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Siddharthnagar News: कुत्ते का काटना नहीं खरोंच भी जानलेवा

Tue, 13 Oct 2026 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 13 Oct 2026 12:31 AM IST
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Siddharthnagar News: Not just a dog bite even a scratch can be fatal
मेडिकल कॉलेज में करीज को एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाते स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
- मुरादाबाद में कुत्ते के हमले के बाद पागल हो गया था सातवीं का छात्र, तोड़ दिया दम
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- कुत्ता बिल्ली या अन्य पालतू जानवर का लगे खरोंच तो तत्काल एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाए
- जनपद में हर साल 50 हजार से अधिक लोग कुत्ते बिल्ली व बंदर के हमले का होते हैं शिकार
सिद्धार्थनगर। कुत्ते के काटने के साथ उसकी खरोंच को भी नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। मुरादाबाद में कुत्ते की खरोंच से रेबीज के कारण सातवीं के छात्र की मौत ने इस खतरे को उजागर किया है। जनपद सिद्धार्थनगर में हर माह करीब चार हजार लोग कुत्ते, बिल्ली और बंदर जैसे जानवरों के हमले के शिकार होते हैं। इसके बावजूद, आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जानवर के काटने या त्वचा छिलने वाली खरोंच को मामूली समझना भारी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में तत्काल घाव की सफाई कराकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी रेबीज टीका लगवाना जरूरी है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 दिन में 198 लोगों ने एंटी रेबीज टीका लगवाया। इनमें से 136 लोग कुत्तों के हमले के शिकार थे जबकि अन्य बिल्ली, बंदर जैसे जानवरों के काटने से पहुंचे थे। हमले के शिकार अधिकांश बच्चे हैं, जिनकी उम्र चार से लेकर 14 वर्ष के बीच है। पांच अक्तूबर को ढेबरुआ के टिमस गांव में चार वर्षीय बच्चे पर कुत्तों के झुंड ने हमला किया था। उसे सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में कई दिनों तक उपचार मिला। कपिया निवासी सेवक के सात वर्षीय बेटे और कड़जी निवासी नरेश की बेटी को भी कुत्तों ने काटा था।
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रेबीज संक्रमण और मौत के मामले
विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से फैलता है। काटने के अलावा, त्वचा छिलने वाली खरोंच भी संक्रमण का जोखिम पैदा कर सकती है। समय पर उपचार न मिलने और लक्षण विकसित होने के बाद रेबीज लगभग हमेशा जानलेवा होता है। जोगिया कोतवाली के लखनापार गांव में जनवरी में कुत्ते के काटने के बाद सात वर्षीय बच्चे की पांच महीने बाद मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, इसी गांव में पहले भी एक नौ साल के बच्चे की कुत्ते की खरोंच से मौत हुई थी। जिले में इटवा की 10 वर्षीय तरन्नुम, डुमरियागंज की जन्नतुनिशा और पुरानी नौगढ़ के एक बालक सहित कई लोगों की जान कुत्तों के हमले में जा चुकी है। वर्ष 2025 में सदर थाना क्षेत्र के रेहरा गांव में भी एक बच्चे की मौत हुई थी।
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आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और नियंत्रण का अभाव
जिले में आवारा कुत्तों के हमलों के बावजूद उनकी संख्या नियंत्रित करने की व्यवस्था का अभाव है। नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में आवारा कुत्तों को पकड़ने या उनकी नसबंदी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। वर्ष 2019 की उन्नीसवीं पशु गणना में जिले में 19,900 आवारा कुत्ते दर्ज किए गए थे। पशु चिकित्सा विभाग का अनुमान है कि यह संख्या अब करीब 30 हजार तक पहुंच चुकी होगी। आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए शेल्टर होम बनाने की प्रक्रिया भी अभी स्पष्ट नहीं है।


इन बातों पर दें ध्यान
कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं।
त्वचा छिल गई हो, भले ही खून न निकला हो, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
डॉक्टर टीके की जरूरत बताएं तो एंटी रेबीज टीका जरूर लगवाएं।
घाव पर मिर्च, तेल या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं और टीकाकरण में देरी न करें।
कुत्ता पालतू हो या आवारा, केवल उसके व्यवहार या दिखने से संक्रमण का खतरा खारिज न करें।
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बोले विशेषज्ञ
कुत्ता, बिल्ली, बंदर या अन्य संभावित संक्रमित जानवर के काटने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। एंटी रेबीज टीका और अन्य उपचार समय पर कराना महत्वपूर्ण है। सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज टीके की सुविधा मुफ्त उपलब्ध है।
- डॉ. सीबी चौधरी, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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