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एक देश एक शिक्षा व्यवस्था की ओर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा

Sat, 06 Feb 2021 10:11 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2021 10:11 PM IST
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Primary education towards 'one country, one education system'
बच्चों को शिक्षा देगी बाला पेंटिंग। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
‘एक देश, एक शिक्षा व्यवस्था’ की ओर प्राथमिक शिक्षा
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परिषदीय विद्यालयों में अब एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों से होगी पढ़ाई
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद
सिद्धार्थनगर। ‘एक देश, एक शिक्षा व्यवस्था’ का पालन उत्तर प्रदेश में शुरू होने वाला है। यहां परिषदीय विद्यालयों में अब राज्य शिक्षा परिषद की किताबों की जगह एनसीईआरटी पाठ्यक्रम शामिल किया जा रहा है। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम एक बार में नहीं बदला जाएगा बल्कि कक्षा एक से शुरू किया जाएगा और प्रत्येक वर्ष अगली कक्षा में इन पुस्तकों को शामिल किया जाएगा।
सदर ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी रमेशचंद्र मौर्य ने बताया कि नए सत्र में एनसीईआरटी पुस्तकों पढ़ाने के लिए सभी विद्यालयों में एक-एक शिक्षक को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन शिक्षकों को नए पाठ्यक्रम के आधार पर पढ़ाने का प्रशिक्षण देने वाले मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा चुके हैं। मास्टर ट्रेनर नियाज अहमद ने बताया कि अब तक कक्षा एक के बच्चों को कलरव नाम की एक समेकित पुस्तक के जरिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरणीय अध्ययन की शिक्षा दी जा रही थी। अब कक्षा एक में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी। हिंदी भाषा के लिए एनसीईआरटी की रिमझिम, अंग्रेजी के लिए ‘मेरी गोल्ड’ और गणित के लिए ‘गणित का जादू’ नामक पुस्तकें लागू की जाएंगी। तीनों पुस्तकें बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए अत्यंत सहज, सरल, रोचक शैली में हैं। नई पुस्तकों में बच्चों के निर्धारित लर्निंग आउटकम की प्राप्ति के लिए क्रियात्मक गतिविधियों का विशेष समावेश किया गया है यानी बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई कराई जाएगी।
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दीवारें भी पढ़ाई में करेंगी मदद
बच्चों के लिए गणित, भाषा, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन जैसे विषयों को रोचक बनाने के लिए स्कूलों की इमारत और दीवारें भी मददगार होंगी। मास्टर ट्रेनर नियाज अहमद के मुताबिक भाषा और गणित विषय को सुगम बनाने के लिए विद्यालयों में प्रिंट रिच एनवायरनमेंट विकसित किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों की इमारतों में बाला (बिल्डिंग एज लर्निंग एड) पेंटिंग कराई जा रही है। सभी विद्यालयों में छोटी-छोटी कहानियों, कविताओं के चित्रात्मक पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं। बच्चे उन पोस्टरों को देखकर बेहतर नागरिक बनने के गुर तो सीखेंगे ही पाठ्यक्रम को भी आसानी से समझ सकेंगे। विद्यालयों में सक्रिय बाल पुस्तकालयों की स्थापना भी की गई है।
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