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खाने के पड़े लाले तो शुरू हुआ पलायन
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भारत में रोजगार के आने लगे नेपाली कामगार
बढ़नी के रास्ते भारत के विभिन्न शहरों में जा रहे नेपाली
रवि शुक्ल
परसा (सिद्धार्थनगर)। कोरोना महामारी के वक्त भारत विभिन्न शहरों में रहकर परिवार के भरण-पोषण के लिए मेहनत मजदूरी करने वाले कामगार नेपाल वापस लौट गए थे। मगर नेपाल में रोजी रोटी के संकट के कारण नेपाली कामगार भारतीय महानगरों को पलायन कर रहे हैं। हर रोज लगभग सैकड़ों नेपाली कामगार भारतीय इलाके में आ रहे हैं। भारत के विभिन्न प्रांतों के महानगरों में काम करते हैं। नेपाल में कोई बड़ा उद्योग और खेती योग्य भूमि नहीं होने से नेपाली नागरिक भारत की ओर रुख करते हैं। मगर वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण में लोग रोजगार छोड़कर घरों के लिए निकल पड़े। पहली लहर में पीछा छूटा नहीं था कि दूसरी लहर आ गई। ऐसे मेेें लोग घरों पर ही रह गए। मगर संक्रमण की रफ्तार कम हुई तो एक बार फिर बड़ी संख्या में नेपाल कामगार बढ़नी के रास्ते भारत के महानगरों की ओर लौटने लगे हैं। दांग निवासी वीर बहादुर शर्मा ने बताया कि वह दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते थे। कोविड-19 के कारण वापस घर लौट आए थे। नेपाल में कोई काम नहीं होने से परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा था। इसलिए वापस दिल्ली जा रहा हूं। इसी प्रकार के अन्य लोगों का कहना है। कोई होटल तो माल आदि जगहों पर काम करते हैं। नेपाली नागरिक पहले बढ़नी आते हैं, फिर यहां से ट्रेन और बस के जरिये भारत के अन्य शहरों में जाते हैं। संवाद
इन प्रदेशों में अधिक जाते हैं नेपाली नागरिक
बढ़नी कस्बे से रोज गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश आज प्रांतों के विभिन्न महानगरों में सैकड़ों नेपाली कामगार नेपाल से भारत लौट रहे हैं।
नेपाल के इन जिलों से आते हैं नागरिक
पड़ोसी नेपाली जिला कपिलवस्तु सहित सुर्खेत, दांग, दैलेख, कंचनपुर, कैलानी, रुकूम, रोल्पा, अछाम आदि जिलों के नेपाली कामगार रोजी-रोटी की तलाश में भारत लौट रहे हैं। इन जिलों कई हजार लोग भारत के महानगरों में रहकर परिवार चलाते हैं।
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बढ़नी के रास्ते भारत के विभिन्न शहरों में जा रहे नेपाली
रवि शुक्ल
परसा (सिद्धार्थनगर)। कोरोना महामारी के वक्त भारत विभिन्न शहरों में रहकर परिवार के भरण-पोषण के लिए मेहनत मजदूरी करने वाले कामगार नेपाल वापस लौट गए थे। मगर नेपाल में रोजी रोटी के संकट के कारण नेपाली कामगार भारतीय महानगरों को पलायन कर रहे हैं। हर रोज लगभग सैकड़ों नेपाली कामगार भारतीय इलाके में आ रहे हैं। भारत के विभिन्न प्रांतों के महानगरों में काम करते हैं। नेपाल में कोई बड़ा उद्योग और खेती योग्य भूमि नहीं होने से नेपाली नागरिक भारत की ओर रुख करते हैं। मगर वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण में लोग रोजगार छोड़कर घरों के लिए निकल पड़े। पहली लहर में पीछा छूटा नहीं था कि दूसरी लहर आ गई। ऐसे मेेें लोग घरों पर ही रह गए। मगर संक्रमण की रफ्तार कम हुई तो एक बार फिर बड़ी संख्या में नेपाल कामगार बढ़नी के रास्ते भारत के महानगरों की ओर लौटने लगे हैं। दांग निवासी वीर बहादुर शर्मा ने बताया कि वह दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते थे। कोविड-19 के कारण वापस घर लौट आए थे। नेपाल में कोई काम नहीं होने से परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा था। इसलिए वापस दिल्ली जा रहा हूं। इसी प्रकार के अन्य लोगों का कहना है। कोई होटल तो माल आदि जगहों पर काम करते हैं। नेपाली नागरिक पहले बढ़नी आते हैं, फिर यहां से ट्रेन और बस के जरिये भारत के अन्य शहरों में जाते हैं। संवाद
इन प्रदेशों में अधिक जाते हैं नेपाली नागरिक
बढ़नी कस्बे से रोज गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश आज प्रांतों के विभिन्न महानगरों में सैकड़ों नेपाली कामगार नेपाल से भारत लौट रहे हैं।
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नेपाल के इन जिलों से आते हैं नागरिक
पड़ोसी नेपाली जिला कपिलवस्तु सहित सुर्खेत, दांग, दैलेख, कंचनपुर, कैलानी, रुकूम, रोल्पा, अछाम आदि जिलों के नेपाली कामगार रोजी-रोटी की तलाश में भारत लौट रहे हैं। इन जिलों कई हजार लोग भारत के महानगरों में रहकर परिवार चलाते हैं।
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