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Siddharthnagar News: बैंकिंग फ्राॅड और साइबर अपराध ने उत्पन्न की गंभीर चुनाैतियां
Sat, 13 Dec 2025 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 13 Dec 2025 11:43 PM IST
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में साइबर अपराध एवं सुरक्षा पर शुक्रवार को कार्यशाला आयोजित की गई। राजभवन के निर्देश पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति प्रो. कविता शाह के साथ आईआईटी कानपुर के सी3 आई हब की टीम के इंटरैक्शन सत्र से किया।
कुलपति प्रो. शाह ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने जहां जीवन को सरल बनाया है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल अरेस्ट, बैंकिंग फ्रॉड और विभिन्न साइबर अपराधों ने गंभीर चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। ऐसे में युवाओं एवं विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की जानकारी प्रदान करना अत्यधिक आवश्यक है और शिक्षण संस्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं।
डॉ. तनीमा हाजरा ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य नागरिकों और संस्थानों को डिजिटल जोखिमों से सुरक्षित करना है। यह पहल उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डेटा चोरी और साइबर हमलों से बचाने के लिए जागरूक करती है। योजना का लक्ष्य सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, गोपनीयता संरक्षण और डिजिटल कौशल का विकास करना है। इसके माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुखी साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
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साथ ही यह योजना देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
डॉ. आनंद हांडा ने आधुनिक साइबर खतरों, डिजिटल फॉरेंसिक, नेटवर्क सिक्योरिटी, पासवर्ड प्रबंधन और ऑनलाइन फ्रॉड डिटेक्शन के संदर्भ में साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम के आठ मॉड्यूल का विस्तृत परिचय दिया। नेहा श्रीवास्तव ने बताया कि साइबर सुरक्षा कोर्स हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सरल व सहज वीडियो सामग्री के माध्यम से संचालित किया जाएगा। लाखों विद्यार्थियों को अब तक इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिससे विभिन्न संस्थानों में डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता में वृद्धि होगी।
प्रो. आरके द्विवेदी ने कहा कि यह अत्यंत उपयोगी और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम है। उनके अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर विद्यार्थियों और संस्थानों को इसकी आवश्यकता समझानी होती है। कानपुर विश्वविद्यालय ने इसे अपने महाविद्यालयों में वोकेशनल कोर्स के रूप में संचालित किया है।
इसके परिणामस्वरूप विद्यार्थी न केवल साइबर अपराधों से स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित कर पाए हैं बल्कि रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित किए हैं। कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार ने कहा कि साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम आज के डिजिटल युग में अत्यंत अपरिहार्य है। यह विद्यार्थियों को डिजिटल जोखिमों, ऑनलाइन ठगी, आर्थिक नुकसान और साइबर धोखाधड़ी से बचने की वास्तविक क्षमता प्रदान करता है।
इस दौरान आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. सौरभ, प्रो. नीता यादव, डॉ. प्रकृति राय, डॉ. अजय मिश्रा, डॉ. बृजेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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कुलपति प्रो. शाह ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने जहां जीवन को सरल बनाया है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल अरेस्ट, बैंकिंग फ्रॉड और विभिन्न साइबर अपराधों ने गंभीर चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। ऐसे में युवाओं एवं विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की जानकारी प्रदान करना अत्यधिक आवश्यक है और शिक्षण संस्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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डॉ. तनीमा हाजरा ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य नागरिकों और संस्थानों को डिजिटल जोखिमों से सुरक्षित करना है। यह पहल उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डेटा चोरी और साइबर हमलों से बचाने के लिए जागरूक करती है। योजना का लक्ष्य सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, गोपनीयता संरक्षण और डिजिटल कौशल का विकास करना है। इसके माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुखी साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
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साथ ही यह योजना देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
डॉ. आनंद हांडा ने आधुनिक साइबर खतरों, डिजिटल फॉरेंसिक, नेटवर्क सिक्योरिटी, पासवर्ड प्रबंधन और ऑनलाइन फ्रॉड डिटेक्शन के संदर्भ में साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम के आठ मॉड्यूल का विस्तृत परिचय दिया। नेहा श्रीवास्तव ने बताया कि साइबर सुरक्षा कोर्स हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सरल व सहज वीडियो सामग्री के माध्यम से संचालित किया जाएगा। लाखों विद्यार्थियों को अब तक इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिससे विभिन्न संस्थानों में डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता में वृद्धि होगी।
प्रो. आरके द्विवेदी ने कहा कि यह अत्यंत उपयोगी और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम है। उनके अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर विद्यार्थियों और संस्थानों को इसकी आवश्यकता समझानी होती है। कानपुर विश्वविद्यालय ने इसे अपने महाविद्यालयों में वोकेशनल कोर्स के रूप में संचालित किया है।
इसके परिणामस्वरूप विद्यार्थी न केवल साइबर अपराधों से स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित कर पाए हैं बल्कि रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित किए हैं। कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार ने कहा कि साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम आज के डिजिटल युग में अत्यंत अपरिहार्य है। यह विद्यार्थियों को डिजिटल जोखिमों, ऑनलाइन ठगी, आर्थिक नुकसान और साइबर धोखाधड़ी से बचने की वास्तविक क्षमता प्रदान करता है।
इस दौरान आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. सौरभ, प्रो. नीता यादव, डॉ. प्रकृति राय, डॉ. अजय मिश्रा, डॉ. बृजेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।