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Siddharthnagar News: कोई हालात से हारा तो किसी की हादसे ने छीनी जिंदगी
Sat, 07 Mar 2026 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 07 Mar 2026 12:07 AM IST
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सिद्धार्थनगर। पढ़ने में होनहार, काम में होशियार। कंधों पर परिवार का बोझ उठाए नौजवानों की मौत ने परिवारों को झकझोर कर रख दिया है। कोई जिंदगी से हारकर अपनी जान दे बैठा तो किसी की हादसे ने जान ले ली। चार दिन में छह युवकों की मौत ने उनके परिवारों को तोड़कर रख दिया है।
किसी के बेहतर भविष्य की उम्मीद थी तो कोई परिवार का एक मात्र सहारा था, जिसकी वजह बच्चों की पढ़ाई, मां -बाप की दवाएं और गृहस्थी की गाड़ी चल रही थी। कोई पढ़ने में होनहार था, जिससे परिवार को बेहतर कल की आस थी। जिनपर परिवार की जिम्मेदारी थी, वे उनका साथ छोड़कर चले गए, जिससे न सिर्फ उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है, बल्कि उनके अरमान भी बिखरकर टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं।
बीते चार दिन में एक झटके में छह परिवार के सपने-उम्मीदों को तहस-नहस कर दिया। इसमें पेज तीन ने खुद मौत चुनी और फंदे से लटक कर जान दे दी। वहीं दो पढ़ने वाले छात्र जो इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रहे थे, उनकी डूबने से मौत हो गई। समाजशास्त्री और मनोविज्ञानी आत्महत्या को आवसाद, बढ़ता हुआ मानसिक दबाव और किसी न किसी प्रकार से हाथ लगने वाली मायूसी को कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि हादसा तो आने वाली आफत है, लेकिन आत्महत्या के पीछे हर तरफ से मिली निराशा ही कारण है। शायद परिवार के लोग या करीबी इस बात को समझ नहीं सके।
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पत्नी से मामूली बात, मौत को चुना : लोटन कोतवाली क्षेत्र के पंचायत कौलपुर ग्रांट के टोला निबिहवा में मोहन राजभर (28) पुत्र विक्रम राजभर ने कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी। परिवार और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मृतक को नशे लत थी। इसे लेकर पति-पत्नी में आए दिन नोकझोंक होती रहती थी। इसे लेकर पत्नी पांच माह पहले नाराज होकर मायके में थी और ससुराल आने को तैयार नहीं थी।
होली पर जब मोहन ने दो फरवरी शाम को उसे फोन पर बात की तो उनके बीच फिर ऐसी कुछ बात हुई कि वह शराब के नशे में घर लौटा और कमरे की कुंडी में फंदे से लटक कर जान दे दी। परिवार के लोगों ने उसे दम तोड़ते हुए देखा। बताया जा रहा है कि मोहन स्वभाव से अच्छा था, परिवार को चलाने में सहयोग करता था। अब पत्नी, एक बच्चा और माता-पिता सबकी उम्मीदें टूट गईं हैं।
एक पल में साथ और सपने दोनों टूटे : मिश्रौलिया थाना क्षेत्र में दो मार्च की रात को रतनपुर गांव के पास से बहने वाली बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे लगे भिलौर के पेड़ से फंदे से लटक कर गांव निवासी अजीत ने जान दे दी। उसी दिन शाम को वह खाना खाने के बाद घूमने की बात कहकर निकला था। परिवार को यह उम्मीद नहीं थी कि बेटा ऐसा कदम उठाएगा।
पहले रात में घर नहीं पहुंचने पर परिवार का दिल बैठ सा गया। दूसरे दिन गांव के पास लाश मिली तो वह टूट गए। दो भाई और दो बहनों में अजीत दूसरे नंबर का था और घर का बड़ा बेटा था। पिता की उससे काफी उम्मीदें थीं। ऐसा कदम क्यों और किस परेशानी में उठाया, परिवार के लोग इससे अनजान हैं लेकिन, बेटे के जाने के साथ उनकी सपने और भविष्य की उम्मीदें दोनों खत्म हो गईं हैं।
मौत से परिवार और हर कोई हैरान : भवानीगंज थाना क्षेत्र के बढ़नी चाफा के बरघाट स्थिति कंपोजिट शराब की दुकान में मुनीम का काम करने वाले क्षेत्र के जुड़वनिया गांव निवासी मुनीराम की दुकान के अंदर सीलिंग फैन से फंदे के सहारे लटकी लाश मिली। मृतक बैठे हाल में बिस्तर पर थे, जिससे लोगों ने मौत का असामान्य बताया, लेकिन दुकान अंदर से बंद थी, ऐसे में आत्महत्या का अंदेशा जताया जा रहा है।
बाहर से दुकान का शटर तोड़ने के बाद लाश को निकालवाया। मृतक मुनीराम परिवार के मुखिया थे। उनके कमाई से ही घर गृहस्थी चलती थी। परिवार को उनसे उम्मीदें थी लेकिन, मौत ने परिवार को पूरी तरह से तोड़ दिया। अगर आत्महत्या की तो क्या मामला था और कहां से टीस थी, इससे परिवार और करीबी दोनों अनजान हैं।
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किसी के बेहतर भविष्य की उम्मीद थी तो कोई परिवार का एक मात्र सहारा था, जिसकी वजह बच्चों की पढ़ाई, मां -बाप की दवाएं और गृहस्थी की गाड़ी चल रही थी। कोई पढ़ने में होनहार था, जिससे परिवार को बेहतर कल की आस थी। जिनपर परिवार की जिम्मेदारी थी, वे उनका साथ छोड़कर चले गए, जिससे न सिर्फ उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है, बल्कि उनके अरमान भी बिखरकर टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं।
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बीते चार दिन में एक झटके में छह परिवार के सपने-उम्मीदों को तहस-नहस कर दिया। इसमें पेज तीन ने खुद मौत चुनी और फंदे से लटक कर जान दे दी। वहीं दो पढ़ने वाले छात्र जो इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रहे थे, उनकी डूबने से मौत हो गई। समाजशास्त्री और मनोविज्ञानी आत्महत्या को आवसाद, बढ़ता हुआ मानसिक दबाव और किसी न किसी प्रकार से हाथ लगने वाली मायूसी को कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि हादसा तो आने वाली आफत है, लेकिन आत्महत्या के पीछे हर तरफ से मिली निराशा ही कारण है। शायद परिवार के लोग या करीबी इस बात को समझ नहीं सके।
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पत्नी से मामूली बात, मौत को चुना : लोटन कोतवाली क्षेत्र के पंचायत कौलपुर ग्रांट के टोला निबिहवा में मोहन राजभर (28) पुत्र विक्रम राजभर ने कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी। परिवार और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मृतक को नशे लत थी। इसे लेकर पति-पत्नी में आए दिन नोकझोंक होती रहती थी। इसे लेकर पत्नी पांच माह पहले नाराज होकर मायके में थी और ससुराल आने को तैयार नहीं थी।
होली पर जब मोहन ने दो फरवरी शाम को उसे फोन पर बात की तो उनके बीच फिर ऐसी कुछ बात हुई कि वह शराब के नशे में घर लौटा और कमरे की कुंडी में फंदे से लटक कर जान दे दी। परिवार के लोगों ने उसे दम तोड़ते हुए देखा। बताया जा रहा है कि मोहन स्वभाव से अच्छा था, परिवार को चलाने में सहयोग करता था। अब पत्नी, एक बच्चा और माता-पिता सबकी उम्मीदें टूट गईं हैं।
एक पल में साथ और सपने दोनों टूटे : मिश्रौलिया थाना क्षेत्र में दो मार्च की रात को रतनपुर गांव के पास से बहने वाली बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे लगे भिलौर के पेड़ से फंदे से लटक कर गांव निवासी अजीत ने जान दे दी। उसी दिन शाम को वह खाना खाने के बाद घूमने की बात कहकर निकला था। परिवार को यह उम्मीद नहीं थी कि बेटा ऐसा कदम उठाएगा।
पहले रात में घर नहीं पहुंचने पर परिवार का दिल बैठ सा गया। दूसरे दिन गांव के पास लाश मिली तो वह टूट गए। दो भाई और दो बहनों में अजीत दूसरे नंबर का था और घर का बड़ा बेटा था। पिता की उससे काफी उम्मीदें थीं। ऐसा कदम क्यों और किस परेशानी में उठाया, परिवार के लोग इससे अनजान हैं लेकिन, बेटे के जाने के साथ उनकी सपने और भविष्य की उम्मीदें दोनों खत्म हो गईं हैं।
मौत से परिवार और हर कोई हैरान : भवानीगंज थाना क्षेत्र के बढ़नी चाफा के बरघाट स्थिति कंपोजिट शराब की दुकान में मुनीम का काम करने वाले क्षेत्र के जुड़वनिया गांव निवासी मुनीराम की दुकान के अंदर सीलिंग फैन से फंदे के सहारे लटकी लाश मिली। मृतक बैठे हाल में बिस्तर पर थे, जिससे लोगों ने मौत का असामान्य बताया, लेकिन दुकान अंदर से बंद थी, ऐसे में आत्महत्या का अंदेशा जताया जा रहा है।
बाहर से दुकान का शटर तोड़ने के बाद लाश को निकालवाया। मृतक मुनीराम परिवार के मुखिया थे। उनके कमाई से ही घर गृहस्थी चलती थी। परिवार को उनसे उम्मीदें थी लेकिन, मौत ने परिवार को पूरी तरह से तोड़ दिया। अगर आत्महत्या की तो क्या मामला था और कहां से टीस थी, इससे परिवार और करीबी दोनों अनजान हैं।