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Siddharthnagar News: एकात्म मानववाद के प्रणेता थे पं. दीनदयाल
Thu, 25 Sep 2025 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 25 Sep 2025 11:27 PM IST
सार
सिद्धार्थनगर के सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में पं. दीनदयाल उपाध्याय समग्र चिंतन विषयक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें एकात्म मानव दर्शन, राष्ट्र विकास और भारतीय संदर्भ में प्रौद्योगिकी जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में कई शिक्षाविदों ने भाग लिया।
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विस्तार
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बृहस्पतिवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय समग्र चिंतन विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. सदानंद गुप्त ने कहा कि पंडित दीनदयाल ने एकात्म मानव दर्शन, राष्ट्र, संस्कृति और चिति, शिक्षा, प्रकृति के संरक्षण की सशक्त अवधारणा दी थी।
कहा कि उन्हें दार्शनिक, राजनीतिक और आर्थिक चिंतक और एकात्म मानव दर्शन का प्रणेता भी कहा जाता है।
कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र की आवश्यकताएं, संसाधन, सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचा भिन्न होते हैं, इसलिए उसका विकास अपनी परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए न कि अन्य देशों की नकल पर। इसी कारण पं. दीनदयाल उपाध्याय श्रम-प्रधान और अल्प-पूंजी आधारित प्रौद्योगिकी के समर्थक थे।
प्रो. नीता यादव ने कहा कि उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरक है। उनका जीवन-दर्शन आज के भारत में सामाजिक समरसता और संतुलित विकास का मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्रो. हरीश कुमार शर्मा ने काव्यात्मक शैली में किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सच्चिदानंद चौबे और संचालन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. जय सिंह यादव ने किया।
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कार्यक्रम में प्रो. दीपक बाबू , प्रो. सौरभ, डॉ. अखिलेश दीक्षित, डॉ. कौशलेंद्र चतुर्वेदी, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. सुनीता त्रिपाठी मौजूद रहीं।
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कहा कि उन्हें दार्शनिक, राजनीतिक और आर्थिक चिंतक और एकात्म मानव दर्शन का प्रणेता भी कहा जाता है।
कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र की आवश्यकताएं, संसाधन, सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचा भिन्न होते हैं, इसलिए उसका विकास अपनी परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए न कि अन्य देशों की नकल पर। इसी कारण पं. दीनदयाल उपाध्याय श्रम-प्रधान और अल्प-पूंजी आधारित प्रौद्योगिकी के समर्थक थे।
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प्रो. नीता यादव ने कहा कि उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरक है। उनका जीवन-दर्शन आज के भारत में सामाजिक समरसता और संतुलित विकास का मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्रो. हरीश कुमार शर्मा ने काव्यात्मक शैली में किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सच्चिदानंद चौबे और संचालन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. जय सिंह यादव ने किया।
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कार्यक्रम में प्रो. दीपक बाबू , प्रो. सौरभ, डॉ. अखिलेश दीक्षित, डॉ. कौशलेंद्र चतुर्वेदी, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. सुनीता त्रिपाठी मौजूद रहीं।