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पीएम मोदी के दौरे से और बढ़ेगी कालानमक की खुशबूू

Fri, 23 Jul 2021 11:31 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jul 2021 11:31 PM IST
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The fragrance of black salt dhan will increase due to PM Modi's visit
पीएम मोदी के दौरे से और बढ़ेगी कालानमक की खुशबूू
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- किसानों को विशेष पैकेज मिलने की संभावना, ओडीओपी में शामिल होने के बाद बढ़ी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भगवान बुद्ध की धरती पर प्रधानमंत्री के आगमन से बुद्ध का प्रसाद कहे जाने वाले कालानमक चावल की खुशबू और बढ़ सकती है। वर्ष 2019 में एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल होने के बाद से चावल की मांग और कीमत लगातार बढ़ रही है। किसानों एवं विशेषज्ञों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री सिद्धार्थनगर में कालानमक चावल के उत्पादन के लिए विशेष पैकेज दे सकते हैं। वहीं जिले में कालानमक से संबंधित धीमी गति से चल रही योजनाओं को पंख लगने की भी उम्मीद है।
यूं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 जुलाई को मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करने आएंगे। यही से वे आठ अन्य मेडिकल कॉलेजों का भी वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। संभावना है कि प्रधानमंत्री कालानमक चावल के स्वाद और सुगंध जैसे बिंदुओं पर ध्यान देंगे। जिला प्रशासन ने कालानमक चावल से संबंधित रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें प्रस्तावित और लंबित योजनाओं को भी शामिल किया गया है।
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आर्ट गैलरी में भी रहेगा कालानमक
जिम्मेदारों का प्रयास है कि अवसर मिला तो वे प्रधानमंत्री को कालानमक चावल का पैकेट देंगे। वहीं मेडिकल कॉलेज में लगने वाली आर्ट गैलरी में कालानमक चावल भी रहेगा। पेंटिंग्स के माध्यम के भी कालानमक चावल की खूबियां बताई जाएंगी।
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान की उम्मीद
डीएम दीपक मीणा ने की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति ने जिले में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान बनाने का प्रस्ताव बनाया है। इसके लिए ओडीओपी सेल लखनऊ में फरवरी 2021 में 15 करोड़ रुपये की परियोजना भेजी गई है। इसके अंतर्गत कालानमक चावल की गुणवत्ता बनाए रखने और बढ़ाने पर शोध होना है।
बढ़ रहा है कालानमक का रकबा
जिले में वर्ष 2020 में कालानमक का रकबा आठ हजार हेक्टेयर था। इस बार रकबा बढ़ने की संभावना है। कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि धान की रोपाई का सर्वे के बाद कालानमक धान का रकबा बढ़ा हुआ आएगा। इस बार करीब 15 हजार हेक्टेयर में कालानमक धान की रोपाई हुई है। कालानमक चावल के निर्यात और ऑनलाइन मार्केटिंग शुरू होने के बाद किसानों की रूझान बढ़ गई है। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त दयाशंकर सरोज ने बताया कि करीब छह करोड़ रुपये के कालानमक चावल के कॉमन फैसिलिटी सेंटर को बनाकर हैंडओवर करने की अंतिम तिथि अक्टूबर 2021 है। ज्यादा गर्म वातावरण में कालानमक धान व चावल रखा जाता है, उसके सुगंध में कमी आ जाती है। इस सेंटर के बनने के बाद एयरकंडीशन गोदाम में चावल रखा जाएगा तो स्वाद और सुगंध ज्यादा मिलेगी।
कालानमक का समर्थन मूल्य तय नहीं
जिले के सिसवा बुजुर्ग के रूद्र नाराययण त्रिपाठी, उदय नारायण, सूर्य प्रकाश, सोमनाथ तिवारी ने कहा कि ओडीओपी में शामिल होने के बाद भी कालानमक का समर्थन मूल्य तय नहीं है। कृषि विभाग द्वारा कालानमक का बीज उपलब्ध नहीं कराया जाता है। पीएम मोदी के दौरे से ये दोनों सुविधाएं मिलने की संभावना है। इसके साथ ही पीएम विशेष पैकेज भी दे सकते हैं।
दस प्रजातियों पर हो रही शोध
कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक प्रोजेक्ट के अंतर्गत कालानमक की दस प्रजातियों के धान की रोपाई की गई है। इसमें तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है कि इस जलवायु में अन्य मिट्टी के कालानमक धान से कितनी खुशबू आ रही है।

खास है यहां की जलवायु
कालानमक धान पर शोध करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी ने बताया कि नेपाल के तराई इलाके में पैदा हुए कालानमक चावल में स्वाद और सुगंध कुछ अलग होती है। बर्डपुर, शोहरतगढ़, बढ़नी, नौगढ़ क्षेत्र में ज्यादा किसान कालानमक धान की खेती करते हैं, जबकि जिले के सभी क्षेत्रों में कालानमक के लिए मिट्टी अच्छी है। बासमती एक्सपोर्ट बोर्ड की तरह कालानमक एक्सपोर्ट बोर्ड सिद्धार्थनगर बनाया जाना चाहिए।
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