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सोशल मीडिया की खबरों पर प्रमाणिकता का संकट
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 29 Sep 2016 10:30 PM IST
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जिला पंचायत में गोष्ठी को संबोधित करते कुलपति डाॅ. रजनीकांत पांडेय।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ.रजनीकांत पांडेय ने सोशल मीडिया को बदलते समय की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि इस माध्यम ने लोगों को करीब ला दिया है, मगर इस पर समाचारों की अपेक्षा विचार की अधिकता है। इनकी खबरों में प्रमाणिकता का संकट है। उन्होंने सोशल मीडिया पर नियंत्रण के लिए जागरूकता लाने और शैक्षिक-मानसिक स्तर ऊंचा उठाने की जरूरत बताई है।
सिद्धार्थनगर प्रेस क्लब सिद्धार्थनगर के बैनर तले जिला पंचायत सभागार में आयोजित सोशल मीडिया के दौर में हिंदी समाचार पत्रों की भूमिका विषय पर संगोष्ठी में कुलपति ने हिंदी पत्रकारिता के अतीत और वर्तमान मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। राष्ट्रीय आंदोलन में हिंदी पत्रकारिता की महत्ता को स्वीकारा। कहा कि राष्ट्रीय नायकों ने समाज में चेतना लाने के लिए पत्रकारिता को ही आधार बनाया था। समय के साथ पत्रकारिता का मूल्य बदलता रहता है।
पत्रकारिता का उद्देश्य सामाजिककरण व संस्कृतिकरण को बढ़ावा देना है, जिसे हिंदी समाचार पत्रों ने बखूबी निभाया है। अखबारों में जगह की कमी के दौर में सोशल मीडिया नया विकल्प बना है, मगर अभी वह संक्रमण काल में है। इसमें कई कमियां है, जिसे दूर करने के लिए शैक्षिक व मानसिक स्तर बढ़ाना जरूरी है। वरिष्ठ अधिवक्ता रामशंकर उर्फ शेखर सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए आईटी एक्ट के बारे में बताया। कहा कि इसका दुरुपयोग करने वालों पर न्यूनतम पांच लाख रुपये का जुर्माना व तीन साल की कैद का प्रावधान है।
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एसओ सदर शिवाकांत मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया युवाओं को गर्त में धकेल रही है। ऐसे में प्रिंट मीडिया की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह सूर्य के समान है, इसका प्रकाश सदैव रहेगा। अधिवक्ता नजीर मलिक ने कहा कि सोशल मीडिया बेलगाम जरूर है, लेकिन इतनी ताकत नहीं कि प्रिंट मीडिया को पछाड़ सके। अखबार हमारी भूख हैं। पूर्व प्राचार्य बुद्ध विद्यापीठ प्रहलाद पांडेय ने कहा कि सोशल मीडिया युवाओं के लिए यह खबरों का खजाना है। मगर इस पर चलने वाली खबरों की सत्यता को कोई नहीं प्रमाणित करता है।
भ्रम फैलाने वाले समाचारों पर रोक लगाना होगा। अध्यक्ष सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर विचार रखे, लेकिन ध्यान रखे कि टिप्पणी अमर्यादित न हो। किसी भी भावना आहत न हो। संगोष्ठी में पूर्व प्रधानाचार्य द्धिजेंद्र नाथ त्रिपाठी, डॉ.विनयकांत मिश्रा, अधिवक्ता रमेश पांडेय, शशिकांत उपाध्याय, अध्यक्ष प्रेस क्लब परमात्मा शुक्ला, उपाध्यक्ष सुनील मिश्रा, वीपी त्रिपाठी, रत्नेश शुक्ला, यतींद्र मिश्रा, संतोष श्रीवास्तव, अरविंद झा, जितेंद्र पांडेय, अरुण त्रिपाठी, अमित सिंह, श्याम सुंदर, अभिषेक श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। संचालन नियाज कपिलवस्तुवी ने किया।
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सिद्धार्थनगर प्रेस क्लब सिद्धार्थनगर के बैनर तले जिला पंचायत सभागार में आयोजित सोशल मीडिया के दौर में हिंदी समाचार पत्रों की भूमिका विषय पर संगोष्ठी में कुलपति ने हिंदी पत्रकारिता के अतीत और वर्तमान मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। राष्ट्रीय आंदोलन में हिंदी पत्रकारिता की महत्ता को स्वीकारा। कहा कि राष्ट्रीय नायकों ने समाज में चेतना लाने के लिए पत्रकारिता को ही आधार बनाया था। समय के साथ पत्रकारिता का मूल्य बदलता रहता है।
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पत्रकारिता का उद्देश्य सामाजिककरण व संस्कृतिकरण को बढ़ावा देना है, जिसे हिंदी समाचार पत्रों ने बखूबी निभाया है। अखबारों में जगह की कमी के दौर में सोशल मीडिया नया विकल्प बना है, मगर अभी वह संक्रमण काल में है। इसमें कई कमियां है, जिसे दूर करने के लिए शैक्षिक व मानसिक स्तर बढ़ाना जरूरी है। वरिष्ठ अधिवक्ता रामशंकर उर्फ शेखर सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए आईटी एक्ट के बारे में बताया। कहा कि इसका दुरुपयोग करने वालों पर न्यूनतम पांच लाख रुपये का जुर्माना व तीन साल की कैद का प्रावधान है।
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एसओ सदर शिवाकांत मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया युवाओं को गर्त में धकेल रही है। ऐसे में प्रिंट मीडिया की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह सूर्य के समान है, इसका प्रकाश सदैव रहेगा। अधिवक्ता नजीर मलिक ने कहा कि सोशल मीडिया बेलगाम जरूर है, लेकिन इतनी ताकत नहीं कि प्रिंट मीडिया को पछाड़ सके। अखबार हमारी भूख हैं। पूर्व प्राचार्य बुद्ध विद्यापीठ प्रहलाद पांडेय ने कहा कि सोशल मीडिया युवाओं के लिए यह खबरों का खजाना है। मगर इस पर चलने वाली खबरों की सत्यता को कोई नहीं प्रमाणित करता है।
भ्रम फैलाने वाले समाचारों पर रोक लगाना होगा। अध्यक्ष सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर विचार रखे, लेकिन ध्यान रखे कि टिप्पणी अमर्यादित न हो। किसी भी भावना आहत न हो। संगोष्ठी में पूर्व प्रधानाचार्य द्धिजेंद्र नाथ त्रिपाठी, डॉ.विनयकांत मिश्रा, अधिवक्ता रमेश पांडेय, शशिकांत उपाध्याय, अध्यक्ष प्रेस क्लब परमात्मा शुक्ला, उपाध्यक्ष सुनील मिश्रा, वीपी त्रिपाठी, रत्नेश शुक्ला, यतींद्र मिश्रा, संतोष श्रीवास्तव, अरविंद झा, जितेंद्र पांडेय, अरुण त्रिपाठी, अमित सिंह, श्याम सुंदर, अभिषेक श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। संचालन नियाज कपिलवस्तुवी ने किया।