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Siddharthnagar News: सातवीं मोहर्रम पर अलम का जुलूस निकालकर किया नौहा मातम
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पूरे दिन हल्लौर सहित विभिन्न स्थानों पर चला मरसिया मजलिस का सिलसिला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मोहर्रम की सातवीं यानी बुधवार को जिले के शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर में अलम का जुलूस निकालकर अकीदतमंदों ने पूरे जोश-खरोश से नौहा मातम किया। इस दौरान इमामबाड़ा और घरों पर बड़ी तादात में अलम सजाए गए और लोगों ने पूरे दिन मरसिया मजलिस और मातम करके कर्बला के शहीदों को याद किया गया।
सातवीं मोहर्रम बुधवार की सुबह लगभग नौ बजे हल्लौर कस्बा स्थित बड़ा इमामबाड़ा से अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम द्वारा अलम का जुलूस निकाला गया, जो पूरे कस्बे में नौहा मातम के बीच गश्त करता हुआ शाम चार बजे हल्लौर चौराहे पर पहुंचा, जहां दोनों अंजुमनो के मातमी दस्ते ने नौहां और मातम किया। यहां से जुलूस वापस कस्बे में होता हुआ देर शाम बड़ा इमामबाड़ा पर पहुंचकर समाप्त हो गया। इससे पूर्व मोहर्रम की छठवीं की रात कस्बे में स्थित रौजा अली असगर से गहवारा अली असगर और अलम का जुलूस निकाला गया। जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए और नौहा मातम करके अली असगर की शहादत को याद किया। इस दौरान मजलिस को मौलाना सैयद महफूज अली और जाकिर जमाल हैदर ने संबोधित करते हुए छह महीने के अली असगर की शहादत को बयान किया। जिसे सुनकर मजलिस में मौजूद सभी अकीदतमंद हाय अली असगर की सदा बुलंद कर रो पड़े। सातवीं के मौके पर हल्लौर कस्बे में जगह-जगह शबील और चाय का स्टाॅल लगाया गया था। हल्लौर के अलावा भटगवा, जमोतीया, नऊंवा गांव, हटवा बुजुर्ग, रामभारी पिपरा, वासा तथा बेंवा आदि स्थानों पर सातवीं मोहर्रम पर मरसिया मजलिस आयोजित कर श्रद्धालुओं ने जुलूस निकालकर नौहा मातम किया। जुलूस को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। डुमरियागंज थानाध्यक्ष मुकेश कुमार राय भारी पुलिस फोर्स के साथ जुलूस के साथ-साथ चलते हुए दिखाई दिए।
सातवीं मोहर्रम को इमाम हुसैन के घरवालों के लिए बंद कर दिया गया था पानी
सातवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में इतिहास के मुताबिक यजीद की फौज ने इमाम हुसैन और उनके परिजनों तथा साथियों को पानी की आपूर्ति बंद कर दी थी ताकि वो शासक यजीद की मातहती हठधर्मिता स्वीकार कर लें। मगर इमाम हुसैन और उनके परिजनों और साथियों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। यजीद के लश्कर के हर जुल्म सितम को बर्दाश्त करते हुए हक और इंसाफ, सच्चाई का दामन अंत तक थामें रखा। सात मोहर्रम के साथ हर पल कर्बला में शहादत का वक्त करीब आ रहा था। यही कारण रहा कि बुधवार को सातवीं मोहर्रम के दिन से हल्लौर सहित क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर मोहर्रम पर निकलने वाले जुलूसों का सिलसिला भी तेज हो गया।
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अलम ताबूत का जुलूस आज
मोहर्रम की आठवीं तारीख बृहस्पतिवार की सुबह नौ बजे से हल्लौर स्थित दरगाह हजरत अब्बास से अलम का मातमी जुलूस कस्बे की दोनों अंजुमनो द्वारा अलग-अलग निकाला जाएगा, जो पूरे कस्बे में गश्त करेगा और रात में दरगाह हजरत अब्बास पहुंच कर समाप्त होगा। वहीं, रात्रि 10 बजे कस्बे के इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल से ताबूत अली असगर और अली अकबर का जुलूस निकाला जाएगा जो पूरे कस्बे में भ्रमण कर शुक्रवार की सुबह समाप्त होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मोहर्रम की सातवीं यानी बुधवार को जिले के शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर में अलम का जुलूस निकालकर अकीदतमंदों ने पूरे जोश-खरोश से नौहा मातम किया। इस दौरान इमामबाड़ा और घरों पर बड़ी तादात में अलम सजाए गए और लोगों ने पूरे दिन मरसिया मजलिस और मातम करके कर्बला के शहीदों को याद किया गया।
सातवीं मोहर्रम बुधवार की सुबह लगभग नौ बजे हल्लौर कस्बा स्थित बड़ा इमामबाड़ा से अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम द्वारा अलम का जुलूस निकाला गया, जो पूरे कस्बे में नौहा मातम के बीच गश्त करता हुआ शाम चार बजे हल्लौर चौराहे पर पहुंचा, जहां दोनों अंजुमनो के मातमी दस्ते ने नौहां और मातम किया। यहां से जुलूस वापस कस्बे में होता हुआ देर शाम बड़ा इमामबाड़ा पर पहुंचकर समाप्त हो गया। इससे पूर्व मोहर्रम की छठवीं की रात कस्बे में स्थित रौजा अली असगर से गहवारा अली असगर और अलम का जुलूस निकाला गया। जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए और नौहा मातम करके अली असगर की शहादत को याद किया। इस दौरान मजलिस को मौलाना सैयद महफूज अली और जाकिर जमाल हैदर ने संबोधित करते हुए छह महीने के अली असगर की शहादत को बयान किया। जिसे सुनकर मजलिस में मौजूद सभी अकीदतमंद हाय अली असगर की सदा बुलंद कर रो पड़े। सातवीं के मौके पर हल्लौर कस्बे में जगह-जगह शबील और चाय का स्टाॅल लगाया गया था। हल्लौर के अलावा भटगवा, जमोतीया, नऊंवा गांव, हटवा बुजुर्ग, रामभारी पिपरा, वासा तथा बेंवा आदि स्थानों पर सातवीं मोहर्रम पर मरसिया मजलिस आयोजित कर श्रद्धालुओं ने जुलूस निकालकर नौहा मातम किया। जुलूस को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। डुमरियागंज थानाध्यक्ष मुकेश कुमार राय भारी पुलिस फोर्स के साथ जुलूस के साथ-साथ चलते हुए दिखाई दिए।
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सातवीं मोहर्रम को इमाम हुसैन के घरवालों के लिए बंद कर दिया गया था पानी
सातवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में इतिहास के मुताबिक यजीद की फौज ने इमाम हुसैन और उनके परिजनों तथा साथियों को पानी की आपूर्ति बंद कर दी थी ताकि वो शासक यजीद की मातहती हठधर्मिता स्वीकार कर लें। मगर इमाम हुसैन और उनके परिजनों और साथियों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। यजीद के लश्कर के हर जुल्म सितम को बर्दाश्त करते हुए हक और इंसाफ, सच्चाई का दामन अंत तक थामें रखा। सात मोहर्रम के साथ हर पल कर्बला में शहादत का वक्त करीब आ रहा था। यही कारण रहा कि बुधवार को सातवीं मोहर्रम के दिन से हल्लौर सहित क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर मोहर्रम पर निकलने वाले जुलूसों का सिलसिला भी तेज हो गया।
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अलम ताबूत का जुलूस आज
मोहर्रम की आठवीं तारीख बृहस्पतिवार की सुबह नौ बजे से हल्लौर स्थित दरगाह हजरत अब्बास से अलम का मातमी जुलूस कस्बे की दोनों अंजुमनो द्वारा अलग-अलग निकाला जाएगा, जो पूरे कस्बे में गश्त करेगा और रात में दरगाह हजरत अब्बास पहुंच कर समाप्त होगा। वहीं, रात्रि 10 बजे कस्बे के इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल से ताबूत अली असगर और अली अकबर का जुलूस निकाला जाएगा जो पूरे कस्बे में भ्रमण कर शुक्रवार की सुबह समाप्त होगा।