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महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली पर लॉकडाउन का सन्नाटा 16-09-27
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Lockdown Lumbani
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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फोटो 16 एसडीएन03पी
लॉकडाउन : सन्नाटे में है नेपाल का लुंबिनी बौद्ध स्थल
सामान्य दिनों में रहता था प्रतिदिन दस हजार से अधिक पर्यटकों का जमावड़ा
रोजी-रोटी के अभाव में रिक्शा, ई-रिक्शा चालक, कारोबारी भी बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
कपिलवस्तु। कोरोना के कारण लॉकडाउन का संकट भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी पर भी पड़ा है। हमेशा पयर्टक और श्रद्धालुओं की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला लुंबिनी कस्बा चारों ओर सन्नाटे से घिरा हुआ है। बौद्ध मतानुयायियों का आस्था केंद्र और प्रमुख पर्यटन स्थल होने के कारण लुंबिनी से नेपाल के लिए बड़ा आर्थिक स्रोत है।
लुंबिनी भगवान बुद्ध से जुड़ा बड़ा पर्यटन और तीर्थ स्थल है। सामान्य दिनों में यहां दस हजार से अधिक पयर्टक प्रतिदिन आते हैं। विश्व के दो तिहाई देशों के बौद्ध मतावलंबी लुंबिनी की धरती को माथे पर लगाकर धन्य होते हैं। इन पर्यटक और धर्मावलंबियों से मिलने वाले चढ़ावे से सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व मिलता है। नव वर्ष जैसे पर्वों पर यह आय पांच से सात गुना तक बढ़ जाती है। वर्तमान में यहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
लुंबिनी विकास कोष के सदस्य राजेश ज्ञावली ने बताया कि हिंदी नववर्ष के दिन जहां 50 हजार पर्यटकों की भीड़ जुटती थी। वहीं इस बार यह संख्या न के बराबर रही। लॉकडाउन के कारण मंदिर परिसर के सभी विहार, मंदिर व स्तूप बंद है। यहां भारत सहित कई देशों ने भव्य बुद्ध मंदिर बनवाए हैं जो पर्यटक तथा बौद्ध अनुयायियों को आर्कषित करते हैं। लुंबिनी नगर पालिका के मेयर कन्हैया चौधरी ने बताया कि मंदिर के आसपास स्थिति होटलों पर सन्नाटा है। रिक्शा, ई-रिक्शा तथा अन्य छोटे वाहन चालक जिनकी रोजी-रोटी का जरिया ही मंदिर के दर्शनार्थी व पर्यटक होते हैं। वर्तमान में सभी बेहाल हैं।
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लॉकडाउन : सन्नाटे में है नेपाल का लुंबिनी बौद्ध स्थल
सामान्य दिनों में रहता था प्रतिदिन दस हजार से अधिक पर्यटकों का जमावड़ा
रोजी-रोटी के अभाव में रिक्शा, ई-रिक्शा चालक, कारोबारी भी बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
कपिलवस्तु। कोरोना के कारण लॉकडाउन का संकट भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी पर भी पड़ा है। हमेशा पयर्टक और श्रद्धालुओं की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला लुंबिनी कस्बा चारों ओर सन्नाटे से घिरा हुआ है। बौद्ध मतानुयायियों का आस्था केंद्र और प्रमुख पर्यटन स्थल होने के कारण लुंबिनी से नेपाल के लिए बड़ा आर्थिक स्रोत है।
लुंबिनी भगवान बुद्ध से जुड़ा बड़ा पर्यटन और तीर्थ स्थल है। सामान्य दिनों में यहां दस हजार से अधिक पयर्टक प्रतिदिन आते हैं। विश्व के दो तिहाई देशों के बौद्ध मतावलंबी लुंबिनी की धरती को माथे पर लगाकर धन्य होते हैं। इन पर्यटक और धर्मावलंबियों से मिलने वाले चढ़ावे से सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व मिलता है। नव वर्ष जैसे पर्वों पर यह आय पांच से सात गुना तक बढ़ जाती है। वर्तमान में यहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
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लुंबिनी विकास कोष के सदस्य राजेश ज्ञावली ने बताया कि हिंदी नववर्ष के दिन जहां 50 हजार पर्यटकों की भीड़ जुटती थी। वहीं इस बार यह संख्या न के बराबर रही। लॉकडाउन के कारण मंदिर परिसर के सभी विहार, मंदिर व स्तूप बंद है। यहां भारत सहित कई देशों ने भव्य बुद्ध मंदिर बनवाए हैं जो पर्यटक तथा बौद्ध अनुयायियों को आर्कषित करते हैं। लुंबिनी नगर पालिका के मेयर कन्हैया चौधरी ने बताया कि मंदिर के आसपास स्थिति होटलों पर सन्नाटा है। रिक्शा, ई-रिक्शा तथा अन्य छोटे वाहन चालक जिनकी रोजी-रोटी का जरिया ही मंदिर के दर्शनार्थी व पर्यटक होते हैं। वर्तमान में सभी बेहाल हैं।
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