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कराह रही ‘मानवता’ सेवक संवेदनहीन बने
अमर उजाला ब्यूरो/ सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 02 Dec 2015 11:22 PM IST
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मानवता की सेवा पर लंबी-चौड़ी बातें करने वालों की कमी नहीं है। चाहे सरकारी महकमा हो या सामाजिक संगठन। खुद को सेवक बताने में कसर नहीं छोड़ते, मगर जब जरूरत हो तब सबकी आंखों पर पट्टी बंध जाती है।
जिला अस्पताल में पिछले दस दिनों से कराहते बेसहारा व्यक्ति की पीड़ा किसी को नजर नहीं आ रही। मैले-कुचैले कपड़े में लिपटे जख्मी व्यक्ति की हालत देख लोग नाक-भौं सिकोड़ रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन ने उसे रेफर कर पल्ला झाड़ लिया है, अब मुश्किल यह है कि उसे गोरखपुर ले जाए कौन। दरअसल, करीब 10 दिन पहले जिला अस्पताल में करीब 45 वर्षीय एक व्यक्ति को भर्ती कराया गया। उसके हाथ-पांव में गहरे जख्म थे। समय से इलाज न होने के कारण घाव में कीड़े पड़ गए थे।
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अस्पताल प्रशासन ने इसे भर्ती कर लिया। दो-तीन दिनों तक उपचार भी किया, मगर उसके शरीर से उठते दुर्गंध के कारण कर्मचारियों-डॉक्टरों ने पास जाने से इनकार कर दिया। नतीजा सात दिनों से उसका उपचार भी नहीं हो रहा। हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
डॉक्टरों के इनकार के बाद अस्पताल प्रशासन ने इसे रेफर कर दिया है, मगर समस्या यह है कि जिस मरीज के नजदीक जाने से भी लोग कतरा रहे हैं, उसे गोरखपुर पहुंचाए कौन। इस सम्बन्ध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.रुचस्मति पांडेय के मुताबिक सात दिन पहले ही इस मरीज को रेफर किया जा चुका है। 108 एंबुलेंस से गोरखपुर भेजवाने की कोशिश की गई, मगर वह तैयार नहीं हुए। अब पुलिस-प्रशासन की मदद ली जा रही है।
इस संबंध्ा में डीएम डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि मरीज के साथ किसी तीमारदार का होना जरूरी है। अगर कोई आगे आए तो गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजवाने की व्यवस्था की जाएगी। हरसंभव मदद मिलेगी, बशर्ते कोई पहल करे।
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जिला अस्पताल में पिछले दस दिनों से कराहते बेसहारा व्यक्ति की पीड़ा किसी को नजर नहीं आ रही। मैले-कुचैले कपड़े में लिपटे जख्मी व्यक्ति की हालत देख लोग नाक-भौं सिकोड़ रहे हैं।
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अस्पताल प्रशासन ने उसे रेफर कर पल्ला झाड़ लिया है, अब मुश्किल यह है कि उसे गोरखपुर ले जाए कौन। दरअसल, करीब 10 दिन पहले जिला अस्पताल में करीब 45 वर्षीय एक व्यक्ति को भर्ती कराया गया। उसके हाथ-पांव में गहरे जख्म थे। समय से इलाज न होने के कारण घाव में कीड़े पड़ गए थे।
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अस्पताल प्रशासन ने इसे भर्ती कर लिया। दो-तीन दिनों तक उपचार भी किया, मगर उसके शरीर से उठते दुर्गंध के कारण कर्मचारियों-डॉक्टरों ने पास जाने से इनकार कर दिया। नतीजा सात दिनों से उसका उपचार भी नहीं हो रहा। हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
डॉक्टरों के इनकार के बाद अस्पताल प्रशासन ने इसे रेफर कर दिया है, मगर समस्या यह है कि जिस मरीज के नजदीक जाने से भी लोग कतरा रहे हैं, उसे गोरखपुर पहुंचाए कौन। इस सम्बन्ध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.रुचस्मति पांडेय के मुताबिक सात दिन पहले ही इस मरीज को रेफर किया जा चुका है। 108 एंबुलेंस से गोरखपुर भेजवाने की कोशिश की गई, मगर वह तैयार नहीं हुए। अब पुलिस-प्रशासन की मदद ली जा रही है।
इस संबंध्ा में डीएम डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि मरीज के साथ किसी तीमारदार का होना जरूरी है। अगर कोई आगे आए तो गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजवाने की व्यवस्था की जाएगी। हरसंभव मदद मिलेगी, बशर्ते कोई पहल करे।