{"_id":"6900fe958c8ccf877b0eb114","slug":"siddharthnagar-news-goods-from-delhi-reach-nepal-through-setting-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-147199-2025-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: दिल्ली का माल, सेटिंग से पहुंचता है नेपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: दिल्ली का माल, सेटिंग से पहुंचता है नेपाल
Tue, 28 Oct 2025 11:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 28 Oct 2025 11:04 PM IST
विज्ञापन
भारत नेपाल सीमा बढ़नी में चेकिंग करते एसएसबी के जवान।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर/शोहरतगढ़। सीजन और मांग ने तस्करी के धंधे को हवा दी है। लग्न शुरु होने के साथ ही नेपाल में काॅस्मेटिक सामानों की तस्करी तेज हो जाती है। यहां सौंदर्य प्रसाधन पर महिलाएं बहुत अधिक खर्च करती हैं और भारतीय सामान की मांग अधिक करती हैं। ऐसे में लग्न से पहले माल को बॉर्डर पार पहुंचाने का काम शुरु हो जाता है। सूत्राें की माने तो तस्करी दो लेवल पर होती है। छोटे तस्कर गोरखपुर, कानपुर और लखनऊ की बाजार का माल चोरी छिपे बार्डर पार करते हैं। वहीं, बड़े पैमाने पर तस्करी का कनेक्शन सीधा दिल्ली से जुड़ा है, जहां व्हाॅट्सएप पर सामान की सैंपलिंग, आधा दाम पहले ऑनलाइन भुगतान और आधा डिलिवरी दुकान से निकलने के बाद किया जाता है।
दिल्ली से बॉर्डर तक आने वाली और नेपाल में जानी वाली गाड़ियों के जरिये सीधे डिलिवरी का सामान भेजा जाता है। इसमें टैक्स चोरी होने के साथ डेढ़ से दो गुना कीमत पर सामान वसूल करते हैं।
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। बार्डर तस्करी के लिए बदनाम है। सीजन के साथ सामान की तस्करी होती है। सूत्रों के मानें तो समान चाहे भारत का हो या नेपाल का, तस्कर कैरियर के माध्यम से धड़ल्ले इधर-उधर पहुंचाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। इन दिनों तस्कर नेपाल से कॉस्मेटिक के साथ ही नेपाली टूथपेस्ट और नेपाली सिगरेट भारत के सीमावर्ती में पहुचा रहे हैं।
विज्ञापन
इस इलाकों में सामनों को स्टोर कर भारत लोकल बाजारों से लेकर बड़े शहरों के मार्केट में भेजा जा रहा है। इससे जुड़े धंधे बाज मोटी कमाई कर रहे हैं। बॉर्डर से जुड़े जानकारों की मानें तो भारतीय बाजारों में 100 रुपये की क्रीम की बिक्री की जाती है। यही क्रीम नेपाल में नेपाली मुद्रा में 100 रुपये में है। यानि नेपाल में भारतीय 60 रुपये का लगभग 100 रुपया है।
इस क्रीम को तस्कर वहां से थोक में प्रति पीस 50 रुपये भारतीय मुद्रा में खरीदारी कर कैरियर के माध्यम से भारत पहुंचाते है। यही क्रीम को तस्कर बाजारों में 90 रुपये प्रति पीस की दर से बिक्री कर देते हैं।
तस्करों और इससे जुड़े धंधेबाज एक पीस क्रीम में 30 से 40 रुपये का मुनाफा कमाते हैं। इसी तरह अन्य कॉस्मेटिक और टूथपेस्ट की तस्करी कर मोटी कमाई करते हैं। इन्हीं सामनों में भारी मात्रा में नेपाली सिगरेट भी भारत लाई जाती है।
कॉस्मेटिक और टूथपेस्ट सामनों के साथ भारत के महानगर गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर तक इसकी सप्लाई की जा रही है। आए दिन सुरक्षा एजेंसियां कुछ न कुछ समान को तस्करों के कब्जे पकड़ कर कार्रवाई करती है, लेकिन तस्कर 68 किमी खुले बाॅर्डर का फायदा उठा कर तस्कर पगडंडियों से कैरियर के माध्यम से इधर का सामना उधर, उधर का समान इधर भेजते रहते हैं।
नेपाल से जो कॉस्मेटिक के साथ ही नेपाली टूथपेस्ट लाया जा रहा है। उस सामानों पर एक ही कंपनी के मेड इन नेपाल होने से ग्राहक इसे समझ नहीं पाते और बाजार में नेपाली प्रोडक्ट आसानी से खप जा रहा है।
बॉर्डर एरिया में कॉस्मेटिक सामान बढ़नी नेपाल कृष्णानगर, चंद्ररौटा, तौलिहवा, काठमांडो से लाकर खपाया जा रहा है। सीमावर्ती के बढ़नी, कोटिया, चरिगवा, बानगंगा छोर, खुनुवा, पकडीहवा, बजहा और अलीगढ़वा सहित सीमा से सटे गांव व चौराहों इन दिनों काॅस्मेटिक के तस्करी के सामानों का हब बन चुका है। नेपाल से इन इलाकों में रोजाना करोड़ों रुपये के काॅस्मेटिक प्रॉडक्ट स्टोर होते हैं।
मांग के अनुसार धंधेबाज सिद्धार्थनगर के बड़े व छोटे मार्केट सहित गोरखपुर, बस्ती, बलरामपुर, कानपुर सहित अन्य महानगरों में पहुंचाते हैं। यहां बड़ी आसानी से समान खप जाता है। इस तस्करी के खेल में बड़े तस्कर महिलाओं, बुजुर्ग, बच्चे शामिल हैं।
विज्ञापन
दिल्ली से बॉर्डर तक आने वाली और नेपाल में जानी वाली गाड़ियों के जरिये सीधे डिलिवरी का सामान भेजा जाता है। इसमें टैक्स चोरी होने के साथ डेढ़ से दो गुना कीमत पर सामान वसूल करते हैं।
विज्ञापन
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। बार्डर तस्करी के लिए बदनाम है। सीजन के साथ सामान की तस्करी होती है। सूत्रों के मानें तो समान चाहे भारत का हो या नेपाल का, तस्कर कैरियर के माध्यम से धड़ल्ले इधर-उधर पहुंचाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। इन दिनों तस्कर नेपाल से कॉस्मेटिक के साथ ही नेपाली टूथपेस्ट और नेपाली सिगरेट भारत के सीमावर्ती में पहुचा रहे हैं।
विज्ञापन
इस इलाकों में सामनों को स्टोर कर भारत लोकल बाजारों से लेकर बड़े शहरों के मार्केट में भेजा जा रहा है। इससे जुड़े धंधे बाज मोटी कमाई कर रहे हैं। बॉर्डर से जुड़े जानकारों की मानें तो भारतीय बाजारों में 100 रुपये की क्रीम की बिक्री की जाती है। यही क्रीम नेपाल में नेपाली मुद्रा में 100 रुपये में है। यानि नेपाल में भारतीय 60 रुपये का लगभग 100 रुपया है।
इस क्रीम को तस्कर वहां से थोक में प्रति पीस 50 रुपये भारतीय मुद्रा में खरीदारी कर कैरियर के माध्यम से भारत पहुंचाते है। यही क्रीम को तस्कर बाजारों में 90 रुपये प्रति पीस की दर से बिक्री कर देते हैं।
तस्करों और इससे जुड़े धंधेबाज एक पीस क्रीम में 30 से 40 रुपये का मुनाफा कमाते हैं। इसी तरह अन्य कॉस्मेटिक और टूथपेस्ट की तस्करी कर मोटी कमाई करते हैं। इन्हीं सामनों में भारी मात्रा में नेपाली सिगरेट भी भारत लाई जाती है।
कॉस्मेटिक और टूथपेस्ट सामनों के साथ भारत के महानगर गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर तक इसकी सप्लाई की जा रही है। आए दिन सुरक्षा एजेंसियां कुछ न कुछ समान को तस्करों के कब्जे पकड़ कर कार्रवाई करती है, लेकिन तस्कर 68 किमी खुले बाॅर्डर का फायदा उठा कर तस्कर पगडंडियों से कैरियर के माध्यम से इधर का सामना उधर, उधर का समान इधर भेजते रहते हैं।
नेपाल से जो कॉस्मेटिक के साथ ही नेपाली टूथपेस्ट लाया जा रहा है। उस सामानों पर एक ही कंपनी के मेड इन नेपाल होने से ग्राहक इसे समझ नहीं पाते और बाजार में नेपाली प्रोडक्ट आसानी से खप जा रहा है।
बॉर्डर एरिया में कॉस्मेटिक सामान बढ़नी नेपाल कृष्णानगर, चंद्ररौटा, तौलिहवा, काठमांडो से लाकर खपाया जा रहा है। सीमावर्ती के बढ़नी, कोटिया, चरिगवा, बानगंगा छोर, खुनुवा, पकडीहवा, बजहा और अलीगढ़वा सहित सीमा से सटे गांव व चौराहों इन दिनों काॅस्मेटिक के तस्करी के सामानों का हब बन चुका है। नेपाल से इन इलाकों में रोजाना करोड़ों रुपये के काॅस्मेटिक प्रॉडक्ट स्टोर होते हैं।
मांग के अनुसार धंधेबाज सिद्धार्थनगर के बड़े व छोटे मार्केट सहित गोरखपुर, बस्ती, बलरामपुर, कानपुर सहित अन्य महानगरों में पहुंचाते हैं। यहां बड़ी आसानी से समान खप जाता है। इस तस्करी के खेल में बड़े तस्कर महिलाओं, बुजुर्ग, बच्चे शामिल हैं।