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टीबी की दवा फूंकने के मामले की होगी जांच, कमेटी गठित
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टीबी की दवा फूंकने के मामले की होगी जांच, कमेटी गठित
डीएम के निर्देश पर एसडीएम व पीडी करेंगे प्रकरण की जांच
जांच के बाद सच्चाई आएगी सामने, लीपापोती में जुटे जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिला टीबी क्लीनिक के सामने बगैर एक्सपाइरी डेट वाली टीबी की दवाओं के फूंके जाने के मामले में जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रथमदृष्टया सीएमओ की ओर से जांच किए जाने के बाद जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम गठित की है। बहरहाल, गैर विभागीय अफसरों की जांच में ही सच्चाई उजागर हो पाएगी। इस प्रकरण में बचाव को लेकर जिम्मेदार लीपापोती करने में भी जुट गए हैं।
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री का भारत मुुक्त टीबी 2022 का संकल्प हैं, वहीं, प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ओर से हर अफसरों, कर्मियों व समाजसेवियों से टीबी रोगियों को गोद लेकर टीबी मुक्त करने की दिशा में लगातार आह्वान किया जा रहा है। अब ऐसे में जनपद में टीबी रोगियों के लिए दवाओं की समयबद्धता रहते ही जलाने का प्रकरण सामने आया है। सोमवार दोपहर जिला टीबी क्लीनिक के निकट खुले मैदान में टीबी रोगियों के लिए आई ऐसी दवाओं को भी जला दिया गया, जिनकी उपयोग 2020 तक थी। इस प्रकरण पर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। घटना की जानकारी होते ही डीएम दीपक मीणा ने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सीमा राय को प्रथमदृष्टया जांच के निर्देश दिए। सीएमओ ने जांच भी की। लेकिन मामला सुलझा नहीं। जिलाधिकारी ने मामले की गैर विभागीय अफसरों से भी जांच कराने का निर्णय लिया है। उपजिलाधिकारी सदर व जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक की संयुक्त जांच कमेटी गठित की है। अब जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि आखिर सच्चाई क्या है।
लखनऊ से आती हैं दवाएं
बताया जाता है कि जिन दवाओं को जलाने की चर्चा है, वह दवाएं काफी महंगी थीं। जिसे लखनऊ से शासन की ओर से भेजा जाता है। इसकी खरीदारी विभाग नहीं करता है। ऐसे में दवाएं क्यों जलाई गईं और किस बैच की जलाई गईं। उसका स्टॉक में न होना भी अपने आप में सवाल खड़ा कर रहा है। उस पर 2017 से स्टॉक का मेंटेन न होना भी जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
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डीएम के निर्देश पर एसडीएम व पीडी करेंगे प्रकरण की जांच
जांच के बाद सच्चाई आएगी सामने, लीपापोती में जुटे जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिला टीबी क्लीनिक के सामने बगैर एक्सपाइरी डेट वाली टीबी की दवाओं के फूंके जाने के मामले में जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रथमदृष्टया सीएमओ की ओर से जांच किए जाने के बाद जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम गठित की है। बहरहाल, गैर विभागीय अफसरों की जांच में ही सच्चाई उजागर हो पाएगी। इस प्रकरण में बचाव को लेकर जिम्मेदार लीपापोती करने में भी जुट गए हैं।
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री का भारत मुुक्त टीबी 2022 का संकल्प हैं, वहीं, प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ओर से हर अफसरों, कर्मियों व समाजसेवियों से टीबी रोगियों को गोद लेकर टीबी मुक्त करने की दिशा में लगातार आह्वान किया जा रहा है। अब ऐसे में जनपद में टीबी रोगियों के लिए दवाओं की समयबद्धता रहते ही जलाने का प्रकरण सामने आया है। सोमवार दोपहर जिला टीबी क्लीनिक के निकट खुले मैदान में टीबी रोगियों के लिए आई ऐसी दवाओं को भी जला दिया गया, जिनकी उपयोग 2020 तक थी। इस प्रकरण पर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। घटना की जानकारी होते ही डीएम दीपक मीणा ने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सीमा राय को प्रथमदृष्टया जांच के निर्देश दिए। सीएमओ ने जांच भी की। लेकिन मामला सुलझा नहीं। जिलाधिकारी ने मामले की गैर विभागीय अफसरों से भी जांच कराने का निर्णय लिया है। उपजिलाधिकारी सदर व जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक की संयुक्त जांच कमेटी गठित की है। अब जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि आखिर सच्चाई क्या है।
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लखनऊ से आती हैं दवाएं
बताया जाता है कि जिन दवाओं को जलाने की चर्चा है, वह दवाएं काफी महंगी थीं। जिसे लखनऊ से शासन की ओर से भेजा जाता है। इसकी खरीदारी विभाग नहीं करता है। ऐसे में दवाएं क्यों जलाई गईं और किस बैच की जलाई गईं। उसका स्टॉक में न होना भी अपने आप में सवाल खड़ा कर रहा है। उस पर 2017 से स्टॉक का मेंटेन न होना भी जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
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