{"_id":"5804fe0d4f1c1b582c702cbb","slug":"made-island-school-studying-how","type":"story","status":"publish","title_hn":"टापू बना स्कूल, कैसे हो पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टापू बना स्कूल, कैसे हो पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 17 Oct 2016 10:06 PM IST
विज्ञापन
खोड़समा प्राइमरी स्कूल में साइकिलों से दूध लाते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटवा। विकासखंड खुनियांव के ग्राम पंचायत इटवा वन में विद्यालय बनने के पांच वर्षों बाद भी एक अदद रास्ता न होने से पठन-पाठन बाधित है। रास्ते के अभाव में स्कूल हल्की बारिश के बाद टापू बन जाता है। ऐसे में नामांकित बच्चे दूसरे स्कूल में पढ़ने को मजबूर हैं। बावजूद इसके अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
ग्राम पंचायत इटवा वन में दो अन्य राजस्व ग्राम जगजीवनपुर व कनिकपुर समाहित हैं। इन दोनों राजस्व गांवों में प्राइमरी विद्यालय और इटवा वन में जूनियर हाईस्कूल के अलावा प्राथमिक विद्यालय भी है। इटवा वन स्थित दोनों विद्यालयों के भवन गांव के दक्षिणी छोर पर स्थित पोखरे पर बना हुआ है। वहां से मात्र सौ मीटर की दूरी पर कनिकपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन है। वर्ष 2010-11 में बने इस भवन को एक अदद रास्ता नहीं मिल सका है, जिससे भवन निर्माण के बाद से ही पठन-पाठन बाधित है।
बारिश होने की स्थिति में यह विद्यालय टापू बन जाता है। वर्तमान में विद्यालय में कुल नामांकित बच्चे 75 है, जिन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक कार्यरत हैं। जलभराव के चलते विद्यालय के छात्र नजदीक स्थित प्राथमिक विद्यालय इटवा वन में पढने को मजबूर हैं। इटवा वन में 79 बच्चों के लिए कुल तीन शिक्षक हैं। इस कारण भवन में जगह की कमी से कुछ बच्चों को जूनियर विद्यालय में शिफ्ट करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विद्यालय के शिक्षक ओमप्रकाश बताते हैं कि प्रारंभ में तैनाती के दौरान बच्चों सहित हम लोग बाउंड्री लांघ कर पठन-पाठन की शुरुआत किए थे। स्कूल के किनारे जलभराव व गनवर की झाड़ी के कारण आए दिन विषधर जंतु परिसर में घूमते रहते हैं। एक दिन स्कूल के कक्ष में भी सांप घुस आया था। इसके बाद से अधिकारियों को सूचित करते हुए नजदीक स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को शिफ्ट कर दिया गया। पिछले पांच वर्षों से इसी विद्यालय भवन में पठन-पाठन का कार्य हो रहा है।
लोगों का कहना है कि अगर बच्चों को पांच वर्षों से नजदीक के प्राथमिक विद्यालय इटवा में ही पढ़ाना था तो लाखों रुपये सरकारी धन खर्च करने की क्या जरूरत थी। अगर भवन निर्माण में लाखों रुपये खर्च किया जा सकता था तो रास्ता बनाने के लिए धन क्यों नहीं है। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी खुनियांव पिंगल प्रसाद राना का कहना है कि रास्ते के लिए उपजिलाधिकारी डुमरियागंज से पत्राचार कर शीघ्र ही समस्या का समाधान कराया जायगा।
विज्ञापन
ग्राम पंचायत इटवा वन में दो अन्य राजस्व ग्राम जगजीवनपुर व कनिकपुर समाहित हैं। इन दोनों राजस्व गांवों में प्राइमरी विद्यालय और इटवा वन में जूनियर हाईस्कूल के अलावा प्राथमिक विद्यालय भी है। इटवा वन स्थित दोनों विद्यालयों के भवन गांव के दक्षिणी छोर पर स्थित पोखरे पर बना हुआ है। वहां से मात्र सौ मीटर की दूरी पर कनिकपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन है। वर्ष 2010-11 में बने इस भवन को एक अदद रास्ता नहीं मिल सका है, जिससे भवन निर्माण के बाद से ही पठन-पाठन बाधित है।
विज्ञापन
बारिश होने की स्थिति में यह विद्यालय टापू बन जाता है। वर्तमान में विद्यालय में कुल नामांकित बच्चे 75 है, जिन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक कार्यरत हैं। जलभराव के चलते विद्यालय के छात्र नजदीक स्थित प्राथमिक विद्यालय इटवा वन में पढने को मजबूर हैं। इटवा वन में 79 बच्चों के लिए कुल तीन शिक्षक हैं। इस कारण भवन में जगह की कमी से कुछ बच्चों को जूनियर विद्यालय में शिफ्ट करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विद्यालय के शिक्षक ओमप्रकाश बताते हैं कि प्रारंभ में तैनाती के दौरान बच्चों सहित हम लोग बाउंड्री लांघ कर पठन-पाठन की शुरुआत किए थे। स्कूल के किनारे जलभराव व गनवर की झाड़ी के कारण आए दिन विषधर जंतु परिसर में घूमते रहते हैं। एक दिन स्कूल के कक्ष में भी सांप घुस आया था। इसके बाद से अधिकारियों को सूचित करते हुए नजदीक स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को शिफ्ट कर दिया गया। पिछले पांच वर्षों से इसी विद्यालय भवन में पठन-पाठन का कार्य हो रहा है।
लोगों का कहना है कि अगर बच्चों को पांच वर्षों से नजदीक के प्राथमिक विद्यालय इटवा में ही पढ़ाना था तो लाखों रुपये सरकारी धन खर्च करने की क्या जरूरत थी। अगर भवन निर्माण में लाखों रुपये खर्च किया जा सकता था तो रास्ता बनाने के लिए धन क्यों नहीं है। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी खुनियांव पिंगल प्रसाद राना का कहना है कि रास्ते के लिए उपजिलाधिकारी डुमरियागंज से पत्राचार कर शीघ्र ही समस्या का समाधान कराया जायगा।