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बांसी माघ मेला जिले का पहचान दिलाया है: जयप्रताप
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माघ मेला कार्यक्रम में फूल माला से स्वागत करते लोग
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बांसी माघ मेले ने जिले को पहचान दी: जयप्रताप
बांसी में एक माह तक चलने वाले मेले का किया उद्घाटन
अमर उजाला ब्यूरो
बांसी। मौनी अमावस्या के पर्व पर बांसी के राप्ती नदी के तट पर प्रतिवर्ष एक माह तक चलने वाले 67वें बांसी माघ मेला एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री जय प्रताप सिंह ने बृहस्पतिवार को किया। कहा कि माघ मेला के जनक पं. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी आज हम लोगों के बीच नहीं हैं, पर आज उनके द्वारा स्थापित इस मेले की बदौलत पूरे मंडल ही नहीं बल्कि प्रदेश में बांसी के नाम को जाना जाता है।
कहा कि माघ मेला ने ही बांसी को पहचान दी है। बांसी का यह माघ मेला निश्चित तौर पर बांसी ही नहीं बल्कि पूरे जिले की एक प्राचीन धरोहर है, जिसे हम सभी को संभालकर रखना है। मेले के विकास के लिए जो भी आवश्यक होगा, किया जाएगा। डीएम दीपक मीणा ने कहा कि वर्तमान परिवेश में मनोरंजन के तमाम आधुनिक संसाधनों के बावजूद बांसी माघ मेला की जीवंतता तथा उपयोगिता दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। यह बांसी के लिए गर्व का विषय है। यहां की माटी के कण-कण में ऐतिहासिकता का समावेश है। एसपी विजय ढुल ने कहा कि माघ मेले में शांति एवं सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है। माघ मेले में थाना स्थापित है। मेले के दौरान अराजक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाएगी तथा शांति में खलल डालने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिका की पूर्व चेयरमैन चमन आरा राईनी ने कहा कि बांसी का यह माघ मेला हम सब की विरासत है। जिसे सजाकर रखना बांसी के लोगों की जिम्मेदारी है। नगर पालिका बांसी के अध्यक्ष मो. इद्रीश पटवारी ने कहा कि बांसी के माघ मेले को भव्य बनाये रखने के लिए वह संकल्पबद्ध हैं। माघ मेले में मेलार्थियों की हर सुख सुविधा की व्यवस्था की गई है। अपील की कि मेले में आने वाले हर दुकानदार व शोमैन हमारे अतिथि हैं। उनका पूरा सम्मान किया जाएगा। गुजरात से आए कचरा रिसाइकिलिंग के प्रभारी डॉ. सुमित आप्टे ने लोगों से अपील की कि कचरे का सदुपयोग करने के लिए यहां रिसाइकिलिग केन्द्र खोला गया है। समारोह में एसडीएम बांसी शिवमूर्ति सिंह, सीओ राकेश कुमार तिवारी, अधिशासी अधिकारी अरविंद कुमार, चिकित्साधिकारी डॉ. अश्वनी चौधरी, रतन शंकर चौधरी, प्रो.केपी त्रिपाठी, शाखा प्रबंधक ज्ञान प्रकाश, गौरीशंकर अग्रहरि, आनंदशंकर मणि त्रिपाठी, शेर अली समेत तमाम लोग मोजूद रहे। समारोह का संचालन डॉ. ज्ञानेन्द्र द्धिवेदी दीपक ने किया।
जय प्रताप ने किया पूजन, माल्यार्पण
67वें माघ मेला एवं प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने नगर पालिका के चेयरमैन मो. इद्रीश पटवारी तथा चमनआरा राईनी के साथ माघ मेला उत्तरी प्रवेश द्वार पर वैदिक मंत्रोचार के साथ पूजन कराने के बाद फीता काटा। इसके माघ मेला रिंग में स्थापित माघ मेला जनक पं. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
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फोटो- 61
कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ विष्णु महायज्ञ
खेसरहा ब्लॉक के कोटिया पांडेय में आयोजित हुआ कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
खेसरहा। क्षेत्र के कोटिया पांडेय गांव में बृहस्पतिवार को नौ दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ के लिए कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा बैंड बाजों के साथ हाथी पर सवार गुरु महाराज की अगुवाई में 201 महिलाओं के साथ यज्ञ मंडप से महुलानी, सकारपार चौराहा, टीकुर गांव होते हुए राप्ती नदी पर पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश भरा गया। कलश भरने के बाद यात्रा डुमरिया बुजुर्ग होते हुए यज्ञ मंडप पर पहुंची। जहां पर कलश स्थापना किया गया। इस अवसर पर आचार्य पं. राम जी शास्त्री, राहुल त्रिपाठी, गुड्डू पांडेय, राज बहादुर पांडेय, रामभजन चौधरी, सुरेंद्र पांडेय, भगवान दास गुप्ता, रंतिदेव पांडेय, मथुरा, श्यामधर यादव एवं मुख्य यजमान सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। यज्ञ संयोजक ने बताया कि नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ में प्रतिदिन दोपहर एक बजे से तीन बजे तक मानस कोकिला विजयलक्ष्मी का प्रवचन होगा। शाम आठ बजे से रामलीला का मंचन किया जाएगा।
छोटी शिवरात्रि पर कटेश्वरनाथ में श्रद्धालुओं ने की पूजा
इटवा। बृहस्पतिवार को छोटी महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं ने कटेश्वरनाथ स्थित शिवालय पर पहुंचकर पूजा अर्चना की। इस अवसर पर शिवलिंग पर जल चढ़ाकर परिवार व देश की कुशलता के लिए प्रार्थना की। बृहस्पतिवार को इटवा थाने के ग्राम कटेश्वरनाथ में स्थित शिव मंदिर में छोटी महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। भोर से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कड़ाके की ठंड के बावजूद शिव मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसमें सबसे अधिक संख्या महिलाओं की रही। वह मंदिर पर पहुंचकर परिवार व देश की कुशलता के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाकर शिवजी से प्रार्थना की।
फोटो कैप्सन-23एसडीएन83पी-मरवटिया गांव में आयोजित रामलीला कार्यक्रम में मंचन करते कलाकार
श्रीराम के गले में वरमाला डालते ही गूंजा जय श्रीराम
मरवटिया गांव में आयोजित श्रीरामलीला देखने उमड़ रही भक्तों की भारी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के मरवटिया गांव में चल रहे श्रीरामलीला के दौरान बुधवार की रात कलाकारों ने पुष्पवाटिका में सीता द्वारा श्रीराम के दर्शन और श्रीराम विवाह तक का सजीव मंचन किया गया। स्वयंवर के दौरान जैसे ही सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली, वैसे ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
श्रीरामलीला का शुभारंभ श्रीराम दरबार की भव्य आरती के साथ हुआ। कलाकारों ने दिखाया कि जनकपुर के महाराजा जनक अपनी बेटी सीता के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। न्योता पाकर गुरु वशिष्ठ भी अपने शिष्यों राम व लक्ष्मण के साथ स्वयंवर में आते हैं। दूसरे दिन सुबह राम उठकर राजा जनक के पुष्पवाटिका में टहलने के लिए जाते हैं। इसी समय सीता भी अपने सहेलियों के साथ पुष्पवाटिका में आती हैं। जहां वह श्रीराम के ओजस्वी रूप को देखती हैं। स्वयंवर में लंका का राजा रावण भी आता है। मगर स्वयंवर में शिव धनुष को तोड़ना तो दूर कोई हिला तक नहीं पाता है। राम गुरु वशिष्ठ की आज्ञा पाकर धनुष तोड़ते हैं। लक्ष्मण और परशुराम में काफी देर तक संवाद चलता है। बाद में राजा जनक के प्रयास से परशुराम का क्रोध शांत होता है। यह दृश्य देखकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु महिलाएं मंगलगीत गाने लगती हैं। इस दौरान लाल कृष्ण श्रीवास्तव, रामरक्षा चौबे, रूपेश, दीपक चौबे, प्रमोद चौबे, महेंद्र वर्मा, जितेंद्र वर्मा, मायाराम चौधरी आदि मौजूद रहे।
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बांसी में एक माह तक चलने वाले मेले का किया उद्घाटन
अमर उजाला ब्यूरो
बांसी। मौनी अमावस्या के पर्व पर बांसी के राप्ती नदी के तट पर प्रतिवर्ष एक माह तक चलने वाले 67वें बांसी माघ मेला एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री जय प्रताप सिंह ने बृहस्पतिवार को किया। कहा कि माघ मेला के जनक पं. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी आज हम लोगों के बीच नहीं हैं, पर आज उनके द्वारा स्थापित इस मेले की बदौलत पूरे मंडल ही नहीं बल्कि प्रदेश में बांसी के नाम को जाना जाता है।
कहा कि माघ मेला ने ही बांसी को पहचान दी है। बांसी का यह माघ मेला निश्चित तौर पर बांसी ही नहीं बल्कि पूरे जिले की एक प्राचीन धरोहर है, जिसे हम सभी को संभालकर रखना है। मेले के विकास के लिए जो भी आवश्यक होगा, किया जाएगा। डीएम दीपक मीणा ने कहा कि वर्तमान परिवेश में मनोरंजन के तमाम आधुनिक संसाधनों के बावजूद बांसी माघ मेला की जीवंतता तथा उपयोगिता दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। यह बांसी के लिए गर्व का विषय है। यहां की माटी के कण-कण में ऐतिहासिकता का समावेश है। एसपी विजय ढुल ने कहा कि माघ मेले में शांति एवं सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है। माघ मेले में थाना स्थापित है। मेले के दौरान अराजक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाएगी तथा शांति में खलल डालने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिका की पूर्व चेयरमैन चमन आरा राईनी ने कहा कि बांसी का यह माघ मेला हम सब की विरासत है। जिसे सजाकर रखना बांसी के लोगों की जिम्मेदारी है। नगर पालिका बांसी के अध्यक्ष मो. इद्रीश पटवारी ने कहा कि बांसी के माघ मेले को भव्य बनाये रखने के लिए वह संकल्पबद्ध हैं। माघ मेले में मेलार्थियों की हर सुख सुविधा की व्यवस्था की गई है। अपील की कि मेले में आने वाले हर दुकानदार व शोमैन हमारे अतिथि हैं। उनका पूरा सम्मान किया जाएगा। गुजरात से आए कचरा रिसाइकिलिंग के प्रभारी डॉ. सुमित आप्टे ने लोगों से अपील की कि कचरे का सदुपयोग करने के लिए यहां रिसाइकिलिग केन्द्र खोला गया है। समारोह में एसडीएम बांसी शिवमूर्ति सिंह, सीओ राकेश कुमार तिवारी, अधिशासी अधिकारी अरविंद कुमार, चिकित्साधिकारी डॉ. अश्वनी चौधरी, रतन शंकर चौधरी, प्रो.केपी त्रिपाठी, शाखा प्रबंधक ज्ञान प्रकाश, गौरीशंकर अग्रहरि, आनंदशंकर मणि त्रिपाठी, शेर अली समेत तमाम लोग मोजूद रहे। समारोह का संचालन डॉ. ज्ञानेन्द्र द्धिवेदी दीपक ने किया।
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जय प्रताप ने किया पूजन, माल्यार्पण
67वें माघ मेला एवं प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने नगर पालिका के चेयरमैन मो. इद्रीश पटवारी तथा चमनआरा राईनी के साथ माघ मेला उत्तरी प्रवेश द्वार पर वैदिक मंत्रोचार के साथ पूजन कराने के बाद फीता काटा। इसके माघ मेला रिंग में स्थापित माघ मेला जनक पं. राजेन्द्र नाथ त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
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कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ विष्णु महायज्ञ
खेसरहा ब्लॉक के कोटिया पांडेय में आयोजित हुआ कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
खेसरहा। क्षेत्र के कोटिया पांडेय गांव में बृहस्पतिवार को नौ दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ के लिए कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा बैंड बाजों के साथ हाथी पर सवार गुरु महाराज की अगुवाई में 201 महिलाओं के साथ यज्ञ मंडप से महुलानी, सकारपार चौराहा, टीकुर गांव होते हुए राप्ती नदी पर पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश भरा गया। कलश भरने के बाद यात्रा डुमरिया बुजुर्ग होते हुए यज्ञ मंडप पर पहुंची। जहां पर कलश स्थापना किया गया। इस अवसर पर आचार्य पं. राम जी शास्त्री, राहुल त्रिपाठी, गुड्डू पांडेय, राज बहादुर पांडेय, रामभजन चौधरी, सुरेंद्र पांडेय, भगवान दास गुप्ता, रंतिदेव पांडेय, मथुरा, श्यामधर यादव एवं मुख्य यजमान सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। यज्ञ संयोजक ने बताया कि नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ में प्रतिदिन दोपहर एक बजे से तीन बजे तक मानस कोकिला विजयलक्ष्मी का प्रवचन होगा। शाम आठ बजे से रामलीला का मंचन किया जाएगा।
छोटी शिवरात्रि पर कटेश्वरनाथ में श्रद्धालुओं ने की पूजा
इटवा। बृहस्पतिवार को छोटी महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं ने कटेश्वरनाथ स्थित शिवालय पर पहुंचकर पूजा अर्चना की। इस अवसर पर शिवलिंग पर जल चढ़ाकर परिवार व देश की कुशलता के लिए प्रार्थना की। बृहस्पतिवार को इटवा थाने के ग्राम कटेश्वरनाथ में स्थित शिव मंदिर में छोटी महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। भोर से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कड़ाके की ठंड के बावजूद शिव मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसमें सबसे अधिक संख्या महिलाओं की रही। वह मंदिर पर पहुंचकर परिवार व देश की कुशलता के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाकर शिवजी से प्रार्थना की।
फोटो कैप्सन-23एसडीएन83पी-मरवटिया गांव में आयोजित रामलीला कार्यक्रम में मंचन करते कलाकार
श्रीराम के गले में वरमाला डालते ही गूंजा जय श्रीराम
मरवटिया गांव में आयोजित श्रीरामलीला देखने उमड़ रही भक्तों की भारी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के मरवटिया गांव में चल रहे श्रीरामलीला के दौरान बुधवार की रात कलाकारों ने पुष्पवाटिका में सीता द्वारा श्रीराम के दर्शन और श्रीराम विवाह तक का सजीव मंचन किया गया। स्वयंवर के दौरान जैसे ही सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली, वैसे ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
श्रीरामलीला का शुभारंभ श्रीराम दरबार की भव्य आरती के साथ हुआ। कलाकारों ने दिखाया कि जनकपुर के महाराजा जनक अपनी बेटी सीता के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। न्योता पाकर गुरु वशिष्ठ भी अपने शिष्यों राम व लक्ष्मण के साथ स्वयंवर में आते हैं। दूसरे दिन सुबह राम उठकर राजा जनक के पुष्पवाटिका में टहलने के लिए जाते हैं। इसी समय सीता भी अपने सहेलियों के साथ पुष्पवाटिका में आती हैं। जहां वह श्रीराम के ओजस्वी रूप को देखती हैं। स्वयंवर में लंका का राजा रावण भी आता है। मगर स्वयंवर में शिव धनुष को तोड़ना तो दूर कोई हिला तक नहीं पाता है। राम गुरु वशिष्ठ की आज्ञा पाकर धनुष तोड़ते हैं। लक्ष्मण और परशुराम में काफी देर तक संवाद चलता है। बाद में राजा जनक के प्रयास से परशुराम का क्रोध शांत होता है। यह दृश्य देखकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु महिलाएं मंगलगीत गाने लगती हैं। इस दौरान लाल कृष्ण श्रीवास्तव, रामरक्षा चौबे, रूपेश, दीपक चौबे, प्रमोद चौबे, महेंद्र वर्मा, जितेंद्र वर्मा, मायाराम चौधरी आदि मौजूद रहे।