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Siddharthnagar News: सिंचाई के लिए बने थे सागर, मछली पालन पट्टाधारकों ने किया कब्जा

Tue, 22 Aug 2023 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 22 Aug 2023 11:35 PM IST
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Seas were made for irrigation, fisheries lease holders captured
सिद्धार्थनगर। अंग्रेजी हुकूमत में खेतों की सिंचाई के लिए बर्डपुर क्षेत्र में पांच सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित 10 सागर अब किसानों के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं। इन सागरों पर मत्स्य पालन पट्टाधारकों ने कब्जा कर लिया है। वे अपने हिसाब से पानी रोक और निकाल रहे हैं। इससे खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। पट्टाधारक नहरों के मुंहाने पर जाल लगाकर सिर्फ मछली मारने के लिए ही पानी छोड़ रहे हैं। सिंचाई के लिए नहर में पानी खुलवाने गए जेई से पट्टाधारक ने बदसलूकी की और दोबारा नहीं आने की धमकी दी। जेई ने तहरीर देकर पट्टाधारक पर केस दर्ज कराया है।
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नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले बारिश के पानी को संग्रहित करने के लिए बर्डपुर क्षेत्र में जमींदारी नहर प्रणाली के तहत स्थापित 10 सागरों से 40 नहरें निकली हैं। इस संग्रहित जल से 243 किमी लंबी नहरों के माध्यम से आसपास के सैकड़ों गांवों की 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की सिंचाई होती थी। मात्र सिंचाई के लिए बने बजहा, मझौली, बटुआ, मरथी, महली, शिवपति, सेमरा, सिसवा, मसई व मोती सागरों में पिछले कुछ वर्षों से मछली पालन पट्टा होने लगा है। पट्टाधारलों ने इन सागरों पर कब्जा कर रखा है। इसका नतीजा है कि समय से नहरों में पानी नहीं पहुंचने के कारण किसानों के खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
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जरूरत के समय फसल को नहीं मिलता है पानी
ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग के अधीन इन सागरों पर पट्टाधारक नियंत्रण रखते हैं। वह मछली बीज डालने के लिए जल संग्रहित रखते हैं और अक्टूबर व नवंबर में मछली मारने के लिए नहरों की जगह दूसरे रास्ते पानी निकाल देते हैं। इस कारण रबी की फसल सिंचाई के समय सागरों में पानी नहीं रहता है और नहरें सूखी रहती हैं। वहीं, जब पानी की जरूरत नहीं होती है तो वे नहरों में पानी छोड़कर मछली का शिकार करते हैं। फसल डूबने से किसानों की क्षति होती है। वर्तमान में बजहा सागर के पट्टाधारक ने मछली का बीज डाला है। वह पानी निकासी नहीं करने दे रहा था। खेतों की सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ने पहुंचे जेई के साथ पट्टाधारक ने अभद्रता की।
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पट्टाधारक ऐसे करते हैं जलनिकासी पर नियंत्रण
सागरों से निकलने वाली नहरों के शीर्ष पर लोहे के फाटक (रेगुलेटर) लगे हुए हैं। ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग के कर्मचारी खेतों की सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ने को फाटक खोल देते हैं। कर्मियों के जाते ही पट्टाधारक फाटक बंद कर देते हैं। रात में तो पट्टाधारक सागरों पर पूरी तरह नियंत्रण कर लेते हैं। पट्टाधारक प्रत्येक नहर के फाटक के पास एक-एक आदमी बैठाए रहते हैं, जो उनकी जरूरत के अनुसार फाटक खोलते और बंद करते हैं। किसानों का कहना है कि जब उन्हें जरूरत नहीं रहती तभी पट्टाधारक फाटक खाेलते हैं।
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ऐसे होता है सागरों का पट्टा
सभी 10 सागरों में सबसे बड़े 102 हेक्टेयर क्षेत्रफल के बजहा सागर और 88 हेक्टेयर मझौली सागर के पट्टे के लिए मत्स्य पालन विभाग की तरफ से मंडलायुक्त कार्यालय में नीलामी की प्रक्रिया होती है। यह पट्टा 10 वर्ष के लिए होता है। जबकि शेष आठ सागरों के मत्स्य पालन का पट्टा जिले में ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग की तरफ से किया जाता है। यहां से प्रत्येक सागर का मत्स्य पालन पट्टा पांच वर्ष के लिए होता है। सर्वाधिक बोली बोलने वाले को ही पट्टा आवंटित किया जाता है। मत्स्य पालन विभाग बस्ती की तरफ से मझौली सागर का पिछले वर्ष पट्टा हुआ है, जबकि बजहा सागर का पिछले माह पट्टा हुआ है।
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जेई के साथ अभद्रता में केस दर्ज
बजहा सागर पर नहर में पानी रोकने और तटबंध पर अतिक्रमण की सूचना पर 20 अगस्त की रात मौके पर पहुंचे ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग के जेई मुनीब कुमार ने पट्टाधारक पंचम के विरुद्ध केस दर्ज कराया है। पुलिस दी तहरीर में उन्होंने बताया कि वह विभाग के ही जेई राजीव लोचन शर्मा के साथ मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद चिल्हिया थाना क्षेत्र के पीकापार निवासी पंचम ने उन्हें जातिसूचक गाली देते हुए धक्का-मुक्की की और दोबारा सागर पर आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। उनकी तहरीर पर पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट, धमकी देने व दलित उत्पीड़न के मामले में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
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सागरों का मछली पालन पट्टा गलत, निरस्त कराएंगे : बृजलाल
जिले के निवासी पूर्व डीजीपी व भाजपा के राज्यसभा सदस्य बृजलाल का कहना है कि उन्होंने सिंचाई के लिए बने सागरों का मछली पालन के लिए पट्टे का मामला सदन में उठाया था। उन्होंने कहा कि इससे किसानों का हित प्रभावित होता है और फसलों की सिंचाई बाधित होती है इसलिए सागरों का पट्टा किया जाना गलत है। अब भी अगर पट्टा किया गया है तो इसे निरस्त कराने के लिए उच्चाधिकारियों एवं शासन स्तर पर शिकायत करेंगे और हर हाल में सागरों का मछली पालन पट्टा निरस्त कराएंगे।
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नियम विरुद्ध है पानी रोकना
ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके नेहरा का कहना है कि सागरों में मछली पालन करने वाले पट्टा धारक सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ने से नहीं रोक सकते। इन सागरों का मुख्य उद्देश्य खेतों की सिंचाई है, इसलिए किसानों की जरूरत के अनुसार नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। इसमें कोई भी बाधा डालेगा तो उसके विरुद्ध कार्रवाई कराई जाएगी।
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जरूरत पर नहीं मिलता है कालानमक धान को पानी
सिद्धार्थनगर। कालानमक धान की फसल को पानी की अधिक आवश्यकता है। यह फसल 120 से 130 दिन में तैयार होती है। नहर में पानी नहीं होने से कई सालों से धान की खेती प्रभावित हो रही है। किसानों की शिकायत के बावजूद नहर में पानी नहीं छोड़ा जाता है। ओडीओपी में शामिल कालानमक धान का जिले में रकबा करीब 15 हजार हेक्टेयर हो गया है, लेकिन नहरों में पानी नहीं आने से खेती प्रभावित हो रही है और किसानों को घाटा हो रहा है।

किसानों ने बताईं दुश्वारियां
समय से सागरों की नहरों से पानी नहीं मिलने के कारण खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे कालानमक धान की फसल भी सूखने लगी है। -केसरी पांडेय, बिशुनपुर
बजहा सागर से निकली नहरों में पानी की दिक्कत पहले से थी, अब तो पट्टाधारकों की मनमानी के कारण समय से नहरों में पानी ही नहीं आता है। -राकेश कुमार, बनकटवा
धान की रोपाई तो किसी तरह से कर दी थी, लेकिन अब सागरों की नहरों में पानी नहीं होने से फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे फसल सूखने लली है। -ओंकार यादव, दुबरीपुर

मछली पालन के पट्टाधारकों की मनमानी से नहरों में पानी नहीं आने से समस्या बढ़ गई है। विभागीय अधिकारियों को इस पर तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है। -सुनील यादव, अहिरौली
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