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कुशाग्र को क्रिकेटर बनाने के लिए पिता ने खुद सीखी बैटिंग: 15 साल की तपस्या रंग लाई, बेटा टीम इंडिया में शामिल

Sat, 17 Oct 2026 11:09 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 17 Oct 2026 11:09 AM IST
सार

कुमार कुशाग्र के पिता शशिकांत ने बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए खुद बल्लेबाजी की तकनीक सीखी। जेएनयू में इतिहासकार रोमिला थापर से मिली शोध की सीख को क्रिकेट में अपनाते हुए उन्होंने किताबों, वीडियो और लगातार अभ्यास के जरिए बेटे को प्रशिक्षित किया। 15 साल की मेहनत के बाद कुमार को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के आखिरी दो मैचों के लिए पहली बार भारतीय टीम में चुना गया।

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Kumar Kushagra story, How Father Taught Himself Cricket first, Son included in India ODI Team vs New Zealand
कुमार कुशाग्र - फोटो : Instagram

विस्तार

किसी पिता का सपना होता है कि उसका बेटा जिंदगी में कुछ बड़ा करे, लेकिन जब बेटे की आंखों में उस सपने की चमक तक न हो, तब उसे हकीकत में बदलने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है? झारखंड के विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र की कहानी कुछ ऐसी ही है। यहां एक पिता ने न सिर्फ बेटे के लिए सपना देखा, बल्कि उसे पूरा करने के लिए खुद क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा।

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उन्हें न क्रिकेट खेलने का अनुभव था और न ही कोचिंग का कोई औपचारिक प्रशिक्षण। फिर भी उन्होंने किताबें पढ़ीं, बड़े खिलाड़ियों के खेल का अध्ययन किया और अपने बेटे को बल्लेबाजी के गुर सिखाने में जिंदगी के 15 साल लगा दिए। अब कुमार को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के आखिरी दो मुकाबलों के लिए भारतीय टीम में पहली बार चुना गया है।
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कुमार कुशाग्र का करियर रिकॉर्ड

प्रारूप

मैच

पारियां

रन

सर्वोच्च स्कोर

औसत

स्ट्राइक रेट

शतक

अर्धशतक

कैच

स्टंपिंग

प्रथम श्रेणी

38

61

2507

266

42.49

59.80

7

6

66

15

लिस्ट ए

40

35

1387

143*

51.37

94.41

2

10

38

3

टी20

33

31

694

86*

27.76

145.18

0

5

25

3

नोट: * का मतलब है कि बल्लेबाज उस पारी में नाबाद रहा।

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Kumar Kushagra story, How Father Taught Himself Cricket first, Son included in India ODI Team vs New Zealand
कुमार कुशाग्र - फोटो : Kushagra Instagram
बेटे को क्रिकेटर बनाने की ठानी, खुद कभी बल्ला नहीं पकड़ा था
कुमार के पिता शशिकांत कुमार जमशेदपुर में जीएसटी के संयुक्त आयुक्त हैं। उन्होंने अपने बेटे में बचपन से क्रिकेट के प्रति कोई खास दिलचस्पी नहीं देखी थी। इसके बावजूद उन्होंने उसे क्रिकेटर बनाने का फैसला किया। इसकी वजह महेंद्र सिंह धोनी की सफलता थी। करीब 15 साल पहले उन्होंने देखा था कि क्रिकेट किस तरह किसी की जिंदगी बदल सकता है।

शशिकांत ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'अगर आप दुनिया को देखें, तो क्रिकेट में सब कुछ है- शोहरत, नाम और अच्छी जीवनशैली। आपको जो कुछ चाहिए, वह सब क्रिकेट में है। इसलिए मैंने सोचा कि हमें जिंदगी में कुछ नया करना चाहिए।' कुमार जब छह साल के थे, तभी पिता ने उन्हें क्रिकेट सिखाना शुरू कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी, लेकिन उन्होंने बेटे को किसी क्रिकेट अकादमी में भेजने के बजाय खुद उसे प्रशिक्षित करने का फैसला किया। उनका लक्ष्य साफ था- बेटे को एक दिन भारत की जर्सी में खेलते देखना।

शशिकांत ने स्वीकार किया कि कई बार कुमार क्रिकेट खेलने के लिए तैयार भी नहीं होते थे। उन्होंने कहा, 'कुमार को क्रिकेट में कोई दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन मैंने उसे खिलाया। बचपन में कई बार वह मेरी बात भी नहीं सुनता था, लेकिन मैं उससे कहता था कि तुम्हें हर हाल में खेलना है। मैंने जिंदगी में कभी क्रिकेट नहीं खेला था। न बल्ला पकड़ा था, न गेंद छुई थी। लेकिन मेरा इरादा था कि हमें दुनिया में ऐसा कुछ करना है कि लोग हमें पहचानें।'
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कुमार कुशाग्र का परिवार - फोटो : Kushagra Instagram
जेएनयू में रोमिला थापर से सीखा सबक, क्रिकेट में अपनाया शोध का तरीका
कुमार को क्रिकेट सिखाने के लिए उनके पिता ने पहले खुद सीखने का रास्ता चुना। उन्होंने बड़े क्रिकेटरों की किताबें पढ़ीं। बॉब वूल्मर और डॉन ब्रैडमैन जैसे दिग्गजों के अनुभवों से बल्लेबाजी की बारीकियां समझीं। राहुल द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग की बल्लेबाजी के वीडियो देखकर शॉट खेलने के तरीके सीखे। फिर हर शॉट को लिखकर उसकी तकनीक पर काम किया।

इस प्रक्रिया में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पढ़ाई के दौरान इतिहासकार रोमिला थापर से मिली सीख भी काम आई। शशिकांत ने वहां से एमए किया था। थापर पढ़ाई के दौरान किसी विषय पर गहराई से शोध करने पर जोर देती थीं। पिता ने इसी तरीके को क्रिकेट में अपनाया।
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कुमार कुशाग्र - फोटो : Kushagra Instagram
उन्होंने कहा, 'मैंने जेएनयू से पढ़ाई की थी। रोमिला थापर हमें पढ़ाती थीं और किसी भी विषय पर गहराई से शोध करने पर बहुत जोर देती थीं। मुझे यह बहुत अच्छा लगता था। इसलिए हमने क्रिकेट में भी वही तरीका अपनाया। हमें शोध करना था कि चीजें कैसे होती हैं, हाथ कहां रहना चाहिए, उंगलियों की स्थिति क्या होनी चाहिए और कलाई का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए। हमने क्या काम करता है और क्या नहीं, इस पर विस्तार से अध्ययन किया। अब उसे अपने खेल की अच्छी समझ है।'

पिता नेट्स पर कुमार को तेज गेंदबाजी और स्पिन, दोनों का अभ्यास कराते थे। पुल शॉट से लेकर ड्राइव तक, हर शॉट के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जाते थे। यह सिर्फ पिता-पुत्र का अभ्यास नहीं था, बल्कि एक ऐसा सफर था जिसमें पिता भी हर दिन कुछ नया सीख रहे थे।

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कुमार कुशाग्र - फोटो : Kushagra Instagram
डर दूर करने के लिए विकेटकीपिंग, अब मेहनत लाई रंग
कुमार की बल्लेबाजी के साथ विकेटकीपिंग भी विकसित हुई। शशिकांत ने 12 साल की उम्र में उन्हें रणजी खिलाड़ियों के सामने विकेटकीपिंग करानी शुरू कर दी, ताकि उनके भीतर का डर खत्म हो सके। तेज गेंदबाजों के सामने स्टंप के करीब खड़ा करना भी इसी कोशिश का हिस्सा था।

शशिकांत ने बताया कि वह बेटे को चोट लगने पर भी समझाते थे कि इससे जिंदगी खत्म नहीं हो जाती। शुरुआत में कुमार को विकेटकीपिंग भी पसंद नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे सीख लिया। राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में जाने और दूसरे खिलाड़ियों की जिंदगी देखने के बाद कुमार की गंभीरता भी बढ़ने लगी।

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कुमार कुशाग्र - फोटो : Kushagra Instagram
झारखंड से आईपीएल और अब टीम इंडिया तक का सफर
कुमार ने झारखंड में उम्र-वर्ग क्रिकेट से शुरुआत की और धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए। 19 साल की उम्र में वह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के टारगेट पूल में शामिल हुए। 2024 में उन्हें भारत ए टीम में जगह मिली। आईपीएल नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 7.2 करोड़ रुपये में खरीदा, जबकि पिछले सत्र में गुजरात टाइटंस ने उन्हें 65 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा।

अब न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के आखिरी दो मैचों के लिए भारतीय टीम में उनका चयन इस लंबे सफर का एक बड़ा पड़ाव है। यह उनके पिता के उस सपने की ओर बढ़ता कदम भी है, जिसे उन्होंने तब देखा था, जब बेटे को खुद क्रिकेट में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। शशिकांत के मुताबिक, आज कुमार अपने खेल को लेकर काफी प्रेरित हैं और अब भी अभ्यास के लिए उनके पास आते हैं। पिता का कहना है कि वह अपने बेटे के खेल को किसी और से बेहतर समझते हैं।

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कुमार कुशाग्र - फोटो : Instagram
कुमार की कहानी सिर्फ क्रिकेट में मिली सफलता की कहानी नहीं है। यह उस पिता की कहानी भी है, जिसने बेटे के सपने को आकार देने के लिए पहले खुद सीखना शुरू किया। अब जब भारतीय टीम का बुलावा आया है, तो उस उपलब्धि के पीछे वर्षों की पढ़ाई, अभ्यास, अनुशासन और पिता-पुत्र की साझा मेहनत भी खड़ी है।
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