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Siddharthnagar News: नेपाली चाय का भारत में आयात फिर शुरू, किसानों और कारोबारियों को मिली राहत
Wed, 01 Jul 2026 01:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 01 Jul 2026 01:59 AM IST
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सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से जुड़े नेपाल के चाय उत्पादक क्षेत्रों के किसानों और कारोबारियों के लिए राहत भरी खबर है। गुणवत्ता जांच प्रक्रिया के कारण करीब दो महीने से रुका नेपाली चाय का भारत में आयात दोबारा शुरू हो गया है। इसके साथ ही गोदामों में फंसी चाय की खेप भारतीय बाजार भेजी जाने लगी है और नए ऑर्डर भी मिलने शुरू हो गए हैं।
भारत की ओर से गुणवत्ता जांच प्रणाली में बदलाव करते हुए सभी खेपों की अनिवार्य जांच के बजाय जोखिम आधारित (रिस्क-बेस्ड) जांच व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत नेपाल से आने वाली प्रत्येक पांच खेप में से केवल एक की ही जांच की जाएगी। इसके बाद काकरभिट्टा-पानीटंकी सीमा के रास्ते नेपाली चाय का निर्यात फिर से शुरू हो गया है।
निर्यात बंद होने के दौरान अकेले इलाम जिले की चाय फैक्टरियों में करीब 12 लाख किलोग्राम ऑर्थोडॉक्स चाय का स्टॉक फंस गया था। इससे चाय उद्योग के साथ-साथ हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब निर्यात शुरू होने के बाद फंसी हुई चाय को भारतीय बाजार भेजने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
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नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, इलाम से ऑर्थोडॉक्स चाय लेकर ट्रक सोमवार से भारत पहुंचने लगे हैं। कारोबारियों का कहना है कि भारतीय बाजार से नए ऑर्डर भी मिलने लगे हैं, जिससे कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। नेपाल सरकार ने निर्यात बहाल कराने के लिए कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास किए। प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रिपरिषद की पहल पर गठित टास्क फोर्स ने भारतीय अधिकारियों के साथ समन्वय किया, जिसके बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जांच प्रणाली में ढील देने का निर्णय लिया।
हालांकि, कारोबारी अभी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। पानी टंकी सीमा पर परीक्षण प्रयोगशाला नहीं होने के कारण जांच के लिए नमूने अब भी कोलकाता भेजने पड़ते हैं। इसके अलावा भारतीय एजेंसियों के पास आवश्यकता पड़ने पर स्पॉट टेस्टिंग का अधिकार भी बना हुआ है। कारोबारियों का मानना है कि फिलहाल निर्यात का रास्ता खुलने से उद्योग, किसानों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है लेकिन इसकी स्थिरता दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय और भारतीय पक्ष की नीतियों पर निर्भर करेगी।
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भारत की ओर से गुणवत्ता जांच प्रणाली में बदलाव करते हुए सभी खेपों की अनिवार्य जांच के बजाय जोखिम आधारित (रिस्क-बेस्ड) जांच व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत नेपाल से आने वाली प्रत्येक पांच खेप में से केवल एक की ही जांच की जाएगी। इसके बाद काकरभिट्टा-पानीटंकी सीमा के रास्ते नेपाली चाय का निर्यात फिर से शुरू हो गया है।
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निर्यात बंद होने के दौरान अकेले इलाम जिले की चाय फैक्टरियों में करीब 12 लाख किलोग्राम ऑर्थोडॉक्स चाय का स्टॉक फंस गया था। इससे चाय उद्योग के साथ-साथ हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब निर्यात शुरू होने के बाद फंसी हुई चाय को भारतीय बाजार भेजने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
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नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अनुसार, इलाम से ऑर्थोडॉक्स चाय लेकर ट्रक सोमवार से भारत पहुंचने लगे हैं। कारोबारियों का कहना है कि भारतीय बाजार से नए ऑर्डर भी मिलने लगे हैं, जिससे कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। नेपाल सरकार ने निर्यात बहाल कराने के लिए कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास किए। प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रिपरिषद की पहल पर गठित टास्क फोर्स ने भारतीय अधिकारियों के साथ समन्वय किया, जिसके बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जांच प्रणाली में ढील देने का निर्णय लिया।
हालांकि, कारोबारी अभी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। पानी टंकी सीमा पर परीक्षण प्रयोगशाला नहीं होने के कारण जांच के लिए नमूने अब भी कोलकाता भेजने पड़ते हैं। इसके अलावा भारतीय एजेंसियों के पास आवश्यकता पड़ने पर स्पॉट टेस्टिंग का अधिकार भी बना हुआ है। कारोबारियों का मानना है कि फिलहाल निर्यात का रास्ता खुलने से उद्योग, किसानों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है लेकिन इसकी स्थिरता दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय और भारतीय पक्ष की नीतियों पर निर्भर करेगी।