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Siddharthnagar News: छत टपकने से एसएनसीयू बंद, समय से इलाज नहीं मिलने पर जुड़वा नवजात की मौत
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मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में पानी टपकने के कारण खाली पड़ा वार्ड।
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सिद्धार्थनगर। बारिश में छत टपकने से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) को रविवार रात 11 बजे बंद कर दिया गया। छत और दीवारों से पानी रिसने से शाॅर्ट सर्किट का खतरा देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने यह एहतियाती कदम उठाया। वहां भर्ती आठ नवजातों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया। इसबीच बताया जा रहा है कि एसएनसीयू बंद होने से जुड़वा नवजात को समय पर इलाज नहीं मिल पाया। इससे दाेनों की मौत हो गई।
रविवार की रात मूसलाधार बारिश होने लगी। इससे एसएनसीयू की छत टपकने लगी। वार्ड में भर्ती मरीजों को दिक्कत न हो, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उन्हें अन्यत्र शिफ्ट करने का फैसला लिया। गंभीर रूप से बीमार आठ नवजातों को एंबुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रवाना किया गया। जबकि कम गंभीर सात नवजातों को पास के पीआईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया। इसबीच खेसरहा क्षेत्र के कृष्ण गोपाल माधव की पत्नी को मेडिकल कॉलेज में सोमवार सुबह प्रसव हुआ। उनके तीन बच्चे पैदा हुए, जिसमें दो जीवित थे। दोनों को तत्काल एसएनसीयू में भर्ती करने की जरूरत थी। पता चला कि एसएनसीयू बंद है। इस पर बच्चों को बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर ले जाने का फैसला लिया। रास्ते में उनकी मौत हो गई। कृष्ण गोपाल ने कहा कि यदि एसएनसीयू की सुविधा होती तो शायद बच्चों की जान बच जाती।
पानी टपकने की सूचना पर मौके पर पहुंचा तो नमी के कारण शार्ट सर्किट का खतरा दिखा। इसलिए रात में सभी नवजातों को शिफ्ट करके एसएनसीयू बंद करने का निर्णय किया गया। जल्द ही किसी और वार्ड में एसएनसीयू शुरू करने की कोशिश की जा रही है। -डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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रविवार की रात मूसलाधार बारिश होने लगी। इससे एसएनसीयू की छत टपकने लगी। वार्ड में भर्ती मरीजों को दिक्कत न हो, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उन्हें अन्यत्र शिफ्ट करने का फैसला लिया। गंभीर रूप से बीमार आठ नवजातों को एंबुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रवाना किया गया। जबकि कम गंभीर सात नवजातों को पास के पीआईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया। इसबीच खेसरहा क्षेत्र के कृष्ण गोपाल माधव की पत्नी को मेडिकल कॉलेज में सोमवार सुबह प्रसव हुआ। उनके तीन बच्चे पैदा हुए, जिसमें दो जीवित थे। दोनों को तत्काल एसएनसीयू में भर्ती करने की जरूरत थी। पता चला कि एसएनसीयू बंद है। इस पर बच्चों को बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर ले जाने का फैसला लिया। रास्ते में उनकी मौत हो गई। कृष्ण गोपाल ने कहा कि यदि एसएनसीयू की सुविधा होती तो शायद बच्चों की जान बच जाती।
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पानी टपकने की सूचना पर मौके पर पहुंचा तो नमी के कारण शार्ट सर्किट का खतरा दिखा। इसलिए रात में सभी नवजातों को शिफ्ट करके एसएनसीयू बंद करने का निर्णय किया गया। जल्द ही किसी और वार्ड में एसएनसीयू शुरू करने की कोशिश की जा रही है। -डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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