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Siddharthnagar News: अब बालिकाओं वाले वाहनों में महिला परिचालक अनिवार्य
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सिद्धार्थनगर। स्कूली बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में छह दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर 14 से 19 सितंबर तक मिशन सेफ फ्यूचर 3.0 के तहत स्कूलों में संचालित वाहनों की व्यवस्था को सुरक्षा मानकों पर परखा जाएगा।
अभियान में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन और उनकी नियमित बैठक कराने के साथ स्कूली वाहनों के प्रपत्र, फिटनेस, चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस और चरित्र का सत्यापन कराया जाएगा। इसके अलावा चालकों के स्वास्थ्य और नेत्र परीक्षण पर भी विशेष जोर रहेगा।
अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति गठित करना अनिवार्य होगा। उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली, 1998 के नियम 222-छ के तहत गठित होने वाली समिति में संबंधित तहसील के नायब तहसीलदार, थानाध्यक्ष, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी और उपखंड निरीक्षक पदेन सदस्य होंगे।
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समिति विद्यालय में संचालित प्रत्येक स्कूली वाहन के दस्तावेजों का सत्यापन करने के साथ चालकों की पृष्ठभूमि और लाइसेंस की जांच कराएगी। वाहन चालकों का स्वास्थ्य और नेत्र परीक्षण भी कराया जाएगा, जिससे बच्चों को ले जाने वाले चालक पूरी तरह सुरक्षित और सक्षम हों।
इस संबंध में एरआरटीओ संजय कुमार सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ कागजी सत्यापन तक सीमित न रहकर स्कूली बच्चों की रोजाना यात्रा को सुरक्षित बनाना है। छह दिनों के विशेष अभियान के दौरान विद्यालय स्तर पर परिवहन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने पर जोर रहेगा।
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वाहनों में परिचर की उपलब्धता होगी सुनिश्चित
मिशन सेफ फ्यूचर 3.0 में स्कूली वाहनों में परिचर (अटेंडेंट) की उपलब्धता को भी प्रमुखता दी गई है। विद्यालय प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक स्कूली वाहन में परिचर मौजूद रहे। परिचर की जिम्मेदारी बच्चों को वाहन में सुरक्षित तरीके से चढ़ाने और उतारने के साथ यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा पर नजर रखने की होगी। जिन स्कूली वाहनों में छात्राएं यात्रा करती हैं, उनमें महिला परिचर की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। अभियान के तहत बालिकाओं वाले वाहनों में परिचर अनन्य रूप से महिला ही रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को और मजबूत करना है।
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स्कूल प्रबंधन को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश
अभियान शुरू होने से पहले ही सभी विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन कर उसकी बैठक कराने के लिए कहा गया है। साथ ही स्कूली वाहनों की फिटनेस, जरूरी प्रपत्र, चालकों के चरित्र और ड्राइविंग लाइसेंस का सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। वाहनों में परिचर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ बालिकाओं को ले जाने वाले वाहनों में महिला परिचर की तैनाती भी करनी होगी।
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अभियान में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन और उनकी नियमित बैठक कराने के साथ स्कूली वाहनों के प्रपत्र, फिटनेस, चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस और चरित्र का सत्यापन कराया जाएगा। इसके अलावा चालकों के स्वास्थ्य और नेत्र परीक्षण पर भी विशेष जोर रहेगा।
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अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति गठित करना अनिवार्य होगा। उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली, 1998 के नियम 222-छ के तहत गठित होने वाली समिति में संबंधित तहसील के नायब तहसीलदार, थानाध्यक्ष, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी और उपखंड निरीक्षक पदेन सदस्य होंगे।
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समिति विद्यालय में संचालित प्रत्येक स्कूली वाहन के दस्तावेजों का सत्यापन करने के साथ चालकों की पृष्ठभूमि और लाइसेंस की जांच कराएगी। वाहन चालकों का स्वास्थ्य और नेत्र परीक्षण भी कराया जाएगा, जिससे बच्चों को ले जाने वाले चालक पूरी तरह सुरक्षित और सक्षम हों।
इस संबंध में एरआरटीओ संजय कुमार सिंह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ कागजी सत्यापन तक सीमित न रहकर स्कूली बच्चों की रोजाना यात्रा को सुरक्षित बनाना है। छह दिनों के विशेष अभियान के दौरान विद्यालय स्तर पर परिवहन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने पर जोर रहेगा।
वाहनों में परिचर की उपलब्धता होगी सुनिश्चित
मिशन सेफ फ्यूचर 3.0 में स्कूली वाहनों में परिचर (अटेंडेंट) की उपलब्धता को भी प्रमुखता दी गई है। विद्यालय प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक स्कूली वाहन में परिचर मौजूद रहे। परिचर की जिम्मेदारी बच्चों को वाहन में सुरक्षित तरीके से चढ़ाने और उतारने के साथ यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा पर नजर रखने की होगी। जिन स्कूली वाहनों में छात्राएं यात्रा करती हैं, उनमें महिला परिचर की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। अभियान के तहत बालिकाओं वाले वाहनों में परिचर अनन्य रूप से महिला ही रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को और मजबूत करना है।
स्कूल प्रबंधन को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश
अभियान शुरू होने से पहले ही सभी विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन कर उसकी बैठक कराने के लिए कहा गया है। साथ ही स्कूली वाहनों की फिटनेस, जरूरी प्रपत्र, चालकों के चरित्र और ड्राइविंग लाइसेंस का सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। वाहनों में परिचर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ बालिकाओं को ले जाने वाले वाहनों में महिला परिचर की तैनाती भी करनी होगी।