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जेई से भी खतरनाक एईएस है
अमर उजाला ब्यूरो/ सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 03 Nov 2015 11:46 PM IST
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साल दर साल, बदतर हाल। जिले में इंसेफेलाइटिस की स्थिति कुछ ऐसी ही है। हालात और भी बेकाबू हो जाएंगे, अमर महकमा नहीं चेता तो। दरअसल, इंसेफेलाइटिस के बढ़ते प्रकोप का सबसे बड़ा कारण प्रशासन और पब्लिक की अज्ञानता है। जानलेवा समझकर पूरा तंत्र जेई के नियंत्रण में लगा हुआ है, जबकि उससे एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) उससे भी खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो साल में जितनी मौतें जेई से नहीं हुई हैं, उससे कई गुना अधिक लोग एईएस की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। बावजूद जिले में न तो एईएस की दवा है और न ही इलाज के बेहतर इंतजाम। जांच सुविधा तक नदारद है। पीड़ित को जेई की दवा ही दी जाती है।
असर हुआ तो ठीक वरना मौत तय है। विभागीय अफसर भी मानते हैं कि यहां एईएस का खतरा ही सबसे ज्यादा है, मगर संसाधनों की कमी के आगे बेबस हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर इंसेफेलाइटिस से हो रही मौतों का अंत कब होगा। प्रारंभिक लक्षण पर पहचान कर अस्पताल ले आए तो बचाव संभव है।
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एक दिन भी देरी होने पर जानलेवा साबित हो सकता है। इस संबंध में सीएमआे डॉ. अनीता सिंह ने बताया कि यह सही है जिले में एईएस का प्रकोप अधिक है। इसकी रोकथाम के लिए लगातार प्रयास जारी है। विभिन्न विभागों को साथ लेकर अभियान चलाया जा रहा है। जेई से बचाव के टीके लगाए जा रहे हैं। एईएस से बचाव के लिए दूषित पेयजल के सेवन से बचने और गहरी बोरिंग वाले इंडिया मार्का हैंडपंप के इस्तेमाल पर ही जोर है।
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आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो साल में जितनी मौतें जेई से नहीं हुई हैं, उससे कई गुना अधिक लोग एईएस की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। बावजूद जिले में न तो एईएस की दवा है और न ही इलाज के बेहतर इंतजाम। जांच सुविधा तक नदारद है। पीड़ित को जेई की दवा ही दी जाती है।
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असर हुआ तो ठीक वरना मौत तय है। विभागीय अफसर भी मानते हैं कि यहां एईएस का खतरा ही सबसे ज्यादा है, मगर संसाधनों की कमी के आगे बेबस हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर इंसेफेलाइटिस से हो रही मौतों का अंत कब होगा। प्रारंभिक लक्षण पर पहचान कर अस्पताल ले आए तो बचाव संभव है।
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एक दिन भी देरी होने पर जानलेवा साबित हो सकता है। इस संबंध में सीएमआे डॉ. अनीता सिंह ने बताया कि यह सही है जिले में एईएस का प्रकोप अधिक है। इसकी रोकथाम के लिए लगातार प्रयास जारी है। विभिन्न विभागों को साथ लेकर अभियान चलाया जा रहा है। जेई से बचाव के टीके लगाए जा रहे हैं। एईएस से बचाव के लिए दूषित पेयजल के सेवन से बचने और गहरी बोरिंग वाले इंडिया मार्का हैंडपंप के इस्तेमाल पर ही जोर है।