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भारत ने पड़ोसी देशों की हमेशा आर्थिक मदद की : कमर आगा

Fri, 30 Jan 2026 11:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 30 Jan 2026 11:49 PM IST
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Siddharthnagar News: India has always provided economic assistance to its neighboring countries: Qamar Agha
पकड़ी में स्थित नर्सिंग कॉलेज में पुस्तक दिखाई प्रोफेसर। स्रोत विज्ञप्ति
सिद्धार्थनगर। भारत की विदेश नीति युद्ध से बचने की रही है। भारत अपने पड़ोसी देशों पर किसी भी प्रकार का फर्स्ट स्ट्राइक नहीं करना चाहता है। भारत की नीति रही है कि पाकिस्तान के साथ युद्ध और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते हैं।
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यह बातें मुख्य वक्ता बीबीसी के पैनलिस्ट दिल्ली के कमर आगा ने कहीं। वह दक्षिण एशिया में लोकतंत्र पर गहराता संकट और भारत की भूमिका, चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर पकड़ी स्थित एक नर्सिंग कॉलेज में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रवि रमेश चंद शुक्ल ने बताया कि भारत नैसर्गिक रूप से सबसे पहले आता है, इसलिए बड़े भाई होने की भारत की आलोचना बेतुकी है। उन्होंने वेदों में कहीं श्लोकों के द्वारा बताया कि भारत दुनिया का सबसे प्राचीनतम लोकतंत्र है, भारत और भूटान दो ऐसी सभ्यताएं और संस्कृति रही है जो हिंसा के द्वारा पैदा नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त शेष अधिकांश दक्षिण एशियाई देश हिंसा की उपज माने जाते हैं।
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जहां तक बात नेपाल की है तो जब तक वहां अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की जड़े मजबूत थी, तब तक नेपाल खुशहाल था। माओवाद और उसके बाद के दौर में एक संक्रमण के दौर से नेपाल गुजर रहा है। नई दिल्ली से आए रक्षा विशेषज्ञ दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि भारत में पड़ोसियों के साथ सदैव सच्चे मित्र के तौर पर संबंध को निभाया है। श्रीलंका में आर्थिक संकट रहा हो या नेपाल में भूकंप, बांग्लादेश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना रहा हो या शेख हसीना को संरक्षण देना, भारत ने सदैव सहअस्तित्व और लोकतंत्र को बचाने का प्रयास किया है।
नई दिल्ली के भारतीय वैश्विक परिषद से से आई डॉ. पुनीत गौड़ ने बताया कि भारतीय वैश्विक परिषद किस तरह से भारत के ग्रामीण अंचल में भी बौद्धिक संगोष्ठियों को प्रोत्साहित कर रही हैं। इसके साथ ही युवाओं को छात्रवृत्ति के माध्यम से उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रो. शक्ति जायसवाल ने बताया कि पहले तकनीक सत्र दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की समस्या और दूसरे तकनीक सत्र दक्षिण एशिया में लोकतंत्र संकट पर भारत के नेतृत्व की भूमिका पर विचार किया गया।

प्राचार्य प्रो. अभय कुमार श्रीवास्तव, डॉ. सोवरन सिंह प्रिंसिपल नर्सिंग कॉलेज, एचआरपीजी से डॉ. शशिकांत राव, बापू पीजी कॉलेज से डॉ. करुणेंद्र सिंह, डॉ. भानु गुप्ता, सुदृष्टि कॉलेज बलिया से विवेक कुमार राय, दिग्विजय, अखिलेश, महेंद्र सोनी, बांसी रतनसिंह कॉलेज से डॉ. हंसराज कुशवाहा ने दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की समस्या पर अपने विचार रखें। कार्यक्रम में आकांक्षी मिश्र, शुभम मिश्र, राघवेंद्र सिंह, विनोद, प्रो. भारत भूषण द्विवेदी, नसरुल मुस्तफा आदि मौजूद रहे।
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