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Siddharthnagar News: कलश स्थापना के साथ कल से शुरू होगा शारदीय नवरात्र
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पूजा को लेकर खरीदारी करते रहे लोग, मां की नौ स्वरूपों की होगी पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शारदीय नवरात्र का महा उत्सव रविवार को कलश स्थापना के साथ शुरू हो जाएगा। पूजा को लेकर लोग तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। शुक्रवार को दिनभर लोग पूजा को लेकर आवश्यक खरीदारी करते रहे। आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 15 अक्टूबर से शुरू होगा। इसी तिथि से अगले नौ दिनों तक शक्ति की साधना और आराधना शुरू हो जाएगी।
शारदीय नवरात्र 15 से शुरू होकर 23 अक्तूबर तक रहेगी। जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक रहेगी, नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करते हुए मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होगी। इस वर्ष शारदीय नवरात्र पर देवी दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन हाथी की सवारी के साथ होगा। रविवार को मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं और प्रस्थान भी हाथी पर ही कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब रविवार और सोमवार से नवरात्रि शुरू होती है, तो देवी का वाहन हाथी होता है। माता के हाथी पर सवार होने का मतलब है सुख सम्पन्नता बढ़ेगी।
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नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा
हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र घटस्थापना के साथ शुरू हो जाते हैं। आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य के अनुसार, नवरात्र के दौरान व्रत धारण कर पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करने से वह अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं। जिससे सुख, समृद्धि, धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। घरों में अखंड जोत जलाने के साथ इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है।
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बाजारों में खरीदारों की खूब रही भीड़
नवरात्र पर पूजा का सामान लेने के लिए बाजार में खरीदारों की भीड़ शुरू हो चुकी है। शुक्रवार को सिद्धार्थचौक, बांसी तिराहा, हाइडिल तिराहा, कपड़ा गली समेत विभिन्न क्षेत्रों में लोग ने शृंगार किट, नारियल, धूप, दीये, कलश, जौ बोने के लिए पात्र आदि की खरीदारी की। इसके अलावा व्रत का सामान भी खरीदा।
46 मिनट कलश स्थापना का मुहूर्त
शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा यानी पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरु होती है। शक्ति पूजा से पहले मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर को 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक है, ऐसे में कलश स्थापना के लिए 46 मिनट का समय दिया गया है।
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नवरात्र से पहले ही चढ़ने लगा फलाहार का भाव
नवरात्र शुरू होने से पहले ही फलाहार के भाव चढ़ने लगा है। मेवा के साथ फलों के दाम भी बढ़ रहे हैं। गृहिणियों की चिंता है कि अचानक बढ़ी कीमतों के कारण बिगड़े बजट का प्रबंधन कैसे किया जाए। भीमापार की रागिनी ने बताया कि पितृपक्ष समाप्त होने से पहले फलाहार के भाव चढ़ गए हैं। महंगाई के कारण रसोई का बजट भी बिगड़ रहा है।
मेवे के दाम में हुई बढ़ोतरी
सामान मूल्य प्रति किलो
सितंबर अक्टूबर
मखाना 680 से 700 750 से 850
काजू 720 से 780 800 से 850
छुआरा 290 से 320 310 से 340
किशमिश 230 से 250 270 से 300
बादाम 830 से 890 900 से 950
नारियल गोला 15 से 20 20 से 25 प्रति किलो
चिरौंजी 1600 से 1650 1700 से 1750
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फल के दाम भी बढ़े (प्रति किलो रुपये)
फल सितंबर अक्टूबर
सेब 80 120
केला 25 40
अनार 150 200
पपीता 50 60
नारियल पानी 50 60
मुंगफली दाना 120 180
अनारदाना 150 190
कुटु का आटा 150 180
बाकला दाल 60 80
साबुदाना 80 100
तिनी चावल 90 180
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पूजा को लेकर खरीदारी करते रहे लोग, मां की नौ स्वरूपों की होगी पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शारदीय नवरात्र का महा उत्सव रविवार को कलश स्थापना के साथ शुरू हो जाएगा। पूजा को लेकर लोग तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। शुक्रवार को दिनभर लोग पूजा को लेकर आवश्यक खरीदारी करते रहे। आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 15 अक्टूबर से शुरू होगा। इसी तिथि से अगले नौ दिनों तक शक्ति की साधना और आराधना शुरू हो जाएगी।
शारदीय नवरात्र 15 से शुरू होकर 23 अक्तूबर तक रहेगी। जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक रहेगी, नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करते हुए मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होगी। इस वर्ष शारदीय नवरात्र पर देवी दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन हाथी की सवारी के साथ होगा। रविवार को मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं और प्रस्थान भी हाथी पर ही कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब रविवार और सोमवार से नवरात्रि शुरू होती है, तो देवी का वाहन हाथी होता है। माता के हाथी पर सवार होने का मतलब है सुख सम्पन्नता बढ़ेगी।
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नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा
हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र घटस्थापना के साथ शुरू हो जाते हैं। आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य के अनुसार, नवरात्र के दौरान व्रत धारण कर पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करने से वह अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं। जिससे सुख, समृद्धि, धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। घरों में अखंड जोत जलाने के साथ इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है।
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बाजारों में खरीदारों की खूब रही भीड़
नवरात्र पर पूजा का सामान लेने के लिए बाजार में खरीदारों की भीड़ शुरू हो चुकी है। शुक्रवार को सिद्धार्थचौक, बांसी तिराहा, हाइडिल तिराहा, कपड़ा गली समेत विभिन्न क्षेत्रों में लोग ने शृंगार किट, नारियल, धूप, दीये, कलश, जौ बोने के लिए पात्र आदि की खरीदारी की। इसके अलावा व्रत का सामान भी खरीदा।
46 मिनट कलश स्थापना का मुहूर्त
शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा यानी पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरु होती है। शक्ति पूजा से पहले मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर को 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक है, ऐसे में कलश स्थापना के लिए 46 मिनट का समय दिया गया है।
नवरात्र से पहले ही चढ़ने लगा फलाहार का भाव
नवरात्र शुरू होने से पहले ही फलाहार के भाव चढ़ने लगा है। मेवा के साथ फलों के दाम भी बढ़ रहे हैं। गृहिणियों की चिंता है कि अचानक बढ़ी कीमतों के कारण बिगड़े बजट का प्रबंधन कैसे किया जाए। भीमापार की रागिनी ने बताया कि पितृपक्ष समाप्त होने से पहले फलाहार के भाव चढ़ गए हैं। महंगाई के कारण रसोई का बजट भी बिगड़ रहा है।
मेवे के दाम में हुई बढ़ोतरी
सामान मूल्य प्रति किलो
सितंबर अक्टूबर
मखाना 680 से 700 750 से 850
काजू 720 से 780 800 से 850
छुआरा 290 से 320 310 से 340
किशमिश 230 से 250 270 से 300
बादाम 830 से 890 900 से 950
नारियल गोला 15 से 20 20 से 25 प्रति किलो
चिरौंजी 1600 से 1650 1700 से 1750
फल के दाम भी बढ़े (प्रति किलो रुपये)
फल सितंबर अक्टूबर
सेब 80 120
केला 25 40
अनार 150 200
पपीता 50 60
नारियल पानी 50 60
मुंगफली दाना 120 180
अनारदाना 150 190
कुटु का आटा 150 180
बाकला दाल 60 80
साबुदाना 80 100
तिनी चावल 90 180