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Siddharthnagar News: कहीं ऊंची कर दी सड़क तो कहीं भूल गए नाली, जलभराव ने बढ़ा दी मुसीबत
Mon, 20 Jul 2026 02:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 20 Jul 2026 02:11 AM IST
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सकारपार चौराहे से सप्तीनानकार-धर्मसिंहवा बाजार सहित तीन मार्गों पर समस्या
कई बार ग्रामीण उठा चुके आवाज, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
सिद्धार्थनगर। खेसरहा क्षेत्र में आवागमन बेहतर हो, इसके लिए करीब 20 करोड़ 56 लाख रुपये खर्च कर तीन क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण कराया गया। निर्माण के दौरान न तो आवश्यक स्थानों पर मिट्टी की पटाई कराई गई और न ही जल निकासी के लिए कुछ स्थानों पर नाली का निर्माण ही कराया गया। ऐसे में अब क्षेत्र के लोगों की जलभराव ने परेशानी बढ़ा दी है।
जिम्मेदारों की अनदेखी और लापरवाही का नतीजा यह है कि हल्की बारिश में ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी सड़क के कई हिस्सों में पानी भर गया है। इससे हजारों ग्रामीणों और राहगीरों को रोजाना कीचड़ और जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
सकारपार चौराहे से सप्तीनानकार-धर्मसिंहवा बाजार तक करीब साढ़े छह किलोमीटर लंबी सड़क पर चौराहे के दक्षिण दिशा में लगभग 15 मीटर तक पानी भरा रहता है। स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि निर्माण के समय सड़क को ऊंचा करने की मांग की गई थी लेकिन विभाग ने नई तकनीक का हवाला देकर पुरानी सतह पर ही सड़क तैयार कर दी। अब हालत यह है कि सड़क किनारे बनी नालियां सड़क से ऊंची हो गई हैं, जिससे पानी नालियों में जाने के बजाय सड़क पर ही भर जाता है। इसी तरह सकारपार से टीकुर, कुड़जा होते हुए चोरईताल तक बनी साढ़े सात किलोमीटर सड़क पर कुड़जा गांव के पास नाली न होने से बरसात में पानी फैला रहता है। इसके साथ ही सेमरा मुस्तहकम से मरवटिया बाजार होते हुए बेलौहा बाजार तक बनी साढ़े आठ किलोमीटर लंबी सड़क पर झुड़िया और टिकुइया गांव के पास लगातार जलभराव की स्थिति बनी हुआ है। ग्रामीणों ने विभाग से शीघ्र जल निकासी और सड़क सुधार की मांग की है।
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इस संबंध में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशाषी अभियंता शैलेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि इन सड़कों पर तत्काल संबंधित जेई को भेजकर दिखवाता हूं। इसके बाद जैसे भी समस्या का निस्तारण हो सकेगा, उसको कराया जाएगा।
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बोले लोग
इस मार्ग से क्षेत्र के करीब 30 से अधिक गांवों के लोग सकारपार चौराहे, बांसी व जिला मुख्यालय और गोरखपुर तक आवागमन करते हैं लेकिन जलभराव के कारण लोगों को कीचड़ भरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। ग्राहक भी दुकानों तक आने से कतराते हैं।
रामलाल चौबे, सकारपार चौराहा
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पानी निकासी की व्यवस्था न होने से आबादी क्षेत्र में सड़क पर लगातार पानी भरा रहता है जबकि इस मार्ग से लगभग 40 गांवों के लोग अस्पताल, जिला मुख्यालय और अन्य जरूरी कार्यों के लिए प्रतिदिन सफर करते हैं। इसमें जल्द सुधार की जरूरत है।
अनुरुद्ध यादव, निवासी कुड़जा अधिवक्ता
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कई बार ग्रामीण उठा चुके आवाज, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
सिद्धार्थनगर। खेसरहा क्षेत्र में आवागमन बेहतर हो, इसके लिए करीब 20 करोड़ 56 लाख रुपये खर्च कर तीन क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण कराया गया। निर्माण के दौरान न तो आवश्यक स्थानों पर मिट्टी की पटाई कराई गई और न ही जल निकासी के लिए कुछ स्थानों पर नाली का निर्माण ही कराया गया। ऐसे में अब क्षेत्र के लोगों की जलभराव ने परेशानी बढ़ा दी है।
जिम्मेदारों की अनदेखी और लापरवाही का नतीजा यह है कि हल्की बारिश में ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी सड़क के कई हिस्सों में पानी भर गया है। इससे हजारों ग्रामीणों और राहगीरों को रोजाना कीचड़ और जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
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सकारपार चौराहे से सप्तीनानकार-धर्मसिंहवा बाजार तक करीब साढ़े छह किलोमीटर लंबी सड़क पर चौराहे के दक्षिण दिशा में लगभग 15 मीटर तक पानी भरा रहता है। स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि निर्माण के समय सड़क को ऊंचा करने की मांग की गई थी लेकिन विभाग ने नई तकनीक का हवाला देकर पुरानी सतह पर ही सड़क तैयार कर दी। अब हालत यह है कि सड़क किनारे बनी नालियां सड़क से ऊंची हो गई हैं, जिससे पानी नालियों में जाने के बजाय सड़क पर ही भर जाता है। इसी तरह सकारपार से टीकुर, कुड़जा होते हुए चोरईताल तक बनी साढ़े सात किलोमीटर सड़क पर कुड़जा गांव के पास नाली न होने से बरसात में पानी फैला रहता है। इसके साथ ही सेमरा मुस्तहकम से मरवटिया बाजार होते हुए बेलौहा बाजार तक बनी साढ़े आठ किलोमीटर लंबी सड़क पर झुड़िया और टिकुइया गांव के पास लगातार जलभराव की स्थिति बनी हुआ है। ग्रामीणों ने विभाग से शीघ्र जल निकासी और सड़क सुधार की मांग की है।
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इस संबंध में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशाषी अभियंता शैलेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि इन सड़कों पर तत्काल संबंधित जेई को भेजकर दिखवाता हूं। इसके बाद जैसे भी समस्या का निस्तारण हो सकेगा, उसको कराया जाएगा।
बोले लोग
इस मार्ग से क्षेत्र के करीब 30 से अधिक गांवों के लोग सकारपार चौराहे, बांसी व जिला मुख्यालय और गोरखपुर तक आवागमन करते हैं लेकिन जलभराव के कारण लोगों को कीचड़ भरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। ग्राहक भी दुकानों तक आने से कतराते हैं।
रामलाल चौबे, सकारपार चौराहा
पानी निकासी की व्यवस्था न होने से आबादी क्षेत्र में सड़क पर लगातार पानी भरा रहता है जबकि इस मार्ग से लगभग 40 गांवों के लोग अस्पताल, जिला मुख्यालय और अन्य जरूरी कार्यों के लिए प्रतिदिन सफर करते हैं। इसमें जल्द सुधार की जरूरत है।
अनुरुद्ध यादव, निवासी कुड़जा अधिवक्ता