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शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपित बहाल
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शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपित बहाल
सिद्धार्थनगर। पिछले दो वर्ष से चर्चा में रहे जिले में शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा के मामले में नया मोड़ आ गया है। एसटीएफ एवं स्थानीय पुलिस ने जांच में बढ़नी ब्लॉक में तैनात रहे जिस शिक्षक को इस मामले का मुख्य आरोपित बताते हुए गिरफ्तार किया था, उसे बीएसए ने बहाल कर दिया है। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय के अनुसार, मुख्य आरोपित बताए जा रहे शिक्षक राकेश सिंह पर विभाग में सिर्फ अनुपस्थित होने का आरोप था। आरोपित ने मेडिकल रिपोर्ट दाखिल कर बीमार होने से अनुपस्थित रहने का कारण बताया। इसी आधार पर उसे बहाल किया गया।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता के पर्दाफाश और तत्कालीन बीएसए के निर्देश पर थाने में केस दर्ज के बाद जिले में वर्ष 2018 से जांच शुरू हुई थी। बाद में एसटीएफ भी जांच में शामिल हो गई थी। 30 मार्च 2019 को एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा करने के मुख्य आरोपी राकेश सिंह समेत दो लोगों को गोरखपुर से और बीएसए कार्यालय के एक बाबू को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया था कि देवरिया जिले के भाटपाररानी थाना क्षेत्र के कुईचवर निवासी राकेश सिंह देवरिया के खुखुंदु में एक साइबर कैफे से फर्जी शैक्षिक अभिलेख तैयार कराकर बीएसए कार्यालय के तत्कालीन कर्मचारियों एवं अधिकारियों के सहयोग से फर्जी शिक्षकों की भर्ती कराता था। गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद राकेश सिंह वर्तमान में जमानत पर जेल से बाहर है। 14 दिन पूर्व बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने उसे बहाल कर दिया है।
बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि शिक्षक राकेश सिंह को अनुपस्थित रहने के कारण निलंबित किया गया था। उसने अनुपस्थित रहने के समय का मेडिकल दे दिया है, जिस आधार पर उसे बहाल कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से उसके विरुद्ध केस नहीं दर्ज कराया गया था और न ही विभाग के किसी अन्य मामले में वह आरोपित था। जब पुलिस एवं एसटीएफ की जांच के मामले में वह कोर्ट से दोषी साबित होगा, तब उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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विभाग को नहीं पता दो वर्ष तक कहां था राकेश
बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि मैंने सुना तो है कि राकेश सिंह ही शिक्षक भर्ती के फर्जीवाड़े में मुख्य आरोपित है और एसटीएफ एवं पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन विभाग की तरफ से उसके विरुद्ध अनुपस्थित होने के अलावा कोई मामला नहीं था। अब उसे बहाल करने के साथ ही पिछले दो वर्ष तक वह कहां रहा और अनुपस्थिति के कारणों की जांच कराने का अलग से निर्देश दिए गए हैं। इस जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आएंगे, तब आगे की कार्रवाई की जाएगी। मतलब साफ है कि विभाग को यह नहीं पता कि शिक्षक दो वर्ष तक कहां था। वह जेल में था या नहीं, अथवा वह किस मामले में जेल में था, यह भी विभाग को नहीं पता है।
निलंबित अवधि का नहीं मिलेगा वेतन
बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि शिक्षक राकेश सिंह को निलंबित अवधि का वेतन अभी नहीं मिलेगा, जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। अभी बहाल किया गया है। बहाली के बाद जो अध्यापन कार्य करेगा, उसका वेतन मिलेगा। उन्होंने बताया कि किसी भी शिक्षक को छह माह से अधिक निलंबित नहीं रखा जा सकता। शिक्षक राकेश सिंह दो वर्ष से अधिक समय तक निलंबित रहा और पिछले चार माह से लगातार बहाल करने के लिए प्रत्यावेदन दे रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य फर्जी शिक्षकों की तरह अभी राकेश सिंह के शैक्षिक अभिलेखों की जांच संबंधी कोई रिपोर्ट उनके पास नहीं है।
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सिद्धार्थनगर। पिछले दो वर्ष से चर्चा में रहे जिले में शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा के मामले में नया मोड़ आ गया है। एसटीएफ एवं स्थानीय पुलिस ने जांच में बढ़नी ब्लॉक में तैनात रहे जिस शिक्षक को इस मामले का मुख्य आरोपित बताते हुए गिरफ्तार किया था, उसे बीएसए ने बहाल कर दिया है। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय के अनुसार, मुख्य आरोपित बताए जा रहे शिक्षक राकेश सिंह पर विभाग में सिर्फ अनुपस्थित होने का आरोप था। आरोपित ने मेडिकल रिपोर्ट दाखिल कर बीमार होने से अनुपस्थित रहने का कारण बताया। इसी आधार पर उसे बहाल किया गया।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता के पर्दाफाश और तत्कालीन बीएसए के निर्देश पर थाने में केस दर्ज के बाद जिले में वर्ष 2018 से जांच शुरू हुई थी। बाद में एसटीएफ भी जांच में शामिल हो गई थी। 30 मार्च 2019 को एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा करने के मुख्य आरोपी राकेश सिंह समेत दो लोगों को गोरखपुर से और बीएसए कार्यालय के एक बाबू को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया था कि देवरिया जिले के भाटपाररानी थाना क्षेत्र के कुईचवर निवासी राकेश सिंह देवरिया के खुखुंदु में एक साइबर कैफे से फर्जी शैक्षिक अभिलेख तैयार कराकर बीएसए कार्यालय के तत्कालीन कर्मचारियों एवं अधिकारियों के सहयोग से फर्जी शिक्षकों की भर्ती कराता था। गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद राकेश सिंह वर्तमान में जमानत पर जेल से बाहर है। 14 दिन पूर्व बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने उसे बहाल कर दिया है।
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बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि शिक्षक राकेश सिंह को अनुपस्थित रहने के कारण निलंबित किया गया था। उसने अनुपस्थित रहने के समय का मेडिकल दे दिया है, जिस आधार पर उसे बहाल कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से उसके विरुद्ध केस नहीं दर्ज कराया गया था और न ही विभाग के किसी अन्य मामले में वह आरोपित था। जब पुलिस एवं एसटीएफ की जांच के मामले में वह कोर्ट से दोषी साबित होगा, तब उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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विभाग को नहीं पता दो वर्ष तक कहां था राकेश
बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि मैंने सुना तो है कि राकेश सिंह ही शिक्षक भर्ती के फर्जीवाड़े में मुख्य आरोपित है और एसटीएफ एवं पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन विभाग की तरफ से उसके विरुद्ध अनुपस्थित होने के अलावा कोई मामला नहीं था। अब उसे बहाल करने के साथ ही पिछले दो वर्ष तक वह कहां रहा और अनुपस्थिति के कारणों की जांच कराने का अलग से निर्देश दिए गए हैं। इस जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आएंगे, तब आगे की कार्रवाई की जाएगी। मतलब साफ है कि विभाग को यह नहीं पता कि शिक्षक दो वर्ष तक कहां था। वह जेल में था या नहीं, अथवा वह किस मामले में जेल में था, यह भी विभाग को नहीं पता है।
निलंबित अवधि का नहीं मिलेगा वेतन
बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि शिक्षक राकेश सिंह को निलंबित अवधि का वेतन अभी नहीं मिलेगा, जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। अभी बहाल किया गया है। बहाली के बाद जो अध्यापन कार्य करेगा, उसका वेतन मिलेगा। उन्होंने बताया कि किसी भी शिक्षक को छह माह से अधिक निलंबित नहीं रखा जा सकता। शिक्षक राकेश सिंह दो वर्ष से अधिक समय तक निलंबित रहा और पिछले चार माह से लगातार बहाल करने के लिए प्रत्यावेदन दे रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य फर्जी शिक्षकों की तरह अभी राकेश सिंह के शैक्षिक अभिलेखों की जांच संबंधी कोई रिपोर्ट उनके पास नहीं है।