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Siddharthnagar News: मरीज माफिया को जीवनदान दे रही सिस्टम की ‘बीमारी’

Thu, 25 Sep 2025 12:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 25 Sep 2025 12:40 AM IST
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Siddharthnagar News: The disease of the system is giving life to the patient mafia
सिद्धार्थनगर। सिस्टम की लाचारी और मरीज माफियाओं की सेंधमारी से हर माह निजी अस्पतालों में महराजगंज के बभनी खुर्द निवासी सरिता जैसी महिलाएं जान गंवा रहीं हैं। अगर मरीजाें के मौत पर किसी ने आवाज उठाई और अफसरों तक मामला पहुंचा तो सील करने के साथ जुर्माना लगाने तक कार्रवाई सिमट कर रह जाती है। वह भी 10-15 हजार रुपये।
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वहीं, न जाने कितने लोगों की आवाज उठने से पहले पंचायत और बिचौलियों के माध्यम से दबा दी जाती है। जहां मौत बाद हाेने वाली शोर पर अफसरों की चुप्पी टूटने के बाद कार्रवाई होती भी है तो वह अस्पताल भी चंद दिन बाद फिर संचालित होने लगते हैं।
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आरके सेवा हाॅस्पिटल पर भी आरोप है कि पहले भी बंद हाे चुका है लेकिन यह फिर संचालित होने लगा। ऐसे ही जिले में अधिकांश अस्पताल हैं जो बंद हुए और बाद में मामला ठंड होने के बाद खुल गए। जब इनके बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि इन्हाेंने कागजी कोरम पूरा कर लिया और नियम के तहत खुला है। चौंंकाने वाली बात यह है कि जहां जिंदगी जा रही है, यह जानते हुए भी छोड़ दिया जा रहा कि सामने वाले की जान चली जाएगी। जो जानें जा चुकीं हैं जुर्माना भरने मात्र से उनके दाग धुल जा रहे हैं। कहा जाए तो स्वास्थ्य विभाग की नजर में जिंदगी की कीमत जुर्माना की रकम तक सिमट कर रह गई है।
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यही नतीजा है कि जान लेने वालों के हौंसले बुलंद हैं और वह जिंदगी छीनने के बाद भी धंधे में लगे हुए हैं।
तीन अस्पताल सील, एक पर केस : विधि विशेषज्ञ का कहना है कि गैर इरादतन हत्या जैसे मामले में अगर केवल जुर्माना का ही प्रावधान है तो यह बहुत ही गलत है। ऐसे नियम को बदलने की जरूरत और भारी भरकम जुर्माना राशि तय होनी चाहिए, जिससे एक बार लगने के बाद दोबारा गलती और लापरवाही न कर सके। वहीं, विभागीय जिम्मेदारों का कहना है कि जो नियम है, उसके हिसाब से कार्रवाई की जाती है।
वहीं, कार्रवाई की बात करें तो अप्रैल से अबतक पांच पर जुर्माना लगाया गया। तीन अस्पताल सील किया गया। एक पर केस दर्ज कराया गया है जबकि अनियमितता के मामले 50 हाॅस्पिटल को नोटिस जारी किया गया है।
प्रसूता और बच्चे की चली गई थी जान : बांसी कोतवाली क्षेत्र में कुछ माह पहले बांसी के एक निजी अस्पताल में एक महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई थी। इस मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई थी। इसमें जांच में गड़बड़ी पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई थी लेकिन, महिला और दुनिया से देखने से पहले नवजात दुनिया को छोड़ गया।
आशा ने महिला अस्पताल से पहुंचा दिया निजी अस्पताल : एक वर्ष पहले जोगिया क्षेत्र की एक प्रसूता की हालात खराब हाेने के चलते महिला अस्पताल से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। इसमें महिला अस्पताल से ही एक आशा वर्कर ने उसे एक निजी एंबुलेंस वाले को बुलाकर शहर के बाहर एक अस्पताल में पहुंचा दिया, जहां रुपये लिए गए और हालत खराब होने के बाद गोरखपुर जाने के लिए कहा गया।
मामला प्रशासन तक पहुंचा तो एसडीएम की अगुवाई में टीम पहुंची। इसके बाद एक निजी अस्पताल में लेकर आए, लेकिन महिला को बचाया नहीं जा सका। मृतका के पिता की तहरीर पर आशा वर्कर, निजी एंबुलेस चालक पर केस दर्ज किया गया था। साथ ही जांच में अस्पताल का अवैध संचालित होना पाया गया था।

गलत ऑपरेशन से चली गई जान : लगभग तीन माह शहर के ही एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई थी। इसके बाद गोरखपुर जाने के लिए कहने लगे। इस दौरान उसने दम तोड़ दिया। परिवार के लोगों ने हंगामा किया। काफी बवाल हुआ। इसमें में डीएम ने कमेटी गठित करके जांच कराई तो दो ऑपरेशन के बाद सही नहीं पाई गई। वहीं, पीड़ित पक्ष भी किसी प्रकार की कार्रवाई और बयान से मुकर गया था।
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