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Siddharthnagar News: साहब! 348 रुपये में खरीदकर 266 रुपये में कैसे बेचें यूरिया
Tue, 29 Oct 2024 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 29 Oct 2024 01:21 AM IST
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जिला कृषि अधिकारी कार्यालय पर कृषि अधिकारी को ज्ञापन देते उर्वरक विक्रेता।
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सिद्धार्थनगर। जिले के दो सौ से अधिक उर्वरक विक्रेताओं ने अधिक लागत पर मिल रहे उर्वरक को कम मूल्य पर बिक्री करने के निर्देश के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोमवार को कृषि भवन पहुंचकर जिला कृषि अधिकारी से समस्या के निदान की मांग की।
उनका कहना था कि अगर उनकी समस्या का जल्द निदान नहीं हुआ तो वह दुकान बंद कर देंगे। जिले के शोहरतगढ़, बढ़नी, बर्डपुर, लोटन, उसका, बांसी समेत विभिन्न क्षेत्रों के उर्वरक दुकानदार सोमवार को अपनी समस्याओं के निदान के लिए जिला कृषि अधिकारी से मिले। उनका कहना था कि रेल मार्ग से आने वाली खाद का रैक बस्ती में उतरता है। जहां से उठान करने पर उन्हें एक बोरी यूरिया खाद की कीमत 260 रुपये पड़ता है। वहां से दुकान तक लाने के लिए प्रति बोरी 25 रुपये ढुलाई और तीन रुपये पल्लेदारी पड़ती है।
इसके साथ ही प्रत्येक बोरी पर 60 रुपये मूल्य तक के फेरिस सल्फेट समेत अन्य रासायनिक व जैविक उत्पाद बिक्री करने के लिए जबरिया दिए जाते हैं, जिससे प्रति बोरी यूरिया का मूल्य दुकान तक पहुंचने पर 348 रुपये पड़ता है। वहीं एक बोरिया यूरिया को 266 रुपये में बिक्री करने का निर्देश है। यूरिया लेने के लिए आने वाले किसान 60 रुपये के रासायनिक व जैविक उत्पाद नहीं खरीदते हैं। ऐसे में एक बोरी यूरिया पर कुल लागत 348 रुपये हो जाता है।
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ऐसे में किसानों को एक बोरी यूरिया 266 रुपये में कैसे दे सकते हैं। यह पूरी तरह से घाटा है। उर्वरक दुकानदार रामकुमार, जितेंद्र कुमार, जैली चौधरी, सुरेंद्र चौधरी, विशाल, नवीन, जेके मौर्या व शिवम आदि ने जिला कृषि अधिकारी से मिल समस्या के समाधान की मांग की। दुकानदारों का कहना था कि अगर उनकी समस्याओं का निदान नहीं किया गया तो वह दुकान बंद करने को मजबूर होंगे।ि
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उनका कहना था कि अगर उनकी समस्या का जल्द निदान नहीं हुआ तो वह दुकान बंद कर देंगे। जिले के शोहरतगढ़, बढ़नी, बर्डपुर, लोटन, उसका, बांसी समेत विभिन्न क्षेत्रों के उर्वरक दुकानदार सोमवार को अपनी समस्याओं के निदान के लिए जिला कृषि अधिकारी से मिले। उनका कहना था कि रेल मार्ग से आने वाली खाद का रैक बस्ती में उतरता है। जहां से उठान करने पर उन्हें एक बोरी यूरिया खाद की कीमत 260 रुपये पड़ता है। वहां से दुकान तक लाने के लिए प्रति बोरी 25 रुपये ढुलाई और तीन रुपये पल्लेदारी पड़ती है।
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इसके साथ ही प्रत्येक बोरी पर 60 रुपये मूल्य तक के फेरिस सल्फेट समेत अन्य रासायनिक व जैविक उत्पाद बिक्री करने के लिए जबरिया दिए जाते हैं, जिससे प्रति बोरी यूरिया का मूल्य दुकान तक पहुंचने पर 348 रुपये पड़ता है। वहीं एक बोरिया यूरिया को 266 रुपये में बिक्री करने का निर्देश है। यूरिया लेने के लिए आने वाले किसान 60 रुपये के रासायनिक व जैविक उत्पाद नहीं खरीदते हैं। ऐसे में एक बोरी यूरिया पर कुल लागत 348 रुपये हो जाता है।
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ऐसे में किसानों को एक बोरी यूरिया 266 रुपये में कैसे दे सकते हैं। यह पूरी तरह से घाटा है। उर्वरक दुकानदार रामकुमार, जितेंद्र कुमार, जैली चौधरी, सुरेंद्र चौधरी, विशाल, नवीन, जेके मौर्या व शिवम आदि ने जिला कृषि अधिकारी से मिल समस्या के समाधान की मांग की। दुकानदारों का कहना था कि अगर उनकी समस्याओं का निदान नहीं किया गया तो वह दुकान बंद करने को मजबूर होंगे।ि