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Siddharthnagar News: तीन दिन बाद खुला बॉर्डर... बाजार में लौटी रौनक
Fri, 06 Mar 2026 11:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 06 Mar 2026 11:28 PM IST
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में चुनाव के चलते तीन दिन तक बंद रही भारत-नेपाल सीमा पर बृहस्पतिवार की देर रात से आवाजाही शुरू हो गई। शुक्रवार सुबह से ही बॉर्डर पर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही बढ़नी, खुनुवां, अलीगढ़वा और ककरहवा बॉर्डर पर लोगों और वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई।
इससे बाजार में भी चहल-पहल देखने को मिली। चुनाव की वजह से तीन दिन तक बंदी जैसे हालात थे। सीमा सील होने के कारण नेपाल आने-जाने वाले लोगों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आवाजाही पूरी तरह ठप थी, लेकिन सीमा खुलते ही लोग बड़ी संख्या में सीमा पार करने के लिए पहुंचने लगे।
सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ जांच-पड़ताल कर लोगों को सीमा पार जाने की अनुमति देती रहीं। सुरक्षा को देखते हुए डाग स्क्वाड की भी मदद ली जा रही थी। बॉर्डर खुलने का असर आसपास के बाजारों में भी साफ दिखा, जहां तीन दिन बाद फिर से रौनक लौट आई और दुकानों पर खरीदारी के लिए भीड़ देखने को मिली। यह हाल मुख्य बाॅर्डर के बाजारों में रहा।
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नेपाल में चुनाव को लेकर सुरक्षा कारणों से दो मार्च की रात से भारत-नेपाल सीमा को सील कर दिया गया था। इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया था। सीमा बंद होने से रोजाना नेपाल जाने वाले मजदूर, व्यापारी और रिश्तेदारी में आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कई लोग बॉर्डर तक पहुंचकर भी वापस लौटने को मजबूर हुए थे। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद देर बृहस्पतिवार देर रात तय समय सीमा को खोल दिया गया, लेकिन, शुक्रवार की सुबह से धीरे-धीरे दोनों देशों के बीच आवागमन सामान्य होने लगा।
जिले की 68 किलोमीटर नेपाल से लगी है सीमा : जिले की लगभग 68 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से लगती है और इस सीमा पर कई छोटे-बड़े बॉर्डर प्वाइंट हैं, जहां से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है। तीन दिन की बंदी के बाद जैसे ही सीमा खुली, सबसे ज्यादा भीड़ बढ़नी, खुनुवां, अलीगढ़वा और ककरहवा बॉर्डर पर देखने को मिली। सुबह से ही पैदल आने-जाने वाले लोगों के साथ साइकिल, बाइक और छोटे वाहनों की कतारें लग गईं। सुरक्षा बलों की ओर से प्रत्येक व्यक्ति की जांच और पहचान की पुष्टि के बाद ही सीमा पार करने दिया जा रहा था। इस दौरान एसएसबी और पुलिस के जवान लगातार निगरानी करते रहे ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके।
सीमा खुलने का सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती बाजारों में नजर आया। बढ़नी, खुनुवां, अलीगढ़वा और ककरहवा के बाजारों में सुबह से ही नेपाली नागरिकों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कपड़ा, किराना, रेडीमेड, फल-सब्जी और दैनिक उपयोग के सामान की दुकानों पर खरीदारी तेज हो गई। व्यापारियों का कहना है कि तीन दिनों तक बॉर्डर बंद रहने के कारण कारोबार पूरी तरह ठप हो गया था। कई दुकानदारों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन सीमा खुलने के बाद फिर से व्यापार में तेजी आने की उम्मीद जगी है।
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इससे बाजार में भी चहल-पहल देखने को मिली। चुनाव की वजह से तीन दिन तक बंदी जैसे हालात थे। सीमा सील होने के कारण नेपाल आने-जाने वाले लोगों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आवाजाही पूरी तरह ठप थी, लेकिन सीमा खुलते ही लोग बड़ी संख्या में सीमा पार करने के लिए पहुंचने लगे।
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सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ जांच-पड़ताल कर लोगों को सीमा पार जाने की अनुमति देती रहीं। सुरक्षा को देखते हुए डाग स्क्वाड की भी मदद ली जा रही थी। बॉर्डर खुलने का असर आसपास के बाजारों में भी साफ दिखा, जहां तीन दिन बाद फिर से रौनक लौट आई और दुकानों पर खरीदारी के लिए भीड़ देखने को मिली। यह हाल मुख्य बाॅर्डर के बाजारों में रहा।
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नेपाल में चुनाव को लेकर सुरक्षा कारणों से दो मार्च की रात से भारत-नेपाल सीमा को सील कर दिया गया था। इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया था। सीमा बंद होने से रोजाना नेपाल जाने वाले मजदूर, व्यापारी और रिश्तेदारी में आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कई लोग बॉर्डर तक पहुंचकर भी वापस लौटने को मजबूर हुए थे। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद देर बृहस्पतिवार देर रात तय समय सीमा को खोल दिया गया, लेकिन, शुक्रवार की सुबह से धीरे-धीरे दोनों देशों के बीच आवागमन सामान्य होने लगा।
जिले की 68 किलोमीटर नेपाल से लगी है सीमा : जिले की लगभग 68 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से लगती है और इस सीमा पर कई छोटे-बड़े बॉर्डर प्वाइंट हैं, जहां से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है। तीन दिन की बंदी के बाद जैसे ही सीमा खुली, सबसे ज्यादा भीड़ बढ़नी, खुनुवां, अलीगढ़वा और ककरहवा बॉर्डर पर देखने को मिली। सुबह से ही पैदल आने-जाने वाले लोगों के साथ साइकिल, बाइक और छोटे वाहनों की कतारें लग गईं। सुरक्षा बलों की ओर से प्रत्येक व्यक्ति की जांच और पहचान की पुष्टि के बाद ही सीमा पार करने दिया जा रहा था। इस दौरान एसएसबी और पुलिस के जवान लगातार निगरानी करते रहे ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके।
सीमा खुलने का सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती बाजारों में नजर आया। बढ़नी, खुनुवां, अलीगढ़वा और ककरहवा के बाजारों में सुबह से ही नेपाली नागरिकों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कपड़ा, किराना, रेडीमेड, फल-सब्जी और दैनिक उपयोग के सामान की दुकानों पर खरीदारी तेज हो गई। व्यापारियों का कहना है कि तीन दिनों तक बॉर्डर बंद रहने के कारण कारोबार पूरी तरह ठप हो गया था। कई दुकानदारों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन सीमा खुलने के बाद फिर से व्यापार में तेजी आने की उम्मीद जगी है।