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इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर सानी में मजलिस का आयोजन
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डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर में मजलिस को संबोधित करते बिहार के मुजफ्फरपुर से आए मौलाना असद याव?
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर सानी में मजलिस का आयोजन
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के हल्लौर स्थित इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फारोग मातम की ओर से आयोजित 10 दिवसीय मजलिस में शुक्रवार रात बिहार के मुजफ्फरनगर से आए मौलाना असद यावर ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों द्वारा हक, सच्चाई और इंसानियत की हिफाजत के लिए दी गई कुर्बानी को बयां किया। उन्होंने मजलिस के जरिए सभी लोगों से कर्बला की दास्तान से सबक लेकर नेकी भलाई और सच्चाई के रास्ते पर चलने की नसीहत दी।
मौलाना असद यावर ने कहा कि इस्लाम धर्म सभी को अमन शांति और मानवता, इंसानियत के रास्ते पर चलने की सीख देता है और सभी धर्म मजहब का आदर सम्मान करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि मजहब, इस्लाम को अगर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने पूरी दुनिया में पहुंचाया और लोगों को अच्छाई भलाई और प्यार मोहब्बत से मिलजुल कर रहने की शिक्षा दी, तो वहीं, इस्लाम को 10 मोहर्रम सन 61 हिजरी को कर्बला में फना, मिटने से बचाने के लिए हजरत मोहम्मद सअ के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपनी और अपने परिजनों साथियों की जान की कुर्बानी दी। मौलाना ने कहा कि इमाम हजरत अली की बहादुरी, विशेषता, महानता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। हजरत अली ने हमेशा अल्लाह और पैगंबर की फरमाबरदारी, आज्ञा का पालन किया। मौलाना ने मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनकी मासूम बेटी जनाबे सकीना और उनके काफिले पर यजीद के सैनिकों द्वारा किए गए जुल्म को बयान किया। इस दौरान अंजुमन के सदर इंजीनियर मोहम्मद मेहंदी, तस्कीन हैदर, अजीम हैदर, कसीम रिजवी, बेताब हल्लौरी, सावन हल्लौरी, जानसीन हैदर, वजीर हैदर, नियाज हैदर मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के हल्लौर स्थित इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन फारोग मातम की ओर से आयोजित 10 दिवसीय मजलिस में शुक्रवार रात बिहार के मुजफ्फरनगर से आए मौलाना असद यावर ने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों द्वारा हक, सच्चाई और इंसानियत की हिफाजत के लिए दी गई कुर्बानी को बयां किया। उन्होंने मजलिस के जरिए सभी लोगों से कर्बला की दास्तान से सबक लेकर नेकी भलाई और सच्चाई के रास्ते पर चलने की नसीहत दी।
मौलाना असद यावर ने कहा कि इस्लाम धर्म सभी को अमन शांति और मानवता, इंसानियत के रास्ते पर चलने की सीख देता है और सभी धर्म मजहब का आदर सम्मान करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि मजहब, इस्लाम को अगर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने पूरी दुनिया में पहुंचाया और लोगों को अच्छाई भलाई और प्यार मोहब्बत से मिलजुल कर रहने की शिक्षा दी, तो वहीं, इस्लाम को 10 मोहर्रम सन 61 हिजरी को कर्बला में फना, मिटने से बचाने के लिए हजरत मोहम्मद सअ के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपनी और अपने परिजनों साथियों की जान की कुर्बानी दी। मौलाना ने कहा कि इमाम हजरत अली की बहादुरी, विशेषता, महानता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। हजरत अली ने हमेशा अल्लाह और पैगंबर की फरमाबरदारी, आज्ञा का पालन किया। मौलाना ने मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनकी मासूम बेटी जनाबे सकीना और उनके काफिले पर यजीद के सैनिकों द्वारा किए गए जुल्म को बयान किया। इस दौरान अंजुमन के सदर इंजीनियर मोहम्मद मेहंदी, तस्कीन हैदर, अजीम हैदर, कसीम रिजवी, बेताब हल्लौरी, सावन हल्लौरी, जानसीन हैदर, वजीर हैदर, नियाज हैदर मौजूद रहे।
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