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Siddharthnagar News: श्रीराम कथा में सुनाया शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग
Mon, 12 Oct 2026 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 12 Oct 2026 11:48 PM IST
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सती चरित्र से लेकर शिव विवाह तक की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के बनगवां नानकार गांव में नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से दुर्गा पूजा के अवसर पर संगीतमयी श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। कथा में कथावाचक बाबा विजय राघव दास रामायणी ने सती चरित्र से लेकर भगवान शिव-पार्वती विवाह तक के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचक ने सती चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने से आहत माता सती ने अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद भगवान शिव सती के वियोग में वैराग्य धारण कर तपस्या में लीन हो गए। आगे चलकर माता सती ने पार्वती के रूप में हिमालय के घर जन्म लिया और भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति और साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
शिव विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव की बरात में भूत-प्रेत, शिवगण, योगी और देवता शामिल हुए। भगवान शिव के अनोखे स्वरूप को देखकर माता पार्वती की माता मैना भयभीत हो गईं। इसके बाद देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव ने मनोहर दूल्हे का दिव्य स्वरूप धारण किया। वैदिक रीति-रिवाज से भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।
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कथावाचक ने कहा कि भगवान शिव का विवाह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि त्याग, तपस्या, भक्ति और सनातन संस्कृति के आदर्शों का प्रतीक है। विवाह के दौरान गोत्र पूछे जाने पर भगवान शिव ने अपना गोत्र ''नाद'' बताया, जो उनके अनादि और अनंत स्वरूप का बोध कराता है।
इस दौरान वीरेंद्र दुबे, सतीश दुबे, जय प्रकाश दुबे, कल्लू यादव, इंदल यादव, महेंद्र पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के बनगवां नानकार गांव में नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से दुर्गा पूजा के अवसर पर संगीतमयी श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। कथा में कथावाचक बाबा विजय राघव दास रामायणी ने सती चरित्र से लेकर भगवान शिव-पार्वती विवाह तक के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचक ने सती चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने से आहत माता सती ने अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद भगवान शिव सती के वियोग में वैराग्य धारण कर तपस्या में लीन हो गए। आगे चलकर माता सती ने पार्वती के रूप में हिमालय के घर जन्म लिया और भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति और साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
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शिव विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव की बरात में भूत-प्रेत, शिवगण, योगी और देवता शामिल हुए। भगवान शिव के अनोखे स्वरूप को देखकर माता पार्वती की माता मैना भयभीत हो गईं। इसके बाद देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव ने मनोहर दूल्हे का दिव्य स्वरूप धारण किया। वैदिक रीति-रिवाज से भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।
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कथावाचक ने कहा कि भगवान शिव का विवाह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि त्याग, तपस्या, भक्ति और सनातन संस्कृति के आदर्शों का प्रतीक है। विवाह के दौरान गोत्र पूछे जाने पर भगवान शिव ने अपना गोत्र ''नाद'' बताया, जो उनके अनादि और अनंत स्वरूप का बोध कराता है।
इस दौरान वीरेंद्र दुबे, सतीश दुबे, जय प्रकाश दुबे, कल्लू यादव, इंदल यादव, महेंद्र पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।