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Siddharthnagar News: भागवत कथा आत्मसात करने से दुखों से मिलती है मुक्ति
Mon, 07 Sep 2026 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:25 PM IST
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चिल्हिया। श्रीमद्भागवत कथा बड़े से बड़े पापी को भी पापमुक्त करने वाली है। जो मनुष्य कथा के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात कर लेता है, वह सांसारिक दुखों से मुक्त हो जाता है।
यह बातें कथावाचक संतोष शुक्ल ने सोमवार को भीमापार, नौगढ़ के विवेकानंद नगर स्थित आईटीआई कॉलेज परिसर में राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कहीं।
उन्होंने कहा कि जीवन में मान-सम्मान, बड़ा पद या प्रतिष्ठा मिले तो उसे ईश्वर की कृपा मानकर दूसरों की भलाई में लगाना चाहिए। इन उपलब्धियों का अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है। अहंकार के कारण ही राजा परीक्षित ने जंगल में साधना कर रहे शमीक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया था, जिसपर उन्हें एक सप्ताह में मृत्यु का शाप मिला।
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कथावाचक ने कहा कि जब राजा परीक्षित ने अपने सिर से स्वर्ण मुकुट उतारा तो उन पर से कलियुग का प्रभाव समाप्त हुआ और उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने कहा कि जब-जब भगवान के भक्तों पर विपत्ति आती है, तब भगवान कल्याण के लिए सामने आते हैं।
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यह बातें कथावाचक संतोष शुक्ल ने सोमवार को भीमापार, नौगढ़ के विवेकानंद नगर स्थित आईटीआई कॉलेज परिसर में राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कहीं।
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उन्होंने कहा कि जीवन में मान-सम्मान, बड़ा पद या प्रतिष्ठा मिले तो उसे ईश्वर की कृपा मानकर दूसरों की भलाई में लगाना चाहिए। इन उपलब्धियों का अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है। अहंकार के कारण ही राजा परीक्षित ने जंगल में साधना कर रहे शमीक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया था, जिसपर उन्हें एक सप्ताह में मृत्यु का शाप मिला।
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कथावाचक ने कहा कि जब राजा परीक्षित ने अपने सिर से स्वर्ण मुकुट उतारा तो उन पर से कलियुग का प्रभाव समाप्त हुआ और उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने कहा कि जब-जब भगवान के भक्तों पर विपत्ति आती है, तब भगवान कल्याण के लिए सामने आते हैं।