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वॉलीबाल खिलाड़ी की प्रैक्टिस पर लॉकडाउन का साया
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वॉलीबाल खिलाड़ी की प्रैक्टिस पर लॉकडाउन का साया
अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल खिलाड़ी रिया श्रीवास्तव ने बयां किया दर्द
स्पोर्ट्स कॉलेज की हैं खिलाड़ी, सवा साल से बंद हैं प्रतियोगिताएं
अभिमन्यु चौधरी
सिद्धार्थनगर। अपने जज्बा और मेहनत की बदौलत देश की उभरती वॉलीबॉल खिलाड़ी रिया की तरक्की के ट्रैक पर कोरोना काल ने ब्रेक लगा दिया है। रिया की प्रैक्टिस सवा साल से बंद है और उसे कॅरियर की चिंता सता रही है।
बढ़नी के मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ी रिया श्रीवास्तव ने लड़कों के साथ खेलकर वीर बहादुर स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में प्रवेश पाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया। रिया ने बताया कि पिता स्व. अनिल श्रीवास्तव की इच्छा थी कि बेटी खिलाड़ी बने। कस्बे में न स्टेडियम था और न ही साथ खेलने वाली लड़कियां। पिता ने गांधी इंटर कॉलेज के सामने मैदान में वॉलीबॉल सिखाने वाले कोच मो. इब्राहिम से संपर्क किया। उस समय 13 साल की रिया की लंबाई 5.2 इंच थी। कोच ने लड़कों के बीच में इकलौती लड़की को सिखाने का बीड़ा उठाया। रिया ने स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में प्रवेश लिया। कोरोना संक्रमण के दर्द को बयां करते हुए रिया ने बताया कि मार्च 2020 से कॉलेज के सभी खिलाड़ी घर चले गए। प्रैक्टिस बंद है और प्रतियोगिताएं भी। उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए यह बुरा दौर है। वह अपने छत पर ही रनिंग, वर्क आउट करती हैं। संवाद
कॅरियर की चिंता
स्पोर्ट्स कॉलेज में खिलाड़ियों को शिक्षा, कोचिंग और पर्याप्त डाइट मिलती है लेकिन कॉलेज छोड़कर घर जाने वाले ज्यादातर खिलाड़ियों को पर्याप्त डाइट मिलना संभव नहीं है। जानकारों के अनुसार महंगाई के दौर में एक खिलाड़ी को 400 रुपये की डाइट प्रतिदिन मिलनी चाहिए। रिया कहती है कि दो वर्ष पहले पिता का निधन हो गया। एक भाई बेरोजगार है और दो पढ़ाई कर रहे हैं। मां प्रतिभा सहज जनसेवा केंद्र संचालित करती हैं ताकि बेटी के अरमान अधूरे न रह जाएं।
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खेल अधिकारी और कोच ने की अपील
जिला खेल अधिकारी एसडीएस यादव ने उम्मीद जताई कि कोरोना का दौर खत्म होते ही रिया वापसी करेंगी। खेल में अच्छा मुकाम हासिल करेंगी। डीएम के माध्यम से रिया को सहयोग दिया गया था, फिर डीएम से सहयोग के लिए निवेदन करेंगे। जबकि कोच इब्राहिम का कहना है कि रिया बेहतरीन खिलाड़ी हैं, ऐसी प्रतिभाओं की मदद के लिए सक्षम लोगों को आगे आना चाहिए।
उपलब्धियां एक नजर में
2020- जूनियर नेशनल आंध्र प्रदेश, खेलो इंडिया असम में बेहतरीन प्रदर्शन
2019-अंडर-19 स्कूल नेशनल तमिलनाडु में प्रतिभाग, सीनियर स्टेट मैनपुरी में सिल्वर मेडल
2018-यूथ एशियन चैंपियनशिप थाइलैंड में प्रदर्शन, साउथ एशियन में चैंपियनशिप थाइलैंड में सिल्वर मेडल, अंडर-17 स्कूल नेशनल में ब्रांज
2017-सब जूनियर नेशनल राजस्थान में शानदार प्रदर्शन
2016-अंडर -14 स्कूल नेशनल खंडवा में सिल्वर मेडल
2015-मिनी नेशनल बंगलुरु कर्नाटक में प्रतिभाग किया
2014-अंडर -14 स्कूल स्टेट मिर्जापुर में गोल्ड मेडल
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अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल खिलाड़ी रिया श्रीवास्तव ने बयां किया दर्द
स्पोर्ट्स कॉलेज की हैं खिलाड़ी, सवा साल से बंद हैं प्रतियोगिताएं
अभिमन्यु चौधरी
सिद्धार्थनगर। अपने जज्बा और मेहनत की बदौलत देश की उभरती वॉलीबॉल खिलाड़ी रिया की तरक्की के ट्रैक पर कोरोना काल ने ब्रेक लगा दिया है। रिया की प्रैक्टिस सवा साल से बंद है और उसे कॅरियर की चिंता सता रही है।
बढ़नी के मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ी रिया श्रीवास्तव ने लड़कों के साथ खेलकर वीर बहादुर स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में प्रवेश पाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया। रिया ने बताया कि पिता स्व. अनिल श्रीवास्तव की इच्छा थी कि बेटी खिलाड़ी बने। कस्बे में न स्टेडियम था और न ही साथ खेलने वाली लड़कियां। पिता ने गांधी इंटर कॉलेज के सामने मैदान में वॉलीबॉल सिखाने वाले कोच मो. इब्राहिम से संपर्क किया। उस समय 13 साल की रिया की लंबाई 5.2 इंच थी। कोच ने लड़कों के बीच में इकलौती लड़की को सिखाने का बीड़ा उठाया। रिया ने स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में प्रवेश लिया। कोरोना संक्रमण के दर्द को बयां करते हुए रिया ने बताया कि मार्च 2020 से कॉलेज के सभी खिलाड़ी घर चले गए। प्रैक्टिस बंद है और प्रतियोगिताएं भी। उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए यह बुरा दौर है। वह अपने छत पर ही रनिंग, वर्क आउट करती हैं। संवाद
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कॅरियर की चिंता
स्पोर्ट्स कॉलेज में खिलाड़ियों को शिक्षा, कोचिंग और पर्याप्त डाइट मिलती है लेकिन कॉलेज छोड़कर घर जाने वाले ज्यादातर खिलाड़ियों को पर्याप्त डाइट मिलना संभव नहीं है। जानकारों के अनुसार महंगाई के दौर में एक खिलाड़ी को 400 रुपये की डाइट प्रतिदिन मिलनी चाहिए। रिया कहती है कि दो वर्ष पहले पिता का निधन हो गया। एक भाई बेरोजगार है और दो पढ़ाई कर रहे हैं। मां प्रतिभा सहज जनसेवा केंद्र संचालित करती हैं ताकि बेटी के अरमान अधूरे न रह जाएं।
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खेल अधिकारी और कोच ने की अपील
जिला खेल अधिकारी एसडीएस यादव ने उम्मीद जताई कि कोरोना का दौर खत्म होते ही रिया वापसी करेंगी। खेल में अच्छा मुकाम हासिल करेंगी। डीएम के माध्यम से रिया को सहयोग दिया गया था, फिर डीएम से सहयोग के लिए निवेदन करेंगे। जबकि कोच इब्राहिम का कहना है कि रिया बेहतरीन खिलाड़ी हैं, ऐसी प्रतिभाओं की मदद के लिए सक्षम लोगों को आगे आना चाहिए।
उपलब्धियां एक नजर में
2020- जूनियर नेशनल आंध्र प्रदेश, खेलो इंडिया असम में बेहतरीन प्रदर्शन
2019-अंडर-19 स्कूल नेशनल तमिलनाडु में प्रतिभाग, सीनियर स्टेट मैनपुरी में सिल्वर मेडल
2018-यूथ एशियन चैंपियनशिप थाइलैंड में प्रदर्शन, साउथ एशियन में चैंपियनशिप थाइलैंड में सिल्वर मेडल, अंडर-17 स्कूल नेशनल में ब्रांज
2017-सब जूनियर नेशनल राजस्थान में शानदार प्रदर्शन
2016-अंडर -14 स्कूल नेशनल खंडवा में सिल्वर मेडल
2015-मिनी नेशनल बंगलुरु कर्नाटक में प्रतिभाग किया
2014-अंडर -14 स्कूल स्टेट मिर्जापुर में गोल्ड मेडल