फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Siddharthnagar News: Brought the body of the son with the money collected as donations... hands trembled during the cremation

Siddharthnagar News: चंदे की रकम से ले आए बेटे का शव...दाह संस्कार में कांपे हाथ

Tue, 07 Oct 2025 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 07 Oct 2025 12:07 AM IST
विज्ञापन
Siddharthnagar News: Brought the body of the son with the money collected as donations... hands trembled during the cremation
इटवा के रमवापुर पाठक गांव में रोते बिलखते मृतक के परिजन। संवाद
इटवा। आर्थिक तंगी इंसान को तोड़ देती है और टूटने पर तोड़े तो इससे बड़ा कष्ट और कुछ नहीं हो सकता है। कुछ ऐसा ही हुआ एक पिता के साथ हुआ। बेटे की ट्रेन से गिरकर मौत हो गई। उस दुख के पहाड़ से बड़ा उसके सामने लाश को लाने के लिए आर्थिक तंगी की दीवार खड़ी हो गई।
विज्ञापन

गोल्हौरा थाना क्षेत्र के रमवापुर पाठक गांव के रहने वाले रमवापुर पाठक निवासी अनिल बेटे सुनील (35) की मौत के अपार कष्ट से जूझ रहे मजबूर और बेबस पिता को आर्थिक तंगी ने तब और तोड़ दिया जब लाश लाने के लिए उसके हाथ खाली थे। बेटे को अंतिम बार देखे लेने की इच्छा में उसने गांव के लोगों ने आर्थिक मदद मांगी। लोगों ने हाथ बढ़ाया और 23 हजार रुपये दिए, इसके बाद झांसी पोस्टमार्टम हाउस से किराये के वाहन से शहर लेकर गांव पहुंचा, जिसके बाद पिता ने कांपते हाथों से बेटे का अंतिम संस्कार किया।
विज्ञापन

गोल्हौरा थाना के रमवापुर पाठक निवासी सुनील (35) पुत्र अनिल रोजी रोटी के लिए तीन माह पूर्व मुंबई गया था। वहां उसकी तबीयत खराब हो गई। इसके चलते घरवालों के कहने पर वह वापसी के लिए मुंबई से ट्रेन पर बैठ गया। शुक्रवार को वह झांसी पहुंचा ही था कि ट्रेन से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसकी सूचना जब गांव में पहुंची तो गांव में मातम छा गया। हर कोई सुनील की मौत से दुखी था। गांव के पड़ोसी आनंद कुमार दुबे बताते है कि तीन बच्चों का पिता सुनील घर में अकेले कमाऊ पूत था। उसी के मेहनत मजदूरी से उसके घर का खर्च चलता था। यही कारण था कि वर्तमान समय में उसके पास एक अदद मोबाइल नहीं था, जिसके चलते ट्रेन पर बैठने की सूचना उसे दूसरे के मोबाइल से देनी पड़ी। लेकिन, दूसरे की वहीं मोबाइल झांसी जिले के थाना पुंछ के तहत पड़ने वाले खिल्ली गांव के पास ट्रेन से गिरने के चलते हुई मौत पर घरवालों को सूचना देने का सबसे बड़ा माध्यम भी बना।
विज्ञापन
विज्ञापन

बताया जाता है कि मृतक की पहचान न होने पर झांसी की पुलिस ने शव को लावारिस मानकर मोर्चरी में रखवा दिया था। बाद में मोबाइल से जब जानकारी गांव पहुंची तो पिता अनिल का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शव लाने में धनाभाव सबसे बड़ी बाधा बन गया। लेकिन, गांव वालों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन लोगो ने शव गांव में लाने के लिए मृतक के पिता के हाथ में 23 हजार रुपये जुटाकर रख दिए। इसी रकम से पिता अनिल कुछ लोगों के साथ झांसी पहुंचे। रविवार को पोस्टमॉर्टम के बाद जब उन्होंने बेटे का शव देखा तो बेहोश होकर गिर पड़े। ग्रामीणों ने किसी तरह ढांढस बंधाया और लाश को लेकर अपने गांव पहुंचे। सोमवार को गांव में गमगीन माहौल में डुमरियागंज श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed