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Siddharthnagar News: फैल रहा स्मैक का कारोबार, युवा नशे के शिकार
Thu, 21 Nov 2024 11:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 21 Nov 2024 11:10 PM IST
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सिद्धार्थनगर /ढेबरुआ। नेपाल से लगने वाली सीमा पर नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है। इसके लिए सबसे सुरक्षित जोन बढ़नी बार्डर बना हुआ है। यहां पर स्मैक बेचने का पूरा सिंडिकेट चलता है। जिसमें भारतीय क्षेत्र के अलावा नेपाली युवा भी शामिल हैं। जो खुद के साथ-साथ अन्य युवाओं को लत का शिकार बनाते हैं। इसके बाद स्मैक खरीदने पर विवश कर देते हैं। बीते माह पकड़े गए दो तस्करों ने गोंडा और बलरामपुर से लाकर बेचने की जानकारी दी थी।
पुड़िया में होने वाले इस कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य किरदार तक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नहीं पहुंच पा रही हैं। प्यादे तक कार्रवाई सीमित रह जाती है, जो पकड़े जाने पर इधर जेल जाते हैं और उधर फिर बाहर आते ही उसे धंधे में लिप्त हो जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ जागरूक नागरिकों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि कुछ नई उम्र के युवा हैं जो पूरे दिन घूमते हैं और ठाटबाट से रहते हैं। उनका यही काम है कि युवाओं को स्मैक का लत दिलाते हैं, जब वह आदी होते हैं तो खरीदने के लिए दौड़ लगाने लगते हैं। सुरक्षा एजेंसी और पुलिस विभाग इनपर कार्रवाई भी नहीं कर पा रही है।
चुनिंदा स्थानों से मिलती है पुड़िया
बढ़नी बॉर्डर से सटे नेपाल के कृष्णानगर निवासी एक दुकानदार ने बताया कि तीन चार युवक हैं, जो घूमते रहते हैं। इसके बाद एक चिह्नित स्थान पर खड़े हो जाते हैं। जहां बाइक से कुछ युवक आते हैं। जो एक-एक करके पुड़िया लेते हैं और निकल जाते हैं। कुछ चाय की दुकान है, जहां एक युवक बैठेगा और फिर धीरे-धीरे चाय पीने के लिए भारतीय और नेपाल के युवक जुटते हैं। चाय पीने में आदान प्रदान करते हैं। रुपये की हिसाब हाथो-हाथ नहीं करते हैं, उसे बाद में कई बार करते हैं तो कुछ ऑनलाइन भुगतान करते हैं। मौजूदा समय में तेजी से यह कार्य हो रहा है।
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संयुक्त टीम ने एक अड्डे पर मारा था छापा
कुछ दिनों पहले स्मैक के एक अड्डे पर पुलिस एवं एसएसबी के जवानों ने छापा मारा था, जहां से कुछ लोगों को पुलिस ने पकड़ा भी था, लेकिन कोई बड़ा खुलासा पुलिस नहीं कर पाई। फिलहाल जानकार बताते है कि स्मैक के कारोबार में कई गुना कमाई है, पिछले दस सालों के अंदर बढ़नी एवं आसपास नशे के कारोबार करने वाले अचानक मालामाल हुए हैं। इसी कमाई से मकान और दुकान खड़ा कर लिए हैं। हालांकि, यह लोग जिस प्रकार से कुछ बड़े लोगों के संपर्क में रहते हैं कि कोई उन पर हाथ नहीं डालता है। कई सफेद पोशाक वाले भी इस कारोबार में जुड़े हुए हैं।
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इस मार्ग पर होता है कारोबार
सीमावर्ती क्षेत्र के मधवानगर जाने वाली रोड के पास शाम होते एक मकान एवं रेलवे स्टेशन के पास युवाओं का ताता लगा रहता है। यहां 200 से 300 में इन युवाओं को आसानी से स्मैक की पुड़िया उपलब्ध हो जा रही है। 24 घंटे नशे के इस कारोबार का खुले पैमाने पर काम चल रहा है। स्मैक कारोबारी इतने सिस्टम से काम करते हैं वे प्रशासनिक पकड़ से बाहर रहते हैं, कई तो कैमरे से मॉनिटरिंग करके घर से बाहर वालों को देखकर कंफर्म करने के बाद ग्राहकों को स्मैक उपलब्ध कराते है। क्षेत्र में नशे का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को खुले रूप से बेच रहे स्मैक कारोबारी चैलेंज दे रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने स्मैक के बड़े कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने एवं युवाओं को नशे से बचाने के लिए अभियान चलाने की मांग की है।
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पुलिस की कार्रवाई
सितंबर माह में ढेबरुआ पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने दो संदिग्धों को पकड़ा था। इनके कब्जे से 10 ग्राम स्मैक पकड़ा था। पूछताछ में उन्होंने बताया कि बलरामपुर से स्मैक लाकर बेचते थे। पहले भी स्मैक बेचने के मामले में जेल जा चुके हैं। इसके अलावा सितंबर माह के आखिरी सप्ताह में 11 ग्राम स्मैक के साथ बढ़नी कस्बे के ही एक युवक को संयुक्त टीम ने पकड़ा था। यह तो नजर में आने वाले हैं। न जाने इस कार्य में कितने लोग लिप्त हैं। मेन सिंडीकेट के टूटने के बाद ही धंधा मंदा होगा। ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है।
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कोट
स्मैक बढ़नी क्षेत्र किसी भी इलाके में बिक्री नहीं हो रही है। पुलिस अपनी नजर बनाए हुए है। कहीं कोई स्मैक बेचता हुआ पाया गया तो उसके विरुद्ध कड़ी से कार्रवाई की जाएगी। कोई अपराधी पुलिस की नजर बच नहीं सकता है।
-सुजीत कुमार राय, सीओ शोहरतगढ़
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पुड़िया में होने वाले इस कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य किरदार तक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नहीं पहुंच पा रही हैं। प्यादे तक कार्रवाई सीमित रह जाती है, जो पकड़े जाने पर इधर जेल जाते हैं और उधर फिर बाहर आते ही उसे धंधे में लिप्त हो जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ जागरूक नागरिकों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि कुछ नई उम्र के युवा हैं जो पूरे दिन घूमते हैं और ठाटबाट से रहते हैं। उनका यही काम है कि युवाओं को स्मैक का लत दिलाते हैं, जब वह आदी होते हैं तो खरीदने के लिए दौड़ लगाने लगते हैं। सुरक्षा एजेंसी और पुलिस विभाग इनपर कार्रवाई भी नहीं कर पा रही है।
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चुनिंदा स्थानों से मिलती है पुड़िया
बढ़नी बॉर्डर से सटे नेपाल के कृष्णानगर निवासी एक दुकानदार ने बताया कि तीन चार युवक हैं, जो घूमते रहते हैं। इसके बाद एक चिह्नित स्थान पर खड़े हो जाते हैं। जहां बाइक से कुछ युवक आते हैं। जो एक-एक करके पुड़िया लेते हैं और निकल जाते हैं। कुछ चाय की दुकान है, जहां एक युवक बैठेगा और फिर धीरे-धीरे चाय पीने के लिए भारतीय और नेपाल के युवक जुटते हैं। चाय पीने में आदान प्रदान करते हैं। रुपये की हिसाब हाथो-हाथ नहीं करते हैं, उसे बाद में कई बार करते हैं तो कुछ ऑनलाइन भुगतान करते हैं। मौजूदा समय में तेजी से यह कार्य हो रहा है।
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संयुक्त टीम ने एक अड्डे पर मारा था छापा
कुछ दिनों पहले स्मैक के एक अड्डे पर पुलिस एवं एसएसबी के जवानों ने छापा मारा था, जहां से कुछ लोगों को पुलिस ने पकड़ा भी था, लेकिन कोई बड़ा खुलासा पुलिस नहीं कर पाई। फिलहाल जानकार बताते है कि स्मैक के कारोबार में कई गुना कमाई है, पिछले दस सालों के अंदर बढ़नी एवं आसपास नशे के कारोबार करने वाले अचानक मालामाल हुए हैं। इसी कमाई से मकान और दुकान खड़ा कर लिए हैं। हालांकि, यह लोग जिस प्रकार से कुछ बड़े लोगों के संपर्क में रहते हैं कि कोई उन पर हाथ नहीं डालता है। कई सफेद पोशाक वाले भी इस कारोबार में जुड़े हुए हैं।
इस मार्ग पर होता है कारोबार
सीमावर्ती क्षेत्र के मधवानगर जाने वाली रोड के पास शाम होते एक मकान एवं रेलवे स्टेशन के पास युवाओं का ताता लगा रहता है। यहां 200 से 300 में इन युवाओं को आसानी से स्मैक की पुड़िया उपलब्ध हो जा रही है। 24 घंटे नशे के इस कारोबार का खुले पैमाने पर काम चल रहा है। स्मैक कारोबारी इतने सिस्टम से काम करते हैं वे प्रशासनिक पकड़ से बाहर रहते हैं, कई तो कैमरे से मॉनिटरिंग करके घर से बाहर वालों को देखकर कंफर्म करने के बाद ग्राहकों को स्मैक उपलब्ध कराते है। क्षेत्र में नशे का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को खुले रूप से बेच रहे स्मैक कारोबारी चैलेंज दे रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने स्मैक के बड़े कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने एवं युवाओं को नशे से बचाने के लिए अभियान चलाने की मांग की है।
पुलिस की कार्रवाई
सितंबर माह में ढेबरुआ पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने दो संदिग्धों को पकड़ा था। इनके कब्जे से 10 ग्राम स्मैक पकड़ा था। पूछताछ में उन्होंने बताया कि बलरामपुर से स्मैक लाकर बेचते थे। पहले भी स्मैक बेचने के मामले में जेल जा चुके हैं। इसके अलावा सितंबर माह के आखिरी सप्ताह में 11 ग्राम स्मैक के साथ बढ़नी कस्बे के ही एक युवक को संयुक्त टीम ने पकड़ा था। यह तो नजर में आने वाले हैं। न जाने इस कार्य में कितने लोग लिप्त हैं। मेन सिंडीकेट के टूटने के बाद ही धंधा मंदा होगा। ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है।
कोट
स्मैक बढ़नी क्षेत्र किसी भी इलाके में बिक्री नहीं हो रही है। पुलिस अपनी नजर बनाए हुए है। कहीं कोई स्मैक बेचता हुआ पाया गया तो उसके विरुद्ध कड़ी से कार्रवाई की जाएगी। कोई अपराधी पुलिस की नजर बच नहीं सकता है।
-सुजीत कुमार राय, सीओ शोहरतगढ़