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Siddharthnagar News: कदम थे शातिराना...तकनीक की रेस में पिछड़ गए भगोड़े सिपाही
Sun, 02 Nov 2025 11:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 02 Nov 2025 11:20 PM IST
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सिद्धार्थनगर। मोहाना थानाक्षेत्र में मूर्ति विसर्जन के दौरान रजनीश पटेल को अगवा करके हत्या की कोशिश के आरोपी दो सिपाहियों मनोज यादव और राजन सिंह को पुलिस ने हिमाचल से गिरफ्तार किया है।
इन इनामी सिपाहियों की भागने की प्लानिंग शातिर अपराधी और चालाक पुलिसकर्मी की तरह रही। बिहार, मुंबई या किसी अन्य प्रदेश में शरण लेने के बजाय हिमाचल के मनाली को चुना। हालांकि तकनीक की रेस में पीछे रहे गए और हाई सर्विलांस व ट्रैवल हिस्ट्री के आधार पर पकड़ लिए गए। सूत्राें का कहना है कि इस मामले में फरार दो अन्य आरोपी सिपाहियों मंजीत सिंह और अभिषेक गुप्ता के भी सुराग जांच टीम को मिल गए हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश के मनाली से शनिवार को जिले की पुलिस टीम ने मनोज और राजन को गिरफ्तार किया और मनाली कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद लौट रही है। अहम सुराग मिलने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक चारों सिपाही साथ ही फरार हुए थे लेकिन एक साथ पकड़े न जाएं इसके लिए अलग-अलग रास्ता पकड़ा। दो हिमाचल से पकड़े गए जबकि दो अन्य ने दिल्ली और उत्तराखंड के आसपास शरण ली है। सूत्रों के मुताबिक इन आरोपी सिपाहियों के जानने वाले और हर करीबी पर जांच टीम की नजर थी।
किसी माध्यम से संपर्क में आने के बाद सुराग मिला और कड़ी से कड़ी को जोड़ते हुए टीम मनाली तक पहुंच गई और उन्हें दबोचा लिया। असल में वारदात क्या हुई थी इनसे पूछताछ में इससे पर्दा हटेगा। बताया जा रहा है कि टीम उन्हें लेकर आ रही है और रविवार की रात तक पहुंच सकती है।
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नई पुलिसिंग से अपडेट, इसलिए पकड़ से रहे दूर : कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के चंपापुर गांव निवासी रजनीश के अपहरण और हत्या के प्रयास के चारों आरोपी राजन सिंह, मनोज यादव, अभिषेक गुप्त, मनजीत सिंह 2016 से 2018 बैच के हैं। जो शरीर से फिट होने के साथ-साथ नई पुलिसिंग की विधा के माहिर हैं। यही वजह थी कि भागने के बाद अपने ही विभाग को छकाने में 10 दिन तक कामयाब रहे। थोड़ी सी से राजन सिंह और मनोज यादव जांच टीम के चंगुल में फंस गए। वहीं, मनजीत और अभिषेक गुप्ता अभी भी पकड़ से दूर हैं। चारों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
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इन इनामी सिपाहियों की भागने की प्लानिंग शातिर अपराधी और चालाक पुलिसकर्मी की तरह रही। बिहार, मुंबई या किसी अन्य प्रदेश में शरण लेने के बजाय हिमाचल के मनाली को चुना। हालांकि तकनीक की रेस में पीछे रहे गए और हाई सर्विलांस व ट्रैवल हिस्ट्री के आधार पर पकड़ लिए गए। सूत्राें का कहना है कि इस मामले में फरार दो अन्य आरोपी सिपाहियों मंजीत सिंह और अभिषेक गुप्ता के भी सुराग जांच टीम को मिल गए हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश के मनाली से शनिवार को जिले की पुलिस टीम ने मनोज और राजन को गिरफ्तार किया और मनाली कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद लौट रही है। अहम सुराग मिलने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक चारों सिपाही साथ ही फरार हुए थे लेकिन एक साथ पकड़े न जाएं इसके लिए अलग-अलग रास्ता पकड़ा। दो हिमाचल से पकड़े गए जबकि दो अन्य ने दिल्ली और उत्तराखंड के आसपास शरण ली है। सूत्रों के मुताबिक इन आरोपी सिपाहियों के जानने वाले और हर करीबी पर जांच टीम की नजर थी।
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किसी माध्यम से संपर्क में आने के बाद सुराग मिला और कड़ी से कड़ी को जोड़ते हुए टीम मनाली तक पहुंच गई और उन्हें दबोचा लिया। असल में वारदात क्या हुई थी इनसे पूछताछ में इससे पर्दा हटेगा। बताया जा रहा है कि टीम उन्हें लेकर आ रही है और रविवार की रात तक पहुंच सकती है।
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नई पुलिसिंग से अपडेट, इसलिए पकड़ से रहे दूर : कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के चंपापुर गांव निवासी रजनीश के अपहरण और हत्या के प्रयास के चारों आरोपी राजन सिंह, मनोज यादव, अभिषेक गुप्त, मनजीत सिंह 2016 से 2018 बैच के हैं। जो शरीर से फिट होने के साथ-साथ नई पुलिसिंग की विधा के माहिर हैं। यही वजह थी कि भागने के बाद अपने ही विभाग को छकाने में 10 दिन तक कामयाब रहे। थोड़ी सी से राजन सिंह और मनोज यादव जांच टीम के चंगुल में फंस गए। वहीं, मनजीत और अभिषेक गुप्ता अभी भी पकड़ से दूर हैं। चारों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।