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पूर्व पालिका अध्यक्ष समेत तीन पर मुकदमा

Mon, 24 Apr 2017 10:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Mon, 24 Apr 2017 10:49 PM IST
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Sue on three including former municipal president
मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों से मिलने पहुंचे लोग - फोटो : amar ujala
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका कार्यालय से वर्ष 2011-12 में हुए वाहन स्टैंडों की नीलामी संबंधी फाइल होने के मामले में भाजपा नेता की पत्नी व पूर्व पालिका अध्यक्ष समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। अधिशाषी अधिकारी राजीव रंजन की तहरीर पर सदर पुलिस ने पूर्व पालिका अध्यक्ष राधिका जायसवाल, पूर्व पटल लिपिक रामअवध व वर्तमान लिपिक संतोष श्रीवास्तव के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों में हेर-फेर का मामला पंजीकृत करते हुए छानबीन शुरू कर दी है। पूर्व अध्यक्ष ने इसे विरोधियों की साजिश करार दिया है।
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वर्ष 2011-12 में नगर पालिका सिद्धार्थनगर अंतर्गत चारों वाहन स्टैंडों की नीलामी हुई थी। तब नीलामी की बोली करीब 13.86 लाख रुपये थी। आरोप है कि साजिश के तहत नीलामी संबंधी फाइल गायब करा दी गई। नतीजा इसके बाद ठेका महज 3-4 लाख रुपये में ही आवंटित होने लगा। यह मामला तब प्रकाश में आया, जब पिछले दिनों आरटीआई के तहत सूचना मांगी गई। सूचना उपलब्ध कराने के लिए कर्मचारी रिकार्ड ढूंढने लगे तो फाइल ही गायब मिली। काफी खोजबीन के बाद भी कोई सुराग न मिलने पर सोमवार को अधिशाषी अधिकारी राजीव रंजन ने सदर थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया।
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ईओ के मुताबिक पुरानी फाइल गायब होने से पांच वर्षों में नगर पालिका को करीब 75 लाख रुपये की क्षति पहुंची है। सदर एसओ शिवाकांत मिश्र ने बताया कि तहरीर के आधार पर पूर्व पालिका अध्यक्ष राधिका जायसवाल, तत्कालीन पटल लिपिक रामअवध व मौजूदा लिपिक संतोष श्रीवास्तव के खिलाफ सरकारी रिकार्ड में हेर-फेर का मामला दर्ज कर लिया गया है। छानबीन की जा रही है। बता दें कि राधिका जायसवाल भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व चेयरमैन घनश्याम जायसवाल की पत्नी हैं। इस बाबत उनका कहना था कि नगर पालिका चुनाव की आहट के बाद विरोधियों ने साजिश के तहत केस दर्ज कराया है।
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बताया कि नवंबर 2011 में कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक नियुक्त हो चुके थे। ऐसे में कार्यालय की फाइल उनके जरिए गायब होने का सवाल ही नहीं है। जिम्मेदारी तत्कालीन प्रशासक और ईओ की होनी चाहिए। पांच सालों तक टेंडर के दौरान फाइल क्यों नहीं ढूंढी गई और अगर फाइल गायब थी तो सूचना मांगने वाले को रिकॉर्ड दिखाने के लिए कार्यालय में आमंत्रित क्यों किया गया था। सिर्फ छवि धूमिल करने के लिए साजिश रची गई है।
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