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दिव्यांगों के शौचालय में लटक रहा ताला
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जिला अस्पताल के परिसर में बना दिव्यांग शौचालय में लगा ताला।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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दिव्यांगों के शौचालय में लटक रहा ताला
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में बना शौचालय है अनुपयोगी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में दिव्यांगों के लिए बना शौचालय उनके काम नहीं आ रहा है। शौचालय में हमेशा ताला लटका रहता है और वाहन खड़े होते हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश को स्वच्छ बनाने की कवायद कर रही है। लोग खुले में शौच जाने को विवश न हों, इसके लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालय बनवा रही है। वहीं, सरकारी कार्यालयों मे आने वालों को जरूरत महसूस होने पर परेशानी न हो, इसे ध्यान में रहते हुए शौचालय का निर्माण करवाती है। वर्ष 2016-17 में माधव प्रसाद त्रिपाठी से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में ओपीडी द्वार के पास दिव्यांगों की सुविधा के लिए शौचालय का निर्माण कराया गया था। यहां पर रैंप की व्यवस्था की गई थी। अलग-अलग महिला और पुरुष के लिए शौचालय बना था, लेकिन यह शोपीस बनकर रह गया है। अस्पताल में इलाज कराने आए रामरेखा प्रसाद, उदयभान, हजरत अली ने कहा कि शौचालय बना है तो उसे खोल कर रखना चाहिए।
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एक हजार से अधिक होती है ओपीडी
29 लाख की आबादी वाले जनपद में लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक जिला अस्पताल है, जो मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गया है। यहां सामान्य दिनों में एक हजार और मौसम में बदलाव होने पर 1500 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है।10 से 20 दिव्यांग भी रोज इलाज कराने आते हैं। ऐसे में जरूरत पड़ने पर वे सामान्य शौचालय का उपयोग कर नहीं पाते हैं, क्योंकि वहां पर रैंप आदि की व्यवस्था नहीं है।
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कोट
जिला अस्पताल में कर्मचारियों के अभाव में दिव्यांग शौचालय बंद है। दो-चार दिन बाद कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो शौचालय की सुविधा शुरू हो जाएगी।
डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में बना शौचालय है अनुपयोगी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में दिव्यांगों के लिए बना शौचालय उनके काम नहीं आ रहा है। शौचालय में हमेशा ताला लटका रहता है और वाहन खड़े होते हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश को स्वच्छ बनाने की कवायद कर रही है। लोग खुले में शौच जाने को विवश न हों, इसके लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालय बनवा रही है। वहीं, सरकारी कार्यालयों मे आने वालों को जरूरत महसूस होने पर परेशानी न हो, इसे ध्यान में रहते हुए शौचालय का निर्माण करवाती है। वर्ष 2016-17 में माधव प्रसाद त्रिपाठी से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में ओपीडी द्वार के पास दिव्यांगों की सुविधा के लिए शौचालय का निर्माण कराया गया था। यहां पर रैंप की व्यवस्था की गई थी। अलग-अलग महिला और पुरुष के लिए शौचालय बना था, लेकिन यह शोपीस बनकर रह गया है। अस्पताल में इलाज कराने आए रामरेखा प्रसाद, उदयभान, हजरत अली ने कहा कि शौचालय बना है तो उसे खोल कर रखना चाहिए।
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एक हजार से अधिक होती है ओपीडी
29 लाख की आबादी वाले जनपद में लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक जिला अस्पताल है, जो मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हो गया है। यहां सामान्य दिनों में एक हजार और मौसम में बदलाव होने पर 1500 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है।10 से 20 दिव्यांग भी रोज इलाज कराने आते हैं। ऐसे में जरूरत पड़ने पर वे सामान्य शौचालय का उपयोग कर नहीं पाते हैं, क्योंकि वहां पर रैंप आदि की व्यवस्था नहीं है।
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कोट
जिला अस्पताल में कर्मचारियों के अभाव में दिव्यांग शौचालय बंद है। दो-चार दिन बाद कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो शौचालय की सुविधा शुरू हो जाएगी।
डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज