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Siddharthnagar News: कुर्मीपट्टी खेल मैदान से निकल रहीं फुटबाॅल की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
Sat, 16 May 2026 02:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 16 May 2026 02:45 AM IST
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बघौचघाट। विकासखंड पथरदेवा क्षेत्र का कुर्मीपट्टी खेल मैदान आज ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान बनता जा रहा है।
सीमित संसाधनों और सुविधाओं के अभाव के बावजूद यहां की बेटियां अपने कठिन परिश्रम और लगन के दम पर फुटबॉल की दुनिया में नया इतिहास रच रही हैं।यही कारण है कि इस छोटे से मैदान से निकलकर अब तक चार महिला खिलाड़ी भारतीय टीम में प्रतिभाग कर क्षेत्र और जिले का नाम रोशन कर चुकी हैं।
हिना खान मझौवा की रहने वाली है जो इसी खेल मैदान से खेलते हुए भारत की अंडर 19 टीम की कैप्टन बनकर बंगलादेश में होने वाले सैफ फुटबाॅल प्रतियोगिता का फाइनल जिताया था। इसी तरह जिया राव भारत की अंडर 14 वर्षीय टीम में खेलती हैं।
अर्चना यादव कस भारत की अंडरश-17 टीम में चयन हुआ जो जर्मनी में होने वाले प्रतियोगिता का हिस्सा है। इसी तरह समा परवीन भी अंडर 17 टीम में खेल रही हैं।
ग्रामीण परिवेश की इन बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। मैदान में न तो आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर है और न ही खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त संसाधन, लेकिन खिलाड़ियों का हौसला किसी बड़े शहर से कम नहीं है। सुबह-शाम कठिन अभ्यास कर खिलाड़ी अपने सपनों को साकार करने में जुटी हैं।
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सीमित संसाधनों और सुविधाओं के अभाव के बावजूद यहां की बेटियां अपने कठिन परिश्रम और लगन के दम पर फुटबॉल की दुनिया में नया इतिहास रच रही हैं।यही कारण है कि इस छोटे से मैदान से निकलकर अब तक चार महिला खिलाड़ी भारतीय टीम में प्रतिभाग कर क्षेत्र और जिले का नाम रोशन कर चुकी हैं।
हिना खान मझौवा की रहने वाली है जो इसी खेल मैदान से खेलते हुए भारत की अंडर 19 टीम की कैप्टन बनकर बंगलादेश में होने वाले सैफ फुटबाॅल प्रतियोगिता का फाइनल जिताया था। इसी तरह जिया राव भारत की अंडर 14 वर्षीय टीम में खेलती हैं।
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अर्चना यादव कस भारत की अंडरश-17 टीम में चयन हुआ जो जर्मनी में होने वाले प्रतियोगिता का हिस्सा है। इसी तरह समा परवीन भी अंडर 17 टीम में खेल रही हैं।
ग्रामीण परिवेश की इन बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। मैदान में न तो आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर है और न ही खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त संसाधन, लेकिन खिलाड़ियों का हौसला किसी बड़े शहर से कम नहीं है। सुबह-शाम कठिन अभ्यास कर खिलाड़ी अपने सपनों को साकार करने में जुटी हैं।
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