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Siddharthnagar News: सेहत सुधारने के बजाय बीमार कर देगा मिलावटी घी

Sat, 22 Feb 2025 11:17 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Feb 2025 11:17 PM IST
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Instead of improving health, adulterated ghee will make you sick
शहर में बिक रहा मिलावटी घी। संवाद
- घी में चल रहा है मिलावट का खेल, डालडा के साथ सुगंध बढ़ाने के लिए किया जा रहा है केमिकल का प्रयोग
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- उत्पादन न के बराबर फिर भी पर्याप्ता मात्रा में बाजार में उपलब्ध है घी, सैंपलिंग दो ली गई दोनों फेल, मिलावट की हुई पुष्टि
- तेल की ब्रांडिंग में खेल, पैकेट पर दावा और जांच में मिला अंतर, - जिले में फैजाबाद और बलरामपुर से आता है घी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सेहतमंद रहने और स्वाद के लिए अगर घी का सेवन कर रहे हैं तो सतर्क हो जाएं। क्योंकि दूध ही नहीं, बल्कि मिलावटी घी भी धंधेबाज बाजार में खपा रहे हैं। इसमें पैकेट से लेकर खुले तक में खेल हो रहा है।
अगर खरीद रहे हैं तो यह मानकर न चलें कि मिलावट नहीं है। क्योंकि हाल में सैंपलिंग और रिपोर्ट में घी के दो सैंपल फेल हुए हैं। इसमें मिलावट होने की पुष्टि भी हुई है। उसमें तेल सहित अन्य वस्तुओं की मात्रा पाई गई है। जिनके खिलाफ विभाग ने केस दर्ज करवाया है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर घी का नियमित रूप से सेवन कर रहे हैं और उसमें मिलावट है तो चर्बी बढ़ेगी। इससे मोटापा के साथ- साथ हार्ट अटैक, ब्रेन स्टोक और लकवा मार सकता है।
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वहीं, डालडा की मात्रा मिली है तो लंबे समय तक सेवन से गुर्दे पर भी असर पड़ सकता है। क्योंकि यह बहुत ही चिकना और खतरनाक होता है। इसलिए जो भी खाद्य पदार्थ का सेवन कर रहे हैं बहुत ही जांच परख कर करें। वहीं, विभागीय जिम्मेदारों का दवा है कि जांच करके कार्रवाई की जाती है। केस भी दर्ज करवाया जाता है।
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गोरखपुर से आता है पैकिंग वाला घी
बाजार की पड़ताल की गई तो कई ब्रांड का घी उपलब्ध है। इसमें 100 ग्राम से पांच किलो, 10 किलो की भी पैकिंग आ रही है। 70 प्रतिशत डिब्बा बंद और पैकेट वाला घी गोरखपुर से आता है। क्योंकि अधिकतर कारोबारी गोरखपुर से ही मंगाते हैं। नगर के किराना कारोबारी राकेश ने बताया कि घी 700, 680, 650 रुपये किलो आता है। इसमें वहां से खरीदते समय ही दाम में अंतर रहता है। इसके मूल्य में कमी उसमें कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है, लेकिन जानते हुए भी कई ब्रांड का घी रखते हैं। क्योंकि उसे खरीदने वाले अधिक हैं, जबकि महंगे वाले घी को लोग कम खरीदते हैं। इसीलिए सस्ती दर वाला खरीदकर लाते हैं, लेकिन बाजार में घी की कमी नहीं है। वहीं, दूध का कारोबार करने वाले जयकिशन यादव ने बताया कि दुकान पर अगर खुला घी ले रहे हैं तो मिलावट होनी ही है। क्योंकि खुले घी में उसी दुकान में ही डालडा डाल देते हैं। ग्राहकों को देखकर देते हैं। इसमें मिलावट वाला उन लोगों को दिया जाता हैं, जिन्हें तत्काल उपयोग करना होता है, जिससे पकड़ में न आए। शुद्ध घी जिसके घर पशु हैं वही खा सकता है।
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गांव के घी पर भी न करें भरोसा
अगर आप समझ रहे हैं कि 1000 से 1200 रुपये प्रति किलो गांव के पशु पालक से घी खरीद रहे हैं तो सही ही होगा। तो यह सोच आपकी गलत है। क्योंकि मोटी कमाई के लिए पशु पालक डालडा मिलाते हैं। भैंस का हो या गाय का। दही से मस्का निकालने के बाद उसे आग पर रखकर तपाया जाता है। यहीं से शुरू होता है मिलावट करने का खेल। इसमें आग पर रख समय डालडा डाल देते हैं, जिससे वह पूरी तरह से मिल जाता है, और पक कर उसी में घुल जाता है। ऐसे में खाने वाले को तनिक एहसास नहीं होता है। एक किलो में 100-200 ग्राम तक डालडा मिलाने का अंतर है। ऐसी गांव से लाकर घी बेचने वाले कुछ लोगों ने जानकारी दी। यानी रुपये देने के बाद असली घी खा रहे हैं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
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बलरामपुर और फैजाबाद से लाकर करते हैं बिक्री
ग्रामीण और शहरी इलाके में फैजाबाद और बलरामपुर से घी आता है। इसमें चुनिंदा लोग बाइक और अन्य माध्यम से आते हैं। कुछ तो चौराहों और कस्बे के दुकानदारों को सेट कर रखे हैं। जो उनसे मिलते हैं और 450-500 रुपये किलो में देकर चले जाते हैं। गांव में लोगों को शुद्ध बताते हुए और खुद का पशु पालक बताकर घी देने की पेशकश करते हैं। सेट हुआ तो कई लोगों को देकर निकल जाते हैं। यहां दूध से मलाई निकाल लेते हैं। इसके बाद वेस्ट में कुछ मिलाकर उसे घी के रूप में बेच लेते हैं। इनका पूर्व नेटवर्क है। जानकारों का कहना है कि खुले वाले में मिलावट होने की और आशंका रहती है।
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इस प्रकार कर सकते हैं पहचान
पशु पालक सुमेर यादव के मुताबिक असली और नकली घी पहचान करने के लिए आसान तरीका है। शुद्ध घी हल्का पीला होता है। जो तेल की तरह से दिखता है। ठंड में अगर जम जाता है, तो चुटकी में लेने के बाद दरदरा महसूस होता है, जबकि, डालडा मिला होता तो पकड़ने पर चिकना लगेगा। साथ ही गर्मी में भी वह गाढ़ा नजर आता है, जबकि अगर शुद्ध घी है तो वह डिब्बे में रखने के बाद भी तेल जैसा दिखने के साथ चमकता है। कई साल तक रख दिया जाए तो स्वाद और महक नहीं जाएगी। वहीं, मिलावट है तो स्वाद में अंतर के साथ- साथ गंध भी बदल जाती है। यह पहचान करने का तरीका है।
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इस प्रकार मिलावट के मामले आए सामने
जनवरी 2025 में घी के दो सैंपल लिए गए। इसमें दोनों फेल पाए गए। कुछ तत्व पाए गए हैं, वह क्या हैं इसके बारे में जांच हो रही है। वहीं, तेल के छह सैंपल लिए गए। इसमें मिलावट की बात सामने आई। हालांकि यह पुष्ट नहीं हुई कि क्या मिलाया गया है। वहीं, रिफाइन के सात सैंपल फेल मिले हैं। इसमें लेबल पर जो दर्शाया गया, वह तत्व उसमें नहीं पाया गया। वहीं, पिछले साल के आंकड़ों पर गौर करें तो 288 सैंपल लिए गए। इसमें 148 नमूना मानक अनुरूप नहीं मिले, जिसकी अग्रिम कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, एडीएम न्यायालय की ओर से 26 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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गुर्दे पर डाल सकता है असर
मिलावटी कोई भी पदार्थ हो वह शरीर के लिए नुकसानदेह है। खास करके लीवर और किडनी के लिए। इसमें तेल और घी मिलावट वाला है तो चर्बी बढ़ेगी। इससे हार्ट अटैक, ब्रेन स्टोक, लकवा मार सकता है। साथ ही डालडा नियमित खा रहे हैं तो लीवर में चिकनापन आएगा। इससे पेट से जुड़ी कई प्रकार की बीमार होगी। देखते ही देखते गुर्दा खराब हो जाएगा। तेल कोई भी हो उसका कम से कम प्रयोग करें।

-डॉ. एसके राव, एमडी मेडिसिन
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बोले जिम्मेदार
कई टीमें में बनी हुई हैं, जो नियमित जांच करती हैं और सैंपलिंग भी की जाती है। नमूना फेल होने पर केस दर्ज कराया जाता है। इसमें न्यायालय की ओर से अर्थदंड के साथ सजा भी हो रही है।
-आरएल यादव, उपायुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग
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