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Siddharthnagar News: गोपियां गांव में रामलीला का शुभारंभ, पहले दिन हुआ नारद मोह का मंचन
Tue, 13 Oct 2026 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:34 AM IST
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दशमी मिलन समारोह में नेपाल के विजयनगर गांव पालिका में पारंपरिक गीत प्रस्तुत करती बच्चिया। स्रोत
- पहले दिन पंडाल में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
भनवापुर। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के गोपियां गांव में रविवार की रात दस दिवसीय श्रीरामलीला का शुभारंभ हुआ। पहले दिन स्थानीय कलाकारों ने नारद मोह प्रसंग का सजीव मंचन किया। इस दौरान रामलीला पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही।
मंचन में दिखाया गया कि नारद जी तपस्या में लीन हो जाते हैं। इससे देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है। नारद जी की तपस्या भंग करने के लिए इंद्र अपने सेवकों को भेजते हैं, लेकिन कोई भी उनकी तपस्या भंग नहीं कर पाता। अंत में कामदेव भी प्रयास करते हैं, लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिलती। इसके बाद नारद जी को अपनी तपस्या पर घमंड हो जाता है और वह भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शंकर जी के सामने कामदेव पर विजय प्राप्त करने की बात कहते हैं।
नारद जी का घमंड दूर करने के लिए भगवान विष्णु उन्हें हरि यानी वानर का स्वरूप प्रदान कर देते हैं। इसके बाद नारद जी राजा शीलनिधि की पुत्री के स्वयंवर में पहुंचते हैं, जहां उनके स्वरूप को देखकर लोग उनका उपहास करने लगते हैं। इस तरह नारद जी का घमंड चूर-चूर हो जाता है।
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इस अवसर पर आयोजक सुशील पांडेय, मनीष पांडेय, विजय यादव, लवकुश यादव, विष्णु पांडेय, बाबू चौरसिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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भनवापुर। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के गोपियां गांव में रविवार की रात दस दिवसीय श्रीरामलीला का शुभारंभ हुआ। पहले दिन स्थानीय कलाकारों ने नारद मोह प्रसंग का सजीव मंचन किया। इस दौरान रामलीला पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही।
मंचन में दिखाया गया कि नारद जी तपस्या में लीन हो जाते हैं। इससे देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगता है। नारद जी की तपस्या भंग करने के लिए इंद्र अपने सेवकों को भेजते हैं, लेकिन कोई भी उनकी तपस्या भंग नहीं कर पाता। अंत में कामदेव भी प्रयास करते हैं, लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिलती। इसके बाद नारद जी को अपनी तपस्या पर घमंड हो जाता है और वह भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शंकर जी के सामने कामदेव पर विजय प्राप्त करने की बात कहते हैं।
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नारद जी का घमंड दूर करने के लिए भगवान विष्णु उन्हें हरि यानी वानर का स्वरूप प्रदान कर देते हैं। इसके बाद नारद जी राजा शीलनिधि की पुत्री के स्वयंवर में पहुंचते हैं, जहां उनके स्वरूप को देखकर लोग उनका उपहास करने लगते हैं। इस तरह नारद जी का घमंड चूर-चूर हो जाता है।
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इस अवसर पर आयोजक सुशील पांडेय, मनीष पांडेय, विजय यादव, लवकुश यादव, विष्णु पांडेय, बाबू चौरसिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।