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Siddharthnagar News: भगवत भक्ति मानव जीवन का उद्देश्य
Sat, 10 Jan 2026 11:11 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:11 PM IST
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भनवापुर। क्षेत्र के डिवलीडीहा मिश्र में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे शुक्रवार की रात कथा वाचक राकेश शास्त्री ने कहा कि मानव के श्रीमद्भागवत कथा के श्रावण मात्र से सभी पाप कट जाते हैं और वह मृत्यु लोक के आवागमन से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य भक्ति ही है।
कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि मानव के मुक्ति का मार्ग श्रीमद्भागवत कथा से ही खुलता है। उन्होंने बताया कि महाभारत की समाप्ति के बाद कलयुग के आगमन की आहट के बीच राजा परीक्षित जंगल शिकार के लिए गए, जहां कलयुग के प्रभाव से परीक्षित की मति भ्रमित हो गई और प्यास से व्याकुल हो कर पानी की तलाश में शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे, जहां शमीक ऋषि को ध्यान मग्न देख उन्हें अपशब्द बोलने लगे। पास पड़े मृत सर्प को उनके गले में डाल कर चलते बने।
नदी पर स्नान करने गए शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को अन्य बच्चों ने उनके पिता के साथ राजा द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की सूचना दी गई। अपने पिता के साथ दुर्व्यवहार की सूचना पर शृंगी ऋषि ने जल लेकर राजा परीक्षित को सात दिनों के अंदर तक्षक सर्प के डसने से मौत का श्राप दे डाला।
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शुकदेव के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया। इस दौरान राजा परीक्षित ने शुकदेव से पूछा कि मानव मात्र का उद्देश्य है। इस पर शुकदेव ने कहा कि मानव मात्र का उद्देश्य भगवत भक्ति है।
इस दौरान गायत्री प्रसाद मिश्र, महंथ मिश्र, डॉ. रमेश मिश्र, शिवपूजन दूबे, केशवानंद शास्त्री, पंकज आदि मौजूद रहे।
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कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि मानव के मुक्ति का मार्ग श्रीमद्भागवत कथा से ही खुलता है। उन्होंने बताया कि महाभारत की समाप्ति के बाद कलयुग के आगमन की आहट के बीच राजा परीक्षित जंगल शिकार के लिए गए, जहां कलयुग के प्रभाव से परीक्षित की मति भ्रमित हो गई और प्यास से व्याकुल हो कर पानी की तलाश में शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे, जहां शमीक ऋषि को ध्यान मग्न देख उन्हें अपशब्द बोलने लगे। पास पड़े मृत सर्प को उनके गले में डाल कर चलते बने।
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नदी पर स्नान करने गए शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी ऋषि को अन्य बच्चों ने उनके पिता के साथ राजा द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की सूचना दी गई। अपने पिता के साथ दुर्व्यवहार की सूचना पर शृंगी ऋषि ने जल लेकर राजा परीक्षित को सात दिनों के अंदर तक्षक सर्प के डसने से मौत का श्राप दे डाला।
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शुकदेव के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया। इस दौरान राजा परीक्षित ने शुकदेव से पूछा कि मानव मात्र का उद्देश्य है। इस पर शुकदेव ने कहा कि मानव मात्र का उद्देश्य भगवत भक्ति है।
इस दौरान गायत्री प्रसाद मिश्र, महंथ मिश्र, डॉ. रमेश मिश्र, शिवपूजन दूबे, केशवानंद शास्त्री, पंकज आदि मौजूद रहे।