूद जिम्मेदार मौन हैं।
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बर्डपुर क्षेत्र के कई स्कूलों में ऐसी स्थिति देखी जा सकती है, जहां नीचे स्कूल और ठीक ऊपर बिजली के हाईटेंशन तार हैं। अव्वल तो बिजली के तार के नीचे निर्माण होना ही नहीं चाहिए और अगर विशेष परिस्थितियों में जरूरत पड़े भी तो सुरक्षा के प्रबंध भी जरूरी हैं।
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जिले के हालात बिलकुल इतर हैं। न तो भवन बनवाने वालों ने गौर किया और न ही बिजली के तार खींचने वालों ने कोई दिलचस्पी दिखाई। अलबत्ता दोष एक-दूसरे को दिया जा रहा है। सवाल है कि अगर बिल्डिंग पहले बना तो फिर उसके ऊपर से तार गुजारने की अनुमति कैसे दी गई और अगर तार पहले खींचे गए तो उसके नीचे भवन बनाने पर किसी ने आपत्ति क्यों नहीं लगाई।
जवाब दोनों विभागों के पास नहीं है। मगर दांव पर नौनिहालों की जिंदगी है। खुदा न खास्ते यहां कोई हादसा हुआ तो कौन, कैसे और किसकी जिम्मेदारी मानी जाएगी।यह तस्वीर है बर्डपुर ब्लाक के काशीपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय की। एक सप्ताह पहले ही यहां विद्यालय के ऊपर से गुजरता हाईटेंशन तार टूट गया था।
संयोग ही था कि यह घटना तब हुई, जब स्कूल की छुट्टी थी। अगर स्कूल समय में तार टूटता तो देवरिया जैसी घटना की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता था। प्रधानाचार्य अब्दुल अजीज के मुताबिक इस बारे में उच्चाधिकारियों को बताया गया है।
प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर में सौ से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। भवन के ठीक ऊपर से 11 हजार बोल्ट का हाईटेंशन तार गुजर रहा है। मध्यावकाश या छुट्टी होने पर बच्चे परिसर में ही खेलतेे हैं। ऐसे में यहां गुजरता तार हादसे का सबब बना हुआ है। गर्मियों में ढीले तार अक्सर हादसे का कारण बनते हैं।
प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय सूर्यकुड़िया के मध्य से हाईटेंशन तार गुजर रहा है। दशकों पहले खींचे गए यह तार ढीले और जर्जर हो चुके हैं। आए दिन जगह-जगह टूटते रहते हैं।
इससे शिक्षकों, अभिभावकों में भी भय बना हुआ है। प्रधानाचार्य बेचन प्रसाद ने बताया कि पास में लगे पोल से स्पर्श होने के कारण करीब छह माह पूर्व छात्र करंट की चपेट में आ गया था। काफी प्रयासों से उसे बचाया गया।